10 गुड फूड, 10 बैड फूड (10 Good Food 10 Bad Food)

शरीर के विकास और अच्छे हेल्थ के लिए न्यूट्रीशियस चीज़ों की ज़रूरत होती है. ऐसे न्यूट्रीशिन्स, जो हमारे शरीर में विटामिन्स, प्रोटीन्स, मिनरल्स, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, आयरन और ओमेगा-3 आदि की कमी को पूरा करते हैं. इन न्यूट्रीशिन्स में से यदि किसी एक की भी कमी हो जाती है, तो हमारा शरीर अनहेल्दी हो जाता है. इसलिए ज़रूरी है कि बैलेंस्ड डायट ली जाए, जिसमें उपरोक्त बताए गए सभी पोषक तत्व शामिल हों. आइए जानें, ऐसे ही कुछ गुड फूड और बैड फूड के बारे में.

Good Food, Bad Food

 

गुड फूड

 

1. ग्रीन टी: इसमें ऐसे एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो एजिंग प्रोसेस को कम करते हैं. ग्रीन टी में एपीगैलोकैटाचिन गैलेट (ईसीजीसी) नामक एंटी-ऑक्सीडेंट होता है, जो शरीर में मौजूद किसी भी टिश्यू को हानि पहुंचाए बिना कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है. ग्रीन टी में फैट्स कम करनेवाले कैपेचिन होते हैं, जो वज़न कम करने में मदद करते हैं. इंफ्लुएंज़ा और डायरिया में यह एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल का काम करती है. डायबिटीज़ में शुगर लेवल को कंट्रोल और तनाव को दूर करने में मदद करती है.
2. ब्रोकोली: विटामिन ए और सी, फॉलिक एसिड, कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर ब्रोकोली वेट लॉस, सर्दी-खांसी और स्ट्रेस दूर करने में मदद करती है. जो लोग डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन नहीं करते, उनके लिए यह बेस्ट सप्लीमेंट का काम करती है. गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान ब्रोकोली का सेवन करना चाहिए, क्योंकि यह गर्भावस्था के दौरान होनेवाली जटिलताओं को दूर करती है. ब्रोकोली में ऐसे एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो विशेष रूप से ब्रेस्ट कैंसर, कोलोन और लंग कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं.
3. मल्टीग्रेन ब्रेड: यह एक हेल्दी फूड है. इसमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट होता है, जिससे पाचन क्रिया धीमी चलती है और शरीर को पोषित करने के लिए पोषक तत्वों को अधिक समय मिलता है. फाइबर की अधिक मात्रा होने के कारण मल्टीग्रेन ब्रेड डायबिटीज़, हार्ट डिसीज़, ब्लड प्रेशर और आम बीमारियों को होने से रोकता है.
4. ओट्स: एक अध्ययन से यह साबित हो चुका है कि यदि नियमित रूप से 1 कटोरी ओटमील का सेवन किया जाए, तो कोलेस्ट्रॉल के लेवल को 23% तक कम किया जा सकता है. इसमें ऐसे तत्व होते हैं, जो तनाव को कम करने, इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाने, नर्वस सिस्टम को हेल्दी बनाने, एग्ज़ीमा व स्किन डिसीज़ को दूर करने और एनर्जी बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अतिरिक्त बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी ओट्स कम करता है, जिसके कारण दिल की बीमारी होने का ख़तरा कम हो जाता है.
5. दही: इसमें मौजूद बैक्टीरिया भोजन को पचाने में मदद करते हैं. इसलिए दही पेट संबंधी बीमारियों को दूर करने के लिए हीलिंग का काम करता है. यह इम्यून सिस्टम को मज़बूत करने, कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने और महिलाओं में वेजाइनल इंफेक्शन को रोकने में मदद करता है.
6. ऑलिव ऑयल: इस ऑयल में मोनो अनसैचुरेटेड फैटी एसिड (म्यूफा) होता है, जो हेल्थ के लिए फ़ायदेमंद होता है. यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करके दिल की बीमारियां होने से बचाता है. वेट लॉस करने में मदद करता है. इसका मतलब यह नहीं कि आम तेलों की तरह ऑलिव ऑयल भी अधिक मात्रा में खाया जाए. इसमें भी अन्य तेलों की तरह हाई कैलोरी होती है, जो सेहत को नुक़सान पहुंचाती है.
7. अखरोट: कुछ प्रोटीन्स हम डायट से लेते हैं और कुछ प्रोटीन्स का निर्माण हमारे शरीर में होता है. अखरोट भी हमारे शरीर में इन
प्रोटीन्स को बनाने में मदद करता है. इसमें म्यूफा होता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल और टोटल कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है. अखरोट में शक्तिवर्द्धक एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन ई, ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो हमें अस्थमा, आर्थराइटिस और एग्ज़ीमा जैसी बीमारियों से बचाते हैं.
8. फिश: प्रचुर मात्रा में विटामिन्स, प्रोटीन्स, मिनरल्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड होने के कारण फिश को सुपर फूड कहते हैं. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स कैंसर, हार्ट डिसीज़, आर्थराइटिस, डायबिटीज़ और डिप्रेशन जैसी बीमारियों को दूर करते हैं. इसके अतिरिक्त
ओमेगा-3 होने के कारण फिश महिलाओं में एजिंग लाइन की समस्या को भी दूर करती है.
9. लहसुन: इसमें विटामिन ए, बी और सी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और पानी में घुलनशील अनेक पोषक तत्व (अमीनो एसिड, विटामिन्स और एंज़ाइम्स) होते हैं, जो अनेक बीमारियों, जैसे- कैंसर, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल लेवल, आर्थराइटिस, डायबिटीज़ और ज़ुकाम व कफ़ से लड़ने में मदद करते हैं. ज़ख़्म, चोट आदि लगने पर लहसुन एंटीसेप्टिक का काम भी करता है.
10. बेरीज़: स्ट्रॉबेरी, रसबेरी और ब्लूबेरी- ये सभी विटामिन सी के सबसे अच्छे स्रोत हैं. लो कैलोरी फूड होने के कारण बेरीज़ ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने और वेट लॉस करने में मदद करती हैं. सोल्यूूबल फाइबर (घुलनशील फाइबर) के कारण बेरीज़ लो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करती हैं और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) होने से रोकती हैं. इनमें ऐसे एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो कैंसर और कार्डियो वैस्कुलर डिसीज़ से बचाते हैं.

