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खाना बनाना केवल काम नहीं, एक थेरेपी भी है (Cooking is not just a chore; it is also a form of therapy)

बहुत कम लोग जानते होंगे कि कुकिंग कोई सामान्य काम नहीं, बल्कि एक तरह की थेरेपी भी है.

खाना ख़ुशी ख़ुशी बनाकर परिवार को खिलाने की इच्छा अधिकांश गृहिणियों में होती है. वे अपनी क्षमता के अनुसार स्वादिष्ट भोजन बनाने और परिवार के हर सदस्य की पसंद का ध्यान रखने को अपना धर्म भी मानती हैं. लेकिन आधुनिक, उच्च डिग्री प्राप्त करने वाली कामकाजी युवतियों में खाना पकाने का शौक बहुत कम देखने को मिलता है. उनकी मानसिकता के अनुसार कुकिंग समय की बर्बादी है और खाना बनाने के लिए किसी महिला या महाराज को रखना अधिक सुविधाजनक लगता है.

कुकिंग थेरेपी यानी खाना बनाने की प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति अपना पूरा ध्यान, धैर्य और आनंद उस काम में लगाता है. सब्ज़ियां काटने से लेकर धीमी आंच पर खाना पकाने और तैयार व्यंजनों को परोसने तक व्यक्ति लगातार व्यस्त रहता है. यह व्यस्तता तनाव कम करने में मदद करती है.

खाना बनाते समय हमारे मस्तिष्क के कई हिस्से सक्रिय हो जाते हैं. हाथ लगातार काम करते हैं और भोजन की ख़ुशबू, स्वाद, रंग तथा पकने की आवाज़ के कारण हमारी पांचों इंद्रियां एक साथ सक्रिय रहती हैं. यह पूरी प्रक्रिया मन को नकारात्मक विचारों से दूर ले जाकर वर्तमान क्षण में व्यस्त कर देती है. यही कारण है कि बहुत से लोग खाना बनाने को एक आनंददायक गतिविधि मानते हैं.

कुकिंग थेरेपी के फायदे

परिवार से जुड़ाव

परिवार के साथ मिलकर खाना बनाना और फिर साथ बैठकर भोजन करने का आनंद ही अलग होता है. इतना ही नहीं, मिल-जुलकर यह काम करने से परिवार के सदस्यों के बीच संबंध और अधिक मज़बूत होते हैं.

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गुणवत्ता

घर का बना भोजन गुणवत्तापूर्ण होता है, इसमें कोई संदेह नहीं. भोजन बनाते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है. साथ ही भोजन पौष्टिक हो, इस बात पर भी अधिक ध्यान दिया जाता है.

तनाव में कमी

खाना बनाने के दौरान व्यक्ति लगातार किसी न किसी काम में व्यस्त रहता है. इस वजह से वह कुछ समय के लिए अपनी चिंताओं और तनाव से जुड़े विचारों से दूर हो जाता है.

आत्मविश्वास में वृद्धि

जब मेहनत और लगन से बनाया गया खाना परिवार के सदस्य बड़े चाव से खाते हैं तो खाना बनाने वाले व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है. अपने हाथों से बनाए भोजन की प्रशंसा मिलने से उसे संतुष्टि और ख़ुशी भी मिलती है.

क्रिएटिविटी बढ़ना

परिवार के सदस्यों को नई-नई और स्वादिष्ट चीज़ें खिलाने की इच्छा व्यक्ति को आधुनिक व्यंजन सीखने और उन्हें नए तरीक़े से बनाने के लिए प्रेरित करती है. इससे उसकी रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है.

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मस्तिष्क को शांत रखता है

विशेषज्ञों का कहना है कि खाना बनाने में एकाग्रता बहुत महत्वपूर्ण होती है. इसलिए खाना बनाते समय व्यक्ति का पूरा ध्यान उस काम पर केंद्रित हो जाता है और वह अपनी चिंताओं तथा तनाव से दूर हो जाता है. इससे मस्तिष्क को शांति मिलती है.

इसलिए नई पीढ़ी को खाना बनाने को समय की बर्बादी नहीं समझना चाहिए. रसोई का काम केवल परिवार का पेट भरने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और पारिवारिक जुड़ाव का भी ज़रिया बन सकता है. इसलिए नई पीढ़ी को खाना बनाने की कला को महत्व देना चाहिए और इसे जीवन की उपयोगी कला के रूप में अपनाना चाहिए.

– वीरेंद्र बहादुर सिंह 

Photo Courtesy: freepik

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