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रिश्तों में बढ़ रहा है ‘स्लीप डिवोर्स’ का ट्रेंड (Why Is Sleep Divorce Trend Increasing Among Couples?)

खर्राटे लेना, स्ट्रेस, हेल्थ ठीक न होना, पार्टनर के साथ झगड़ा आदि ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से एक पार्टनर जागता है और फिर वो पार्टनर अपना बेड और बेडरूम दोनों अलग कर लेता है. आप ही बताएं क्या ये 'स्लीप डिवोर्स' अच्छे रिलेशनशिप के लिए सही है?

क्या है स्लीप डिवोर्स?

पार्टनर का खर्राटे लेना, नींद न आना, एक पार्टनर की नाइट शिफ्ट, देर रात तक फोन में लगे रहने की आदत और हेल्थ इश्यूज- ऐसे बहुत-से कारण हैं जिनकी वजह से कपल्स अपनी ज़रूरतों और कंफर्ट के हिसाब से अलग-अलग सोना पसंद करते हैं. क्योंकि एक पार्टनर की आदत से दूसरे पार्टनर की नींद में खलल पैदा होता है और  दोनों के बीच में लड़ाई की नौबत तक आ जाती है. कपल्स झगड़े से बचने के लिए रात में अलग-अलग बिस्तर या अलग-अलग कमरों में सोते हैं. इस स्थिति को 'स्लीप डिवोर्स' कहते हैं.

भारत में ही नहीं, विदेशों में भी है 'स्लीप डिवोर्स' का चलन

चौंकाने वाली बात यह है कि आज के समय में 'स्लीप डिवोर्स' से पीड़ित कपल्स की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. इस विषय पर कई अध्ययन भी हो चुके हैं, जिनका निष्कर्ष ये है-

- यूरोप के कुछ देशों में 'स्लीप डिवोर्स' का ट्रेंड काफी बढ़ रहा है.

- स्वीडन और नॉर्वे के कपल्स अच्छी और सुकून भरी नींद लेने के लिए इस ट्रेंड को इसे अपना रहे हैं.

photo source: freepik.com

मेट्रो सिटी में बढ़ रहा है 'स्लीप डिवोर्स' का ट्रेंड

मल्टीनेशनल कंपनियों में देर रात तक काम करने के कारण वर्किंग कपल्स के लिए पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस करना आसान नहीं रह गया है, जिसके कारण छोटी-छोटी बातों में लड़ाई होना और एक दूसरे के साथ समय न बिताने से रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं. इन स्थितियों में कपल्स के लिए स्लीप डिवोर्स बेस्ट ऑप्शन निकलकर सामने आ रहा है.

स्लीप डिवोर्स के फ़ायदे

  1. नींद के दौरान आने वाली बाधाओं का कम होना: कुछ कपल्स इसलिए अलग-अलग कमरों या बिस्तर पर सोते हैं, ताकि अच्छी नींद ले सकें. नींद के दौरान किसी तरह की कोई बाधा न आए. कई बार जब पार्टनर एक ही बिस्तर पर सोते हैं तो सोने के अलग-अलग समय, खर्राटे, पोजीशन बदलने, पैरों की हरकत, प्रेग्नेंसी या मौसमी एलर्जी के कारण बार-बार जागना पड़ता है, जिससे दूसरे पार्टनर की नींद में खलल पड़ता है.
  • क्वालिटी नींद लेना : पार्टनर्स अच्छी और पर्याप्त नींद ले सकें, इसलिए भी स्लीप डिवोर्स लेते हैं. एक अध्ययन के अनुसार- 53% लोग ऐसे हैं जो एक ही बेड पर सोते हुए पार्टनर के कारण होने वाली परेशानियों से बचने के लिए उन्होंने स्लीप डिवोर्स ट्राई किया है. पूछने पर पता चला कि अकेले सोने पर उन्होंने अच्छी और क्वालिटी नींद ली.
  • सोनेके समय में वृद्धि: जो लोग पार्टनर से अलग बेड या कमरे में सोते हैं. वे हर रात औसतन 37 मिनट ज़्यादा सोते हैं.
  • सुरक्षा: यदि कोई व्यक्ति रेम स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर (नींद संबंधी बीमारी) से ग्रस्त है, तो वह नींद के दौरान आने वाले अपने सपनों को शारीरिक रूप से क्रियान्वित करता है. जैसे- सपने में चिल्लाना, मुक्का मारना, लात मारना व हिंसक हरकतें आदि. ये गंभीर चोट का कारण बन सकती हैं. सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे मामलों में पार्टनर का अलग-अलग सोना ज़रूरी है.

स्लीप डिवोर्स के नुक़सान

1. स्लीप डिवोर्स यानी पार्टनर्स के अलग-अलग कमरे में सोने का सबसे बड़ा नुक़सान यह है कि सोने के लिए एक के बजाय दो कमरों की आवश्यकता होती है. हाई क्लास लोगों के पास एक्स्ट्रा बेडरूम की व्यवस्था हो सकती है, पर ज़रूरी नहीं कि हर आम कपल के घर में एक एक्स्ट्रा बेडरूम और बेड की व्यवस्था हो.

2. बहुत-से पार्टनर्स ऐसे भी होते हैं, जो स्लीप डिवोर्स की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद फिर से वापस अपने पार्टनर के साथ एक ही बेड पर सोने लगते हैं. क्योंकि उन्हें एक-दूसरे की कमी खलने लगती है. अकेलापन महसूस होता है. इसका असर उनकी सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है.