 

बैड फूड

 

1. छोले-भटूरे: भटूरे में मैदा होने के कारण आटे की तुलना में पोषक तत्व कम होते हैं और स्टार्च ज़्यादा होता है. फ्राई करने के बाद भटूरे में मिनरल्स कम हो जाते हैं और यह हाई कैलोरी फूड की कैटेगरी में आ जाता है, जिससे मोटापा बढ़ता है. छोले में भी ज़्यादा तेल और सोडा होने के कारण सेहत को नुक़सान पहुंचता है.
2. बर्गर: रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, हाई फैट्स और हाई सॉल्ट से भरपूर बर्गर खाने में जितना टेस्टी होता है, उसमें कैलोेरी, स्टार्च, फैट्स और
कोलेस्ट्रॉल भी उतना अधिक होता है. बर्गर की 1 सर्विंग में 400 से 450 कैलोरीज़ होती हैं, जो सेहत को हानि पहुंचाती हैं.
3. नूडल्स: इंस्टेंट नूडल्स में स्टार्च अधिक होने के कारण पोषक तत्व बहुत कम होते हैं. इसमें मोनो सोडियम ग्लूकामेट (एमएसजी) होता है, जो सेहत को हानि पहुंचाता है, विशेष रूप से नर्वस सिस्टम को. इसके अलावा रोज़ाना नूडल्स खानेवाले लोगों को भविष्य में अल्ज़ाइमर्स या पार्किंसन की बीमारी हो सकती है.
4. आइस्क्रीम: इसमें क्रीम शुगर होने के कारण हाई कैलोरी होती है. इसके अलावा शुगर फ्री आइस्क्रीम खाने से भी शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ती है. आइस्क्रीम में आर्टिफिशियल कलर्स, सैचुरेटेड फैटी एसिड और प्रिज़र्वेटिव्स होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल व मोटापा बढ़ाते हैं और पेट के लिए हानिकारक होते हैं.
5. आलूू टिक्की: आलू-टिक्की में स्टार्च के अतिरिक्त और कोई पोषक तत्व नहीं होता और फ्राई करने के बाद कैलोरी की अधिकता और भी बढ़ जाती है, जिससे मोटापा बढ़ता है.
6. चिप्स: ये खाने में जितने टेस्टी होते हैं, सेहत को उतना ही नुक़सान पहुंचाते हैं. फैट्स और कैलोरी बहुत अधिक होने के कारण इनसे मोटापा और वज़न तेज़ी से बढ़ता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक सर्विंग में 15-20 चिप्स खाने से शरीर में 10 ग्राम फैट्स और 154 कैलोरीज़ की वृद्धि होती है. चिप्स में विटामिन्स-मिनरल्स बहुत कम और सोडियम अधिक मात्रा में होने के कारण हृदय पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट फेलियर, कोरोनरी डिसीज़ और किडनी की समस्या हो सकती है.
7. पिज़्ज़ा: मैदा होने के कारण पिज़्ज़ा बेस में अनसैचुरेटेड फैट्स होता है, जो आर्टरीज़ को ब्लॉक करता है, जिसके कारण हार्ट डिसीज़ होने की संभावना हो सकती है और सोडियम की मात्रा अधिक होने के कारण हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी हो सकती है. इसके अतिरिक्त हाई कैलोरी फूड होने के कारण पिज़्ज़ा खाने से वज़न भी बढ़ता है.
8. ड्रिंक्स: ऐरिएटेड ड्रिंक्स में कोई पोषक तत्व नहीं होते, लेकिन फ्लेवर और कलर होने के कारण ये ड्रिंक्स सेहत को नुक़सान पहुंचाते हैं. जबकि सॉफ्ट ड्रिंक्स से हड्डियों का कमज़ोर होना, वज़न बढ़ना, डायबिटीज़, डायजेस्टिव सिस्टम का असंतुलित होना, दांतों की सड़न और वैस्कुलर प्रॉब्लम्स आदि समस्याएं हो सकती हैं. ड्रिंक्स में प्रमुख कंटेंट शुगर और कलर्स हैं, जो सेहत को हानि पहुंचाते हैं. इसमें शुगर की अधिक मात्रा होने के कारण डायबिटीज़ होने की संभावना हो सकती है.
9. पकौड़े/समोसे: डीप फ्राई और सोडियम की अधिक मात्रा हेल्थ को नुक़सान पहुंचाती है. मैदा, नमक और फ्राइड आलू- सभी एक साथ होने के कारण ये हाई कैलोरी फूड की श्रेणी में आता है. इसकी एक सर्विंग में 250 कैलोरीज़ होती है.
10. पैक्ड फूड: इसमें प्रिज़र्वेटिव्स, शुगर और सोडियम अधिक मात्रा में और पोषक तत्व बहुत कम मात्रा में होते हैं, जो सेहत को हानि
पहुंचाते हैंं.

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– पूनम नागेंद्र शर्मा