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फिल्म समीक्षाः सनी देओल से लेकर वरुण दिलजीत, अहान तक फौजियों की ज़िंदगी व देशभक्ति की सरहद को पार करती ‘बॉर्डर 2’ (Movie Review: Border 2)

देशभक्ति और भारत मां के प्रति श्रद्धा-आदर और प्यार का बेज़ोड़ संगम है ‘बॉर्डर 2’. जब कभी देश प्रेम से जुड़ी फिल्में बनी है उसे सभी का भरपूर प्यार मिला है. सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी स्टारर ‘बॉर्डर 2’ बनने की जब से बात हुई थी, तब से यह फिल्म सुर्ख़ियों में रही है. रिलीज पर तो गदर ही ला दिया.

एक बार फिर सनी देओल का दमखम और दबदबा पूरी फिल्म में दिखा. भारतीय फौज की हौसलाअफ़जाई हो या फिर इकलौते बेटे के प्रति लगाव या अपने देश व भारत मां को लेकर जज़्बा या फिर दुश्मनों को लेकर दहाड़... हर जगह सनी पाजी का एक्शन-इमोशंस भावविभोर कर देता है. फिल्म के टाइटल क्रेडिट में सनी देओल ‘धर्मेंद्र जी का बेटा’ एक बेटे का अपने पिता को इस कदर श्रद्धांजलि देना देख-पढ़कर आंखें नम हो गईं. सच धन्य हैं ऐसे माता-पिता और ‘अपने’ बेटे जो उन्हें इस तरह से पूजते हैं.

‘बॉर्डर’ बनने के क़रीब तीस साल बाद इसका सीक्वल ‘बॉर्डर 2’ आया और आते ही धमाकेदार ओपनिंग कर डाली. पहले दिन ही यह नए साल का ज़बर्दस्त ब्लॉक बस्टर साबित हुआ. भारतीय सेना, नेवी, एयरफोर्स तीनों के ही पराक्रम को बेमिसाल अंदाज़ में निर्देशक अनुराग सिंह ने पर्दे पर दिखाया है. अपने देश के लिए मर-मिटने वाले फौजी की दीवानगी है तो उनकी व्यक्तिगत ज़िंदगी के दर्द, संवेदनाओं और गर्व से रू-ब-रू होते हैं हम.

संवाद और गाने भी रग-रग में जोश भर देते हैं. साल 1971 की भारत-पाकिस्तान युद्ध में आधारित ‘बॉर्डर 2’ में भारत के जल-थल-वायु के बहादुर जांबाज़ों की ताक़त और वीरता को देख हमारे इन रियल हीरो को याद कर उनके प्रति श्रद्धा से सिर झुक जाता है. जब हम फिल्म देखकर इस कदर भावुक हो जाते हैं, तो ज़रा सोचिए हमारे जिन वीर जवानों ने उस समय युद्ध लड़ा होगा तब का मंजर क्या होगा!.. उन सभी को हमारा आभार व सलाम!

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भारत-पाक के इस वॉर में ज़मीनी लड़ाई में फतेह सिंह, सनी देओल और होशियार सिंह, वरुण धवन मोर्चा संभालते हैं, तो वहीं आसमान की फाइटर पायलट निर्मलजीत सिंह, दिलजीत दोसांझ और समंदर की लड़ाई महेंद्र रावत, अहान शेट्टी अपने दम पर लड़ते हैं. जब-जब ये चारों पर्दे पर आते हैं, तब-तब जोश, इमोशंस और एक्शन से चारों तरफ़ छा जाते हैं. हर किसी ने अपना काम बेहतरीन निभाया है. इनका बख़ूबी साथ दिया है मोना सिंह, मेधा राणा, सोनम बाजवा, अन्या सिंह ने भी.

चाहे अकादमी के ट्रेनिंग की मस्ती, शरारत, संघर्ष से भरी ज़िंदगी हो, शादी-ब्याह, गांव का घर, अपने लोगों का स्नेह और ग़ुस्सा हो हर सीन बहुत कुछ कह जाता है. सोनू निगम की आवाज़ का जादू एक बार फिर सिर चढ़ बोलता है घर कब आओगे... गाने में. जाते हुए लम्हों... मिट्टी के बेटे... गीत भी मंत्रमुग्ध कर देते हैं. संगीत में अनु मलिक, मिथुन, सचेत-परंपरा, विशाल मिश्रा, जॉन स्टीवर्ट एडुरी ने अपना कमाल दिखाया है. बैकग्राउंड म्यूज़िक माहौल में जोशखरोश भर देता है.

फिल्म की कथा-पटकथा अनुराग सिंह ने निखिल नटराजन के साथ मिलकर लिखी है. अंशुल चौबे की सिनेमैटोग्राफी लाजवाब है. टी सीरीज फिल्म्स और जे. पी. फिल्म्स के बैनर तले भूषण कुमार, जे.पी. दत्ता, कृष्ण कुमार व निधि दत्ता द्वारा निर्मित यह फिल्म हमें सरहद पर पहरा दे रहे सैनिकों के बारे में गहराई से सोचने को मजबूर करती है.

‘बॉर्डर 2’ न केवल हमारे देश के शहीद जवानों के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि है, बल्कि हर उस सोल्जर को सैल्यूट है जो हमारी और देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा देते हैं.

- ऊषा गुप्ता

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Photo Courtesy: Social Media

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