3. स्लीप डिवोर्स की स्थिति में कुछ पार्टनर में अकेले सोने पर असुरक्षा की भावना पनपने लगती है. हल्की नींद आती है. नींद में वे अलर्ट मोड पर रहते हैं. अच्छी नींद की बजाय वे अनिद्रा से ग्रस्त रहते हैं.

कब लें पार्टनर से स्लीप डिवोर्स?

अगर एक पार्टनर के साथ सोने से दूसरे पार्टनर की नींद में काफ़ी बाधा या परेशानियां आ रही हो तो इसका मतलब है कि स्लीप डिवोर्स लेने का समय आ गया है. रोज़ाना अच्छी नींद न लेने से कई तरह के जोखिम बढ़ जाते हैं. जैसे-

- थकान महसूस होना

- सिरदर्द होना

- काम में मन न लगना

- एकग्रता में कमी

- काम में ग़लतियां होने की संभावना बढ़ना

- कार दुर्घटना होने की संभावना  

- हृदय संबंधी समस्याओं के होने की संभावना

- इम्युनिटी कमज़ोर होना

- स्लो मेटाबॉलिज़्म

स्लीप डिवोर्स लेने से पहले इन विकल्पों पर डालें एक नज़र

  1. स्लीप एपनिया की जांच कराएं- अगर पार्टनर के बीच स्लीप डिवोर्स का कारण खर्राटे है, तो स्लीप एपनिया की जांच कराएं. आमतौर पर खर्राटे इस विकार का एक लक्षण है. स्लीप एपनिया के अन्य लक्षण है- नींद के दौरान हांफना या सांस रुकना, दिन में थकान महसूस होना, रात में पेशाब करने के लिए उठना, चिड़चिड़ापन, गाड़ी चलाते या टीवी देखते समय सो जाने की प्रवृत्ति आदि.
  • नींद का शेड्यूल बदलें- पार्टनर्स का स्लीप डिवोर्स लेने का एक कारण अलग-अलग समय पर सोना है, तो अपनी नींद का शेड्यूल बदलें. उदाहरण के लिए- अगर एक पार्टनर देर तक जागना पसंद करता है, तो दूसरा पार्टनर देर रात तक जगाने की बजाय ख़ुद जल्दी सोने की आदत डालें.
  • समस्या का समाधान ढूंढें- जिन कारणों से परेशान होकर पार्टनर दूसरे कमरे में सोने जा रहे हों, उन्हें दूर करने का प्रयास करें. एक अध्ययन के अनुसार- 18% लोग सोते समय आंखों पर पड़ने वाली लाइट से बचने के लिए आंखों पर मास्क (आई कैपर) लगाते हैं. 15% लोग अपने पार्टनर के खर्राटों से बचने के लिए इयरप्लग का इस्तेमाल करते हैं.
  • स्कैंडिनेवियाई शैली में सोएं- स्कैंडिनेवियाई शैली में सोने का मतलब है पार्टनर्स एक ही बेड पर एक साथ सोएं. लेकिन एक ही बेडशीट शेयर न करें. इस ऑप्शन में पार्टनर रूम टेम्प्रेचर के अनुसार अपनी बेडशीट/रज़ाई का इस्तेमाल कर सकता है. उसे एक ही बेड पर खुलकर सोने की आज़ादी होती है और बगल में सोए पार्टनर को कोई परेशानी भी नहीं होती है.

क्या कहती है रिसर्च?

अमेरिका में स्लीप डिवोर्स का कांसेप्ट सबसे पहले आया था. लेकिन अब दुनिया भर में ये कांसेप्ट ट्रेंड हो रहा है. साल 2024 में 'अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन' पर हुए अध्ययन से ये पता चलता है कि 29% अमेरिकी पार्टनर्स रात को अपने पार्टनर के साथ नहीं, बल्कि दूसरे कमरे में सोना पसंद करते हैं, जबकि 2023 में ये आंकड़ा सिर्फ़ 20 फीसदी था.

क्या कपल्स के बीच दूरियां बढ़ाता है स्लीप डिवोर्स?

- जब कपल्स एक साथ एक ही बेडरूम में सोते हैं, तो उनके बीच प्यार-मुनहार, नोंक-झोंक और लड़ाई का दौर चलता रहता है. इन सबके बीच कपल्स को एक-दूसरे को समझने का मौका मिलता है, जिससे दांपत्य जीवन की डोर मज़बूत होती है. जबकि स्लीप डिवोर्स में इन सब चीज़ों के लिए कोई जगह नहीं होती. परिणामस्वरूप पार्टनर्स के बीच लगाव कम होने लगता है.

- जो पार्टनर्स स्लीप डिवोर्स लेते है यानी किसी भी वजह से अलग-अलग कमरे में सोते हैं. उनके बीच धीरे-धीरे इमोशनल बॉन्डिंग और रोमांस कम होने लगता है. दाम्पत्य जीवन पर इसका सीधा असर होता है.

- दिनभर दौड़ते-भागते घर और ऑफिस का काम निबटाते-निबटाते रात का वक्त ही ऐसा होता है, जब पार्टनर्स एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताते हैं. लेकिन स्लीप डिवोर्स की स्थिति में जब पार्टनर्स अलग-अलग कमरे में सोने का निर्णय लेते हैं. तो वे इमोशनली तौर पर एक-दूसरे से डिटैच होने लगते हैं और उनके बीच मनमुटाव होने लगता है.

- पूनम नागेंद्र शर्मा

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