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जयदीप अहलावत- मेरे लिए खोने को कुछ नहीं था… (Jaideep Ahlawat- Mere liye khone ko kuch nahi tha…)

- ‘फैमिली मैन 3’, ‘पाताल लोक’ जैसी वेब सीरीज़ में निगेटिव शेड्स में लोगों ने मेरी एक्टिंग को पसंद किया. अब तो यह आलम है कि इस तरह की भूमिका बड़े आराम से कर लेता हूं. दरअसल, मेरे लिए खोने को कुछ नहीं था. हर भूमिका मेरे लिए एक नई चुनौती रही.

- मेरे ख़्याल से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कलाकार के लिए खलनायक शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. यह पैमाना विदेशों में नहीं है. कलाकार के परफॉर्मेंस व भूमिका की गहराई की तुलना करें, न कि हीरो-विलेन को लेकर.

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- लड़कों को लेकर समाज में जो परिपाटी बनी है, उस पर नए सिरे से विचार करना होगा, ख़ासकर यह कहना कि लड़का होकर कौन रोता है भला... क्या पुरुषों को अपनी भावनाओं का इज़हार करने का हक़ नहीं, ऐसा केवल हरियाणा ही नहीं, तक़रीबन देशभर में हर जगह है, इससे लड़का-लड़की को लेकर बैलेंस गड़बड़ाता है. इस तरह की धारणाएं सोसायटी के दमनकारी विचारों को जन्म देती है. मेरा यह मानना है कि सभी को अपने इमोशंस को बयां करने का अधिकार है.

- हिंदी फिल्मों के कुछ कलाकार देवनागरी की बजाय रोमन में लिखी स्क्रिप्ट मांगते हैं, जो मुझे ठीक नहीं लगता, यह मेरी व्यक्तिगत सोच है.

- राजकुमार राव, विजय वर्मा और मैं साथ काम करते रहे, लेकिन अभिनय की गहराई सीखने, संघर्ष के उन दिनों में लापरवाही भी बहुत हुई. परंतु हमारा सभी का सपना एक ही था.

- मेरे ख़्याल से रोने से कहीं अधिक हंसाना कठिन है. यह कलाकार ही नहीं निर्देशक के लिए भी बहुत मुश्किल होता है. इस तरह के जॉनर के लिए मैं डायरेक्टर प्रियदर्शन की तारीफ़ करूंगा. उनका सेंस ऑफ ह्यूमर लाजवाब है और उन्होंने कई बेहतरीन फिल्में बनाईं. भविष्य में मैं भी कॉमेडी फिल्म करना चाहूंगा.

- धर्मेंद्र जी से ‘इक्कीस’ फिल्म की शूटिंग के दरमियान बेइंतहा प्यार मिला. शूटिंग के समय उनके साथ बिताए हंसी-मज़ाक से भरपूर लम्हे मेरे लिए यादगार यूं समझ लीजिए ज़िंदगीभर का ख़ज़ाना हैं. उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला, बकौल उनके हीरो की ड्राइविंग भी अभिनय की तरह स्मूद होनी चाहिए. मेरे पिता उनके बहुत बड़े फैन थे. धरम जी प्यारे, ख़ुशमिजाज़ और मासूम थे. उनके साथ काम करते समय सेट का माहौल ही पूरी तरह से बदल जाता था.

- मैंने जीवन में पैसे को उतना तवज्जो नहीं दिया. मेरे लिए नाम-शौहरत से बढ़कर स्वयं को बेहतर इंसान के तौर पर पहचान बनाना अधिक संतुष्टि देता है.    

- ऊषा गुप्ता 

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Photo Courtesy: Social Media

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