‘बालिका वधु’ (Balika Vadhu) में आनंदी की सास बनकर पहचान बनाने वाली स्मिता बंसल (Smita Bansal) ने अपनी एक्टिंग से सबको इम्प्रेस किया है. उन्होंने साल 1998 में टीवी की दुनिया में कदम रखा था. लेकिन बालिका वधु में आनंदी की सास सुमित्रा बनकर वो घर-घर में छा गईं. इसके बाद भी उन्होंने कई टीवी सीरियल्स में काम किया है. हाल ही में स्मिता मेरी सहेली पॉडकास्ट (Meri Saheli Podcast) में बतौर गेस्ट पहुंची थीं, जहां उन्होंने अपनी लाइफ, करियर, मदरहुड के बारे में काफी इंटरेस्टिंग बातें शेयर कीं. साथ ही पुराने दिनों (Smita Bansal of ‘Balika Vadhu’ recalls the old days) को भी याद किया.

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स्मिता बंसल (Smita Bansal) ने बताया कि टीवी इंडस्ट्री में आज कलाकारों के लिए वैनिटी वैन, मेकअप रूम और तमाम सुविधाएं आम बात हैं. लेकिन उनके टाइम पर ये सारी फैसिलिटीज नहीं होती थीं. “उस समय तो वैनिटी वैन का कल्चर था ही नहीं. सभी आर्टिस्ट एक ही मेकअप रूम शेयर करते थे. हर आर्टिस्ट को अलग से मेकअप रूम नहीं मिलता था. ऐटलीस्ट टेलीविजन में तो ऐसा नहीं होता था. ‘अमानत’ के टाइम पर हम 9 लोग, 7 सिस्टर्स और 2 बुआ एक ही मेकअप रूम शेयर करते थे. हम एक बंगले में शूट करते थे तो बंगले में जो कॉमन वॉशरूम होता था, हम वही यूज़ करते थे.”

स्मिता ने आगे बताया, “मेरे पहले शो ‘इतिहास’ की शूटिंग फिल्मसिटी में होती थी. ये 30 साल पहले की बात है. तब फ़िल्मसिटी में मेकअप रूम्स तो बने हुए थे, लेकिन टॉयलेट्स नहीं बने थे. तो हम लोगों को टॉयलेट जाना होता था तो गाड़ी लेकर ऑफिस जाना होता था. पैदल तो जा नहीं सकते थे. तो जैसे ही लंच ब्रेक होता था तो हम सारी फीमेल्स जीप में भरकर वॉशरूम जाती थीं. बीच में भी आप चाहें तो जा सकते थे, लेकिन मैं तो डर के मारे इतना कम पानी पीती थी कि कहीं सूसू न आ जाए. उस समय ये पता ही नहीं था कि ये सब बेसिक नीड्स हैं. लेकिन बाद में इंडस्ट्री इवॉल्व हुई, अब तो हाइजीन, टॉयलेट्स सब कुछ का बहुत ध्यान रखा जाता है.”

स्मिता ने कहा कि समय के साथ इंडस्ट्री में काफी बदलाव आया है और सुविधाएं बेहतर हुई हैं. “धीरे-धीरे चीजें बदलीं और सुविधाएं आने लगीं. लेकिन वो संघर्ष भरे दिन भी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं. उन्हीं अनुभवों ने हमें मजबूत बनाया और बहुत कुछ सिखाया.”

