सेलिब्रिटीज़ की नज़र में आज़ादी के मायने… (What Freedom Means To Our Celebrities?)

सेलिब्रिटीज़ की नज़र में आज़ादी के मायने

आज़ादी भला किसे नहीं पसंद, लेकिन इसके मायने सभी के लिए अलग-अलग रहे हैं. देश की आज़ादी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अपनी मर्ज़ी से जीने का फ्रीडम… इस मामले में फिल्म स्टार्स भी समय-समय पर अपनी राय रखते रहे हैं. जानें आज़ादी के बारे में क्या कहते हैं सितारे.

अमिताभ बच्चन
आज हम सभी एक निःशुल्क पर्यावरण की हवा में सांसें ले रहे हैं. यह स्वतंत्रता के कारण ही संभव है. चूंकि हम आज़ाद हैं, इसलिए सब कुछ करने का आनंद ले सकते हैं.

शाहरुख ख़ान
सभी देशवासियों के लिए 15 अगस्त बेहद ख़ास होता है. मुझे आज भी याद है, इस दिन मैं पिताजी की गोद में बैठकर दिल्ली के कार्यक्रम व परेड का आनंद लिया करता था. मेरे पिताजी स्वतंत्रता सेनानी थे. मेरी मां ने मुझे सदा ही देशप्रेम की सीख दी. मैं अपने तीनों बच्चों को भी वही सिखाता हूं. हम देशभक्त हैं और राष्ट्रप्रेम मेरे रग-रग में बसा है. देशप्रेम के मायने क़ानून का सम्मान करना और एक ज़िम्मेदार नागरिक बनना भी है.

अनिल कपूर
मैं सारी दुनिया घूमा, पर मेरे देश जैसा दूसरा कोई देश नहीं. मुझे अपने देश पर गर्व है. मैं बहुत सौभाग्यशाली हूं, जो मैं भारत में पैदा हुआ हूं. जहां देशभक्ति, भावनाओं और आपसी भाईचारे का ख़ूबसूरत संगम देखने को मिलता है.

कैटरीना कैफ़
भारत सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है. हर व्यक्ति को फ्रीडम एंजॉय करना चाहिए. लेकिन साथ ही इस बात का भी ख़्याल रखना चाहिए कि जिनके संघर्ष, कोशिशों से यह आज़ादी मिली है, उनका हम सम्मान करें. मुझे भारत बहुत प्यारा लगता है, क्योंकि यहां भाषा, रहन-सहन में बहुत-सी विविधता होने के बावजूद सभी एक हैं. आई लव इंडिया!

जॉन अब्राह्म
मुझे अपने देश से बेहद प्यार है और मैं फख़्र के साथ कह सकता हूं कि मैं देशभक्त हूं. मैंने अपनी आलमारी में तिरंगा लगा रखा है, जिसे रोज़ देखता हूं और गर्व महसूस करता हूं. अक्सर हम कहते हैं कि देश ने हमारे लिए क्या किया… यह होना चाहिए… ऐसा करना चाहिए… आदि. जबकि मैं अब्राह्म लिंकन के इस विचार का समर्थक हूं कि आप यह न देखें कि देश ने आपके लिए क्या किया, बल्कि ये सोचें कि आप देश के लिए क्या कर सकते हैं. हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि हमें भी देश के लिए बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.

दीया मिर्ज़ा
हमें स्वतंत्रता के साथ-साथ अपनी ज़िम्मेदारियों को भी समझना होगा. यदि आप अपने मूल अधिकारों और कर्त्तव्य को अच्छी तरह से जानते-समझते हैं, देश के ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में उन सब का पालन करते हैं, तभी सही मायने में आप आज़ादी का लुत्फ़ उठा सकते हैं.

मनोज बाजपेयी
मेरे लिए आज़ादी के यही मायने हैं कि मैं कहीं भी आ-जा सकता हूं. स्वतंत्र रूप से अपने विचार रख सकता हूं. अपनी पसंद का काम कर सकता हूं. लेकिन आज़ादी के साथ ही विविध लोगों व परिवेश के साथ तालमेल बैठाना, अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी को समझना भी ज़रूरी है.

नाना पाटेकर
हमने तो कुछ भी नहीं किया. जो भी किया, हमारे पूर्वजों ने किया और हमें आज़ादी दिलाई. अब यह हमारा फ़र्ज़ है कि हम उसे सहेजें और आगे बढ़ें. यह हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम अपने आसपास क्या हो रहा है, उसे देखें, समझें और अपनी राय रखें और कुछ काम करें. फिर चाहे वो आतंकवाद हो या किसानों द्वारा आत्महत्या करना. इन मुद्दों के बारे में हम कितना जानते हैं और क्या कर सकते हैं, वो सब हमें सोचना और करना चाहिए.

 

रिचा चड्ढा
भारतीय लड़कियों के लिए आज़ादी से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बात तो यही हो सकती है कि उन्हें जन्म लेने की आज़ादी मिले यानी उसे दुनिया में आने की पूरी आज़ादी हो. लड़का-लड़की का भेदभाव न हो. इसके बाद उसके लिए उचित शिक्षा, करियर, सही जीवनसाथी को चुनने का अधिकार आदि की स्वतंत्रता सिलसिलेवार आती है. यूं तो हम विकास की दिशा में ख़ूब आगे बढ़ रहे हैं, पर महिलाओं के मौलिक अधिकार की आज़ादी के साथ भी पूरा-पूरा न्याय होना चाहिए.

