हार्मोन्स संतुलित रखने के 20 आसान तरीक़े ( 20 Ways To Maintain Hormonal Balance Naturally)

हमारे शरीर को संतुलित बनाए रखने में हार्मोन्स का बहुत बड़ा योगदान होता है. शरीर में मौजूद हार्मोन्स शरीर में संदेशवाहक का काम करते हैं. इन्हीं हार्मोन्स की वजह से हम अपने मूड, स्वास्थ्य, वज़न, पाचन और स्वास्थ्य से संबंधित कई बातों को समझ पाते हैं. ऐसे में जब भी हार्मोंस का असंतुलन होता है, हमारा स्वास्थ्य बिगड़ता है. बहुत ज़रूरी है कि हार्मोंस का संतुलन (Hormonal Balance Naturally) बना रहे, ताकि हम हमेशा स्वस्थ और फिट रहें.

Hormonal Balance Naturally

क्या हैं हार्मोन्स?
हार्मोन किसी कोशिका या ग्रंथि द्वारा स्नवित ऐसे रसायन होते हैं जो शरीर के दूसरे हिस्से में स्थित कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं. शरीर की वृद्धि, मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम पर हार्मोन्स का सीधा प्रभाव होता है. हमारे शरीर में कुल 230 हार्मोन होते हैं, जो शरीर की अलग-अलग क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं. हार्मोन की छोटी-सी मात्रा ही कोशिका के मेटाबॉलिज्म को बदलने के लिए काफ़ी होती है. ये एक केमिकल मैसेंजर की तरह एक कोशिका से दूसरी
कोशिका तक सिग्नल पहुंचाते हैं. अधिकतर हार्मोन्स का संचरण रक्त के द्वारा होता है. कई हार्मोन दूसरे हार्मोन्स के निर्माण और स्नव को नियंत्रित भी करते हैं.

पुरुषों में हार्मोंन्स
1.एंड्रोजेन
इस हार्मोन का मुख्य काम पुरुषों में दाढ़ी आना, सेक्सुअल लाइफ, अग्रेसिव बिहेवियर, मसल्स बनाने जैसे शारीरिक और मानसिक बदलावों के लिए ज़िम्मेदार होता है.
असंतुलित होने पर
बॉडी में यह हार्मोन कम होने पर मसल्स बनने में कमी, स्पर्म बनने में कमी, कमज़ोरी, चिड़चिड़ापन, अपोजिट सेक्स के प्रति रुचि में कमी और इन्फर्टिलिटी जैसे लक्षण देखे जाते हैं.

2.इंसुलिन
इसका मुख्य काम बॉडी में ग्लूकोज़ के लेवल को कंट्रोल करना है. यह ब्लड में ग्लूकोज़ को बढ़ने से रोकता है. हमारी बॉडी में ग्लूकोज की नॉर्मल मात्रा फास्टिंग में 70-100 तक और नॉन फास्टिंग में 140 ग्राम/डेसीलीटर तक होनी चाहिए.
असंतुलित होने पर
ब्लड में इंसुलिन कम होने पर ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है इसका असर बॉडी के क़रीब सभी ऑर्गन्स पर पड़ता है. इसके असंतुलन से घाव जल्दी नहीं भरते. हाथ-पैरों में दर्द रहना शुरू हो जाता है. जल्दी-जल्दी पेशाब आना, वज़न घटना, भूख का काफ़ी कम हो जाना आदि इसके लक्षण हैं.

3.थायरॉयड
यह हमारे गले में मौजूद एक ग्रंथि का नाम है. इससे निकलने वाले हार्मोन को थायरॉयड
हार्मोन कहते हैं, जिनके नाम हैं ढ3, ढ4, ढडक। ढडक हमारे दिमाग में मौजूद पिट्यूट्री ग्लैंड से निकलता है, जिसका काम ढ3 और ढ4 को कंट्रोल करना होता है. यह हार्मोन हमारी बॉडी की ग्रोथ रेग्युलेट करता है.
असंतुलित होने पर
इस हार्मोन के असंतुलित होने से दिमाग़ी विकास धीमा हो जाता है. बच्चे में इस हार्मोन के असंतुलित होने पर विकास धीमा हो जाता है यानी जो काम बच्चा तीन महीने की उम्र में करने लगता है, वह 10 महीने में करता है. बड़ों में पांव फूलना, वज़न बढ़ना, नॉर्मल तापमान में ठंड लगना जैसे लक्षण देखे जाते हैं.

