प्यार का रिश्ता हो, चाहत का रिश्ता हो या फिर शादी का रिश्ता, हर रिश्ते के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी और जवाबदेही बनती है, लेकिन हम अपने रिश्ते को कुछ समय बाद ही कैजुअली लेने लगते हैं और अपनी ज़िम्मेदारियां भूलने लगते हैं. क्या आप भी ऐसा ही करते हैं? आइए जानें कि अपने रिश्ते के प्रति आप कितने ज़िम्मेदार हैं.
- शादी के बाद अक्सर पार्टनर्स को लगता है कि जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी है, वही उनकी ज़िम्मेदारी भी है, जैसे- पति को लगता है कि वो कमाकर लाता है, तो अपनी ज़िम्मेदारी निभाता है, वहीं पत्नी को भी लगता है कि घर का कामकाज करके और खाना बनाकर वो अपनी ज़िम्मेदारी निभा रही है. लेकिन ये तो स़िर्फ डेली ड्यूटीज़ हैं, ज़िम्मेदारियां इससे कहीं अधिक हैं.
- सबसे पहले तो यह समझना ज़रूरी है कि आप अपने रिश्ते और पार्टनर के प्रति कितने संवेदनशील हैं. अगर वो उदास है या किसी बात से परेशान है, तो क्या आप समझ पाते हैं और उसे पास बैठाकर पूछते हैं कि क्या बात उसे परेशान कर रही है?
- आप अपने रिश्ते को कितना वक़्त देते हैं? अक्सर एक वक़्त के बाद हमारे पास वक़्त ही नहीं होता या हम इस तरफ़ ध्यान ही नहीं देते या यूं कहें कि इसे ज़रूरी ही नहीं समझते, जबकि साथ में क्वालिटी टाइम स्पेंड करने से रिश्ता हमेशा ऊर्जावान और ताज़ा बना रहता है.
- क्या आप भी उन लोगों में से हैं, जो अपनी पत्नी की किसी डिमांड को नज़रअंदाज़ करके यह कहते हैं कि तुम्हारा क्या है, तुम तो बस सारा दिन घर पर पड़ी रहती हो, तुम्हें क्या पता पैसे कमाने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है. कई पत्नियां भी अपने पति की मनपसंद डिश की डिमांड करने पर कह देती हैं कि एक तो सारा दिन घर के काम करो, ऊपर से इनके नखरे सहो. ऐसा कभी न कहें, अपने पार्टनर के प्रति सम्माजनक रवैया अपनाएं और उनकी डिमांड को भी तवज्जो दें और जितना हो सके, छोटी-मोटी डिमांड पूरा करने की कोशिश करें.
यह भी पढ़ें: हेल्दी रिश्ते के लिए अपनाएं ये हेल्दी हैबिट्स (Healthy Habits For Healthy Relationship)
- कम्यूनिकेट करें. संवाद हर रिश्ते की जान होता है और इसे ही हम नज़रअंदाज़ करते हैं. याद करें कि कब आख़िरी बार आप दोनों एक साथ बैठे थे और खूब सारी बातें की थीं. कब आख़िरी बार हाथों में डाले साथ चले थे? कब आख़िरी बार एक साथ बारिश में भीगे थे? आपको लगेगा ये सब ज़िम्मेदारियों में कैसे आता है? लेकिन अपने रिश्ते में रोमांस और ऊर्जा बनाए रखने की ज़िम्मेदारी आप दोनों की ही तो है.

- क्या आप अपने पार्टनर के लिए एडजस्टमेंट करते हैं? क्या आप कभी-कभार उनके गुस्से या कड़वी बातों को सहन या नज़रअंदाज़ करते हैं? क्या आप उनके काम और ज़िम्मेदारियों में सहयोगात्मक रवैया रखते हैं? अगर नहीं, तो बस आज से ही करना शुरू कर दें और फिर देखें फ़र्क़. रिश्ते का दूसरा नाम ही एडजस्ट करना है, वरना अपने ही मन की करनी है, तो रिश्ते में बंधें ही नहीं.
- अपने रिश्ते और पार्टनर के प्रति ईमानदार रहें और भरोसे की नींव पर अपने रिश्ते को मजबूत बनाएं.
- रिश्ते में जवाबदेही भी होती है. अगर आपसे ग़लती हो जाती है, तो आप आगे से उसे स्वीकारें, ख़ुद को हमेशा सही साबित करने की कोशिश न करें और कभी-कभार ग़लती न होने पर भी माफ़ी मांगने में हर्ज़ नहीं.
- अपने रिश्ते में रोमांस हमेशा बरकरार रखने की कोशिश करें. वीकेंड पर किसी होटल में वक़्त बिताएं या कुछ और प्लान करें और इसी तरह अपनी सेक्स लाइफ को भी रिवाइव करते रहें. अपने रिश्ते में स्पाइस ऐड करते रहें, ताकि वो बोरिंग न होने पाए.
- बहुत ज़्यादा रोका-टोकी न करें. आपका पार्टनर आपका हमसफ़र है कोई बच्चा नहीं कि आप हर बात उसे सिखाएं. उसे कभी-कभार अपनी मनमानी भी करने दें. पति को दोस्तों के साथ पार्टी करनी है तो जाने दें, पत्नी ने सहेलियों के साथ ट्रिप प्लान किया है, तो कुछ वक़्त उसे अपने लिए जीने दें.
- बच्चों की परवरिश और ज़िम्मेदारी दोनों की होती है, इसलिए उसे बांटें, क्योंकि अक्सर बच्चों के कम मार्क्स आने पर या उनकी शिकायत आने पर पत्नी को ही ज़िम्मेदार ठहराया जाता है और स़िर्फ पति ही नहीं, बाक़ी घरवाले भी यही कहते हैं कि वो तो सारा दिन बाहर रहता है, तुमको बच्चों पर ध्यान देना चाहिए.

- बुरे वक़्त में पार्टनर का साथ दें न कि ताने. ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और ऐसे समय में रिश्ते कमज़ोर नहीं पड़ने चाहिए. कभी पति की नौकरी चली गई या कभी पत्नी बीमार पड़ जाए, तो ऐसे समय में परेशान या गुस्सा करने की बजाय समझदारी से काम लें और पार्टनर को समझाएं कि परेशान होने की ज़रूरत नहीं. हम एक साथ मिलकर इस बुरे वक़्त को भी अच्छे वक़्त में बदल देंगे.
- एक-दूसरे को मोटिवेट करें, अच्छी बातों को एप्रिशिएट करें, कॉम्प्लिमेंट देने का मौका न छोड़ें, ताने देने से जितना संभव हो बचें.
- ऐसा नहीं है कि रिश्तों में विवाद होंगे हो नहीं, लेकिन आप उसे कैसे टैकल करते हैं, सब कुछ इसी पर निर्भर करता है. कल की लड़ाई को अगले दिन तक ड्रैग न करें, सॉरी बोलकर जल्द ही विवाद निपटा दें.
- गीता शर्मा