सैफ अली ख़ान
हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दुनिया में हर देश आज़ाद नहीं है, इसलिए हमें अपनी स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए. मैं हमेशा गर्व महसूस करता हूं कि मैं इतने बड़े लोकतांत्रिक देश का नागरिक हूं. हमें आज़ादी के साथ-साथ एक-दूसरे के धर्म का भी सम्मान करना चाहिए. आज हमें ख़ुद को धर्म, राज्य से ऊपर उठकर एक भारतीय के रूप में गर्वित होने व देखने की ज़रूरत भी है.

कमल हासन
कई बार लोकतंत्र को केवल बोलने की आज़ादी के मंच के तौर पर पेश किया जाता है. यह चलता रहता है, लेकिन इसके संरक्षण के लिए सतत निगरानी भी ज़रूरी है. हम बोलने की आज़ादी को हल्के से नहीं ले सकते. भारत ही नहीं, पूरी दुनिया बदलाव के दौर से गुज़र रही है. मुझे अपने देश पर फख़्र है. मैं चाहता हूं कि भारत दुनिया के सामने एक मिसाल बनकर उभरे.

सचिन तेंदुलकर
मुझे अपने देश पर नाज़ है. आज़ाद जीवन जीना हर दिल को सुकून देता है. मैं अपने बच्चों को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ जीवन जीने की स्वतंत्रता देना चाहता हूं, मेरे पिता ने भी मुझे मेरा पसंदीदा खेल खेलने की आज़ादी दी थी, जो बिना किसी उम्मीद के थी. मैं अपने बच्चों को ज़िंदगी में जो भी वो बनना चाहते हैं, उसकी पूरी आज़ादी देना चाहता हूं. मेरा काम उन्हें रास्ता दिखाना, साथ और प्रोत्साहन देना रहेगा.

 

देशभक्ति की बेहतरीन फिल्में

शहीद (1965): देशभक्ति व स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित मनोज कुमार अभिनीत इस फिल्म की कहानी शहीद भगत सिंह के साथी बटुकेश्‍वर दत्त ने लिखी थी. इसके गीत शहीद राम प्रसाद बिस्मिल के थे.
आनंदमठ: साल 1952 की यह फिल्म बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास पर आधारित थी. इसमें 18वीं शताब्दी में अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ संन्यासी क्रांतिकारियों द्वारा लड़ी गई लड़ाई दिखाई गई है. इसका वंदे मातरम्… गाना आज भी सुपरहिट है.
बॉर्डर: भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध पर आधारित यह फिल्म अपने दमदार संवाद, मधुर गीत-संगीत के कारण ज़बर्दस्त हिट रही थी.
गांधी: इसमें बेन किंग्सले अभिनीत गांधी की भूमिका को हर किसी ने सराहा था. यह साल 1982 की यादगार फिल्मों में से एक थी. मोहनदास करमचंद गांधी की जीवन की बारीक़ियों को निर्देशक रिचर्ड एटनबरो ने बख़ूबी उकेरा था.
हक़ीक़त: सन् 1964 में लद्दाख में भारत-चीन युद्ध के समय सैनिकों के संघर्ष का जीवंत चित्रण इस फिल्म में किया गया था. इसके गीत सुनकर आज भी देशभक्ति का जज़्बा जाग जाता है.
इसके अलावा उपकार, द लीजेंड ऑफ भगत सिंह, लक्ष्य, मंगल पांडे- द राइज़िंग, चिट्टागोंग भी उल्लेखनीय फिल्मों में से थीं.

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देशप्रेम से जुड़े लाजवाब संवाद

* हमारा हिंदुस्तान ज़िंदाबाद था, ज़िंदाबाद है और ज़िंदाबाद रहेगा… (गदर- एक प्रेम कथा)

* आप नमक का हक़ अदा कीजिए… मैं मिट्टी का हक़ अदा करता हूं… (द लीजेंड ऑफ भगत सिंह)

* मेरे देश के लिए मेरा जज़्बा मेरी वर्दी में नहीं… मेरे रगों में दौड़ रहा है… (पुकार)

* रिलिजनवाले कॉलम में इंडियन लिखता हूं… (रुस्तम)

* अब भी जिसका ख़ून न खौला, वो ख़ून नहीं पानी है.. जो देश के काम ना आए, वो बेकार जवानी है… (रंग दे बसंती)

* अपने यहां की मिट्टी की ख़ुशबू है ना… वो तो अजनबी लोगों की सांसों में भी संस्कार भर देती है… (पूरब और पश्‍चिम)

* मुझे स्टेट्स के नाम न सुनाई देते हैं, न दिखाई देते हैं.. स़िर्फ एक मुल्क का नाम सुनाई देता है… इंडिया. (चक दे इंडिया)

– ऊषा गुप्ता
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