4.पैराथायरॉयड
यह भी गले में मौजूद होती है और इसका काम हमारी बॉडी में कैल्शियम के लेवल को कंट्रोल करने का होता है.
असंतुलित होने पर
हड्डियां कमज़ोर हो जाएंगी. यह बूढ़े लोगों में ज़्यादा होता है.

5.इपाइनेफ्राइन या एड्रेनेलिन
इसे फाइट ऑर फ्लाइट’ हार्मोन भी कहा जाता है. यह बॉडी में रिजर्व एनर्जी की तरह होता है. इसका काम अचानक आ जाने वाली परेशानी को हैंडल करने की ताक़त देना होता है. यह शरीर में मौजूद मिनरल्स को मेनटेन करता है.
असंतुलित होने पर
इसके कुछ केस में मौत होने तक की आशंका रहती है. एड्रेनेलिन फेल्योर की कंडिशन में बीपी तेज़ी से गिरता है. हालांकि ऐसे केस कम ही देखने को मिलते हैं.

बचाव ही बेहतर है
– हाई ओमेगा6 पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स को अवॉइड करें. हमारे शरीर को बहुत ही कम मात्रा में पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स की ज़रूरत होती है, लेकिन जब हम इन्हें अधिक मात्रा में लेने लगते हैं, तो शरीर इन्हें ही हार्मोंस के निर्माण के काम में प्रयोग करने लगता है, जिससे स्वास्थ्य को नुक़सान पहुंच सकता है. बेहतर होगा वेजीटेबल ऑयल्स, जैसे- पीनट, कनोला, सोयाबीन आदि का इस्तेमाल कम करके कोकोनट ऑयल, रियल बटर, ऑलिव ऑयल (बिना गर्म किए) और एनीमल फैट्स का प्रयोग करें.
– कैफीन की मात्रा कम करें. सीमित मात्रा में चाय-कॉफी ठीक है, लेकिन बहुत अधिक मात्रा में कैफीन से एंडोक्राइन सिस्टम पर विपरीत प्रभाव पड़ता है.
– टॉक्सिन्स शरीर में न जाने पाएं, इसका ख़्याल भी रखें. पेस्टिसाइड्स, प्लास्टिक्स व कोटेड बर्तनों का प्रयोग कम करें, क्योंकि इनमें ऐसे केमिकल्स होते हैं, जो शरीर को हार्मोंस निर्माण करनेवाले तत्वों का आभास देते हैं, जिससे शरीर इन्हीं तत्वों से हार्मोंस बनाने लगता है और शरीर में नेचुरल व हेल्दी हार्मोंस का निर्माण रुक सकता है. यदि आपके हार्मोंस असंतुलित हैं या आप कंसीव नहीं कर पा रहीं, तो इन टॉक्सिन्स से दूर रहना बेहद ज़रूरी है. स्टील या कांच के बर्तनों का प्रयोग करें, नॉनस्टिक से दूर रहें और स्टोरेज के लिए भी प्लास्टिक का प्रयोग न करें.
– नारियल के तेल को अपने डायट में शामिल करें. यह हार्मोंस के संतुलन में मदद करता है. यह वज़न को भी नियंत्रित करता है.
– हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ करें, क्योंकि बहुत हैवी एक्सरसाइज़ से समस्या बढ़ सकती है. बेहतर होगा योग व प्राणायाम करें. आप वॉकिंग और जॉगिंग भी कर सकते हैं.
– हेल्दी डायट लें. गाजर में अलग तरह का फाइबर होता है, जो अतिरिक्त एस्ट्रोजेन को शरीर से बाहर निकालर डिटॉक्सीफिकेशन में मदद करता है. गाजर खाएं, ख़ासतौर से वो महिलाएं, जो पीएमएस (माहवारी से पहले होनेवाली समस्याएं) से परेशान हों.
– ब्रोकोली, पत्तागोभी व फूलगोभी जैसी सब्ज़ियों में फाइटोन्यूट्रिएंट्स की भरमार होती है, जो टॉक्सिन्स को कंट्रोल करके हार्मोंस को बैलेंस रखते हैं और कैंसर जैसे रोगों से बचाव भी करते हैं.
