रियो ओलिंपिक- दिलों की विजेता रहीं… वेलडन दीपा!!

रियो ओलिंपिक

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दिलों की विजेता रहीं…
वेलडन दीपा!!

 

खेल में हार-जीत तो होती रहती है, पर अपने मेहनत-लगन, जज़्बे व जुनून से दीपा ने कामयाबी की एक नई इबारत लिख दी है. कह सकते हैं कि मेडल न जीतकर भी उन्होंने भारतीयों के प्रशंसाभरे सैकड़ों मेडल्स जीत लिए.

दीपा ने हमें जोड़ने का काम किया. 14 अगस्त, 2016 की शाम जैसे पूरा भारत टीवी पर एकजुट हो गया था, दीपा के परफॉर्मेंस देखने के लिए. इस खेल को लेकर बरसों बाद देशवासियों में ऐसा उत्साह दिखा.
जिम्नास्टिक्स के फाइनल में भले ही वे चौथे स्थान पर रहीं, पर भारतीय दिलों ने उन्हें शिखर पर रखा.
वे मात्र 0.15 से ब्रॉन्ज़ मेडल से चूकीं, पर उन्होंने अपना 100% दिया, जो काबिल-ए-तारीफ़ है.
अपने पहले ओलिंपिक में ही वॉल्ट इवेंट के फाइनल में पहुंचना और फिर आठ दिग्गजों के बीच चौथे स्थान पर रहना एक बड़ी उपलब्धि है.
जिम्नास्टिक जैसे जोख़िमभरे, कड़ी मेहनत वाले खेल को चुनना और उस पर ख़ासतौर प्रोडुनोवा को चुनकर दीपा ने दुनियाभर के महिला जिम्नास्टिक्स के लिए मिसाल कायम की है.
दीपा के बेहतरीन प्रयास और खेल की हर किसी ने सराहना की, फिर चाहे वो सेलिब्रिटीज़ हो या फिर आम देशवासी.
साल 2020 में टोक्यो (जापान) में होनेवाले ओलिंपिक के लिए मेडल लेकर ही रहेंगी, ऐसा वादा दीपा ने ख़ुद से किया है.

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दीपा- अनटोल्ड स्टोरी

दीपा के बचपन से फ्लैट पैर थे और जिम्नास्टिक एक्सपर्ट के अनुसार ये जिम्नास्टिक जैसे खेल के लिए सबसे बड़ी रुकावट है. इससे जंप के बाद ज़मीन पर लैंड करते समय बैलेंस बनाने में परेशानी आती है.
दीपा छह साल की उम्र से कोच बिश्‍वेशर नंदी से जिम्नास्टिक की ट्रेनिंग ले रही हैं.
दीपा ने जब पहली बार किसी जिम्नास्टिक कॉम्पटिशन में हिस्सा लिया था, तब उनके पास कॉस्टयूम व शू तक नहीं थे. उन्होंने किसी से उधार लेकर परफॉर्म किया.
उनके पिता दुलाल करमाकर, जो साई (स्पोर्ट्स में वेट लिफ्टिंग कोच है, का सपना बेटी को जिम्नास्ट खिलाड़ी बनाना ही था.
उनकी मां गीता करमाकर व बहन पूजा साहा का प्रोत्साहन भी हमेशा उनके साथ रहा.
दीपा की पंसदीदा खिलाड़ी सिमोन बिल्स हैं, पर प्रेरणास्त्रोत आशीष कुमार रहे, जिन्होंने साल 2010 के कॉमनवेल्थ गेम में मेडल जीता था.
दीपा को अपने प्रैक्ट्सि व स्टडी के अलावा अन्य किसी भी चीज़ का शौक़ नहीं है.
लेकिन बकौल दीपा के उन्हें अपने ग़ुस्से को कंट्रोल करने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है.
वैसे दीपा ने रियो ओलिंपिक के वॉल्ट्स फाइनल टेस्टिंग कॉम्पटिशन में गोल्ड जीता था.
महिलाओं की कलात्मक जिम्नास्टिक में दबदबा रखनेवाली त्रिपुरा की दीपा गोल्डन गर्ल, गुड्डू के नाम से मशहूर हैं.
दीपा ने अब तक अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय विभिन्न प्रतियोगिता में 67 गोल्ड मेडल के साथ कुल 77 मेडल्स जीते हैं.
उनकी इंटरनेशनल करियर की शुरुआत साल 2014 के कॉमनवेल्थ से हुई, जिसमें उन्होंने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.
मेडल न जीत पाने पर दीपा ने 1.3 अरब भारतीय देशवासियों से माफ़ी भी मांगी. लेकिन देश को उनकी अब तक की उपलब्धियों पर गर्व है. हम सभी उनकी मेहनत-लगन, संघर्ष व जज़्बे को सलाम करते हैं.

– ऊषा गुप्ता