हमारा वॉलेट अक्सर रोज़मर्रा की ज़रूरतों की चीज़ें संभालकर रखता है. लेकिन इन सेलेब्स के लिए इसमें कुछ और है जो ख़ास है- नितांत निजी संपत्ति. चाहे वो धुंधली होती कोई तस्वीर हो, लिखी गई कोई पर्ची, लकी चार्म हो या कोई प्यारी सी यादगार चीज़.
सोनी सब के टीवी कलाकारों ने ऐसी कुछ चीज़ों को अपने वॉलेट में संजोकर रखें हैं, जो भावनात्मक रूप से उनके दिल के बेहद क़रीब है. हमें हर दिन उन लोगों, पलों और मूल्यों की याद दिलाती हैं, जो हमारी ज़िंदगी में बेहद मायने रखते हैं. ऐसे ही दिल छू लेने वाले निजी बातों को लेकर हमसे रू-ब-रू हो रहे हैं एक्टर्स गौरव चोपड़ा, रजत वर्मा, श्रेय मराड़िया. उन्होंने बताया कि वे अपने वॉलेट में कौन सा भावनात्मक सामान संभालकर रखते हैं. प्यार के तोहफ़ों और हाथ से लिखी दुआओं से लेकर ऐसे छोटे-छोटे ख़ज़ाने तक, जो उन्हें लंबे वर्कडे में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं. हर कहानी एक गहरा निजी रिश्ता और उन भावनाओं की झलक दिखाती है, जो दर्शकों के पसंदीदा इन क़िरदारों के पीछे छिपी हैं.

‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ टीवी शो में प्रोफेसर राजवीर शास्त्री का क़िरदार निभाने वाले गौरव चोपड़ा कहते हैं, “मैं अपने वॉलेट में कुछ पंक्तियां रखता हूं, जो मेरे पिताजी ने ख़ुद लिखी हुई हैं. जब भी मैं किसी चुनौती या किसी बड़े फ़ैसले के सामने खड़ा होता हूं, ये पंक्तियां मुझे साफ़ सोचने की ताक़त और हिम्मत देती हैं. ये मेरे लिए उनके प्यार, उनकी समझदारी और उनसे जुड़ी यादों को अपने साथ हर वक़्त लेकर चलने का एक तरीका है.”

‘इत्ती सी ख़ुशी’ सीरियल में विराट वर्मा की भूमिका निभा रहे रजत वर्मा बताते हैं, “मेरे वॉलेट में हमेशा मेरी मां की एक छोटी सी तस्वीर रहती है. बचपन से लेकर अब तक, जब मैं अपने सपनों के पीछे भाग रहा था, वो मेरी सबसे बड़ी सपोर्टर रही हैं. वो तस्वीर मुझे हर दिन ये याद दिलाती है कि जब मैं ख़ुद पर शक करता था, तब भी उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था. मेरे दोस्त मुझे अक्सर ‘ममाज़ बॉय’ कहते हैं, और मैं ये टैग बड़े गर्व से स्वीकार करता हूं. मेरे लिए ये सिर्फ़ एक तस्वीर नहीं है, बल्कि बेशर्त प्यार और अपने सपनों का पीछा करने की हिम्मत की याद दिलाने वाली निशानी है.”

‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ धारावाहिक में ऋषभ का क़िरदार निभा रहे श्रेय मराड़िया बताते हैं, “मैं अपने वॉलेट में एक पुरानी, बेरंग हो चुकी बस की टिकट रखता हूं, जो मैंने सालों पहले पापा के साथ की गई एक यात्रा के दौरान संभालकर रखी थी. वो बहुत साधारण सी चीज़ है, लेकिन जैसे ही उसे देखता हूं, उस लंबी बातचीत की याद आ जाती है, जो हमने बस में बैठकर की थीं. बस हम दोनों और खिड़की के बाहर भागती दुनिया. जब भी वो टिकट नज़र आती है, मुझे याद दिलाती है कि मैं कहां से आया हूं और पापा ने मुझे क्या मूल्य सिखाए. ये मेरे सफ़र का एक छोटा सा हिस्सा है, जो मुझे ज़मीन से जोड़े रखता है, चाहे मैं कितनी भी दूर क्यों न चला जाऊं.”

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