– फ्लैक्ससीड भी बहुत हेल्दी है. अपने डेली डायट में 2-3 टीस्पून फ्लैक्ससीड को शामिल करें.
– ग्रीन टी मेटाबॉलिज़्म को बेहतर करके फैट्स भी बर्न करती है. इसमें मौजूद थियानाइन नामक नेचुरल कंपाउंड हार्मोंस का संतुलन बनाए रखने में कारगर है.
– एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल हेल्दी होता है और वेजीटेबल ऑयल की बजाय इसे डायट में शामिल करें.
– एवोकैडो में बीटा-साइटॉस्टेरॉल नाम का प्राकृतिक तत्व होता है, जो ब्लड कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ-साथ स्ट्रेस हार्मोंस
(कोर्टिसॉल) को भी बैलेंस करता है. यह एड्रेनल ग्लांड द्वारा बनाए जानेवाले हार्मोन (डीएचईए) के कम होते स्तर को बहाल करता है.
– ड्रायफ्रूट्स बहुत हेल्दी होते हैं. बादाम में प्रोटीन, फाइबर और कई तरह के पोषक तत्व होते हैं. अखरोट में मेलाटोनिन होता है. यह एक तरह का हार्मोन होता है, जो अच्छी नींद में सहायक होता है. भूख को नियंत्रण में रखनेवाले तत्व इसमें होते हैं. शोध में पाया गया है कि मुट्ठीभर अखरोट हफ़्ते में 5 दिन खाने से आवश्यक फैट्स शरीर को मिल जाता है, जो लैप्टिन (एक प्रकार का प्रोटीन) के निर्माण को बढ़ाता है. लैप्टिन ही वह तत्व है, जो भूख को नियंत्रित करता है.
– पानी उचित मात्रा में पीएं, क्योंकि डिहाइड्रेशन के कारण कुछ हार्मोंस का निर्माण अधिक होने लगता है. बेहतर होगा शरीर में पानी की कमी न होने दी जाए.
– दालचीनी भी हार्मोंस को संतुलित रखने में सहायक है. दालचीनी पाउडर को अपने डायट में शामिल करें. यह इंसुलिन को भी काफ़ी हद तक संतुलित रखता है.
– ओट्स न स़िर्फ ढेर सारे पोषक तत्वों से भरपूर होता है, ये ब्लड शुगर व इंसुलिन को भी संतुलित रखता है. ओट्स आपके हार्मोंस का बैलेंस बनाए रखता है और आपको हेल्दी भी बनाता है.
– दही बहुत हेल्दी होता है. ये शरीर में हेल्दी बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखता है और बहुत-से हार्मोंस को भी संतुलित रखता है. इम्यूनिटी बढ़ाता है और शोधों से पता चला है कि आधा कप दही रोज़ खाने से सर्दी और फ्लू होने की फ्रिक्वेंसी कम होती है.
– अनार को ज़रूर डायट में शामिल करें. अध्ययन बताते हैं कि अनार कैंसर उत्पन्न करनेवाले हार्मोंस को नियंत्रित करके कैंसर से बचाव करता है.
– हल्दी न स़िर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि इसका हार्मोंस बैलेंसिंग इफेक्ट हमें हेल्दी भी रखता है.
– डार्क चॉकलेट मूड ठीक करके डिप्रेशन दूर करता है. यह एंडॉर्फिन हार्मोंस के स्तर को बढ़ाता है और इसमें मौजूद कई अन्य तत्व भी फील गुड के एहसास को बढ़ानेवाले हार्मोंस को बढ़ाकर डिप्रेशन दूर करते हैं. रोज़ डार्क चॉकलेट का 1 इंच का ब्लॉक खाएं.
– अदरक, लहसुन, कालीमिर्च, जीरा, करीपत्ता आदि में भी हार्मोंस को संतुलित रखने के गुण होते हैं. इन सभी को अपने डेली डायट में शामिल करें.

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