दुनिया तेज़ी से बदल रही है. ज़िंदगी मुश्किल और अनिश्चित होती जा रही है. रिश्ते अब समझ नहीं आते, हेल्थ भी छोटी सी उम्र में गड़बड़ा रही है. ऐसे में ज़रूरी है कि अपनी बेटी को कुछ ऐसे सबक सिखाएं, ताकि उनकी लाइफ आसान बन सके... किस पर भरोसा रखना है, किससे दूरी रखनी है, कब चुप रहना है और कब आवाज़ उठाना है, कब दूसरों से प्यार करना है और कब दिल की बात सुननी है. ये भले ही छोटी-छोटी बातें हों, लेकिन ये आपकी बेटी को स्ट्रॉन्ग और प्रैक्टिकल बनाएंगे.

1. बेटी को सिखाएं कि प्यार से ज़्यादा ज़रूरी है सेल्फ रिस्पेक्ट. अगर वो ख़ुद अपना सम्मान नहीं करेगी, तो कोई भी उसका सम्मान नहीं करेगा. उसे बताएं कि किसी और के लिए अपना स्टैंडर्ड कम न करें, वरना दिल टूटेगा और पछतावा भी होगा.
2. उसे फाइनेंशियली इंडीपेंडेंट होना सिखाएं. उसे कमाना, बचाना और इंवेस्ट करना सिखाएं, ताकि वो आत्मसम्मान से जी सके.
3. सारे फ्रेंड्स सच्चे नहीं होते. कुछ लोग स़िर्फ अपने फायदे के लिए जुड़ते हैं. ऐसे लोग लॉयल नहीं होते. बेटी को इंसानों की परख करना सिखाएं. उसे बताएं कि भीड़ इकट्ठा करने की बजाय चुनिंदा दोस्त बनाएं, जो भरोसे के लायक हों.
4. गुस्सा कमज़ोरी है. ज़िंदगी और हालात उसे आपा खोने के लिए उकसाएंगे, लेकिन उसे बताएं कि उसे हर हालत में शांत रहना सीखना है. वो इमोशनल होकर या गुस्से में कोई फैसला न ले. बल्कि शांत होकर परिस्थिति को हैंडल करना सीखे.
5. ऐसे लोगों के आसपास रहे, जो बड़ा सोचते हैं, बड़े सपने देखते हैं. ये उसके सपनों को भी बड़ा आकार देगा.
6. उसे अपने शरीर को मंदिर की तरह ट्रीट करना सिखाएं. हेल्दी खाना, डेली एक्सरसाइज़, अच्छी नींद उसे बीमारियों से बचाएगी.
7. सम्मान को संभालकर रखे. एक छोटा सा ग़लत क़दम भी उसकी डिग्निटी को नुक़सान पहुंचा सकता है. उसे बताएं कि उसका कैरेक्टर सोने के ज़ेवर से भी ज़्यादा क़ीमती है. इसलिए डिग्निटी को हमेशा मेंटेन रखे.
8. टाइम इज़ मनी. टॉक्सिक रिलेशनशिप या बेमतलब के लोगों पर सालों बर्बाद करना जीवन का सबसे बड़ा नुक़सान है. इससे बाद में पछतावा ही होता है. अपनी बेटी को समय रहते ये बात समझाएं. उसे टाइम की वैल्यू करना सिखाएं.

9. कभी-कभी ख़ामोशी सबसे पावरफुल हथियार साबित होती है. हर बार लोगों को जवाब देना या हर बात पर रिएक्ट करना ज़रूरी नहीं होगा, ये बात अपने बेटी को समझाएं. कई बार शब्दों से ज़्यादा असर ख़ामोशी का होता है.
10. उसे ख़ुद पर भरोसा करना सिखाएं. ख़ुद पर भरोसा जीवन की सबसे बड़ी ताक़त है. अपनी क्षमता, अपने टैलेंट पर विश्वास रखने से जीवन की सारी मुश्किलें आसान लगने लगती हैं और पूरी दुनिया भी उसके सामने झुकती है.
11. दूसरों को ख़ुश करने के चक्कर में अपनी ख़ुशी को दांव पर मत लगाए. हर किसी को ख़ुश करना मुमकिन नहीं. इसलिए ऐसी कोशिश में खुद को मत खो देना. अपनी ख़ुशी, शांति और पहचान कभी किसी के लिए कुर्बान मत करना. बेहतर है अपने लिए जीना सीखो.
12. बेटी को ना बोलना सिखाएं. ये कमज़ोरी नहीं है, बल्कि सच बोलने का एक तरीका है. उसे अपनी सीमाएं तय करना सिखाएं. कहां हां बोलना है और कहां ना, ये ख़ुद तय करेे. किसी दबाव में आकर हां बोलना स्ट्रेस दे सकता है.
13. ग़लतियों से डरे नहीं, बल्कि उससे सीखे. ग़लतियां होती ही इसलिए हैं ताकि हमें सही क्या है, इस बात का एहसास कराए. इसलिए सीखते रहो और आगे बढ़ते रहो.
14. कब ख़ामोश रहना है और कब नहीं रहना है, ये सीखना भी ज़रूरी है. चुप रहना हर बार सही नहीं होता. कई बार चुप्पी को लोग आपकी कमज़ोरी समझ लेते हैं. इसलिए बेटी को बताएं कि जहां ज़रूरी है वहां आवाज़ उठाओ. ये तुम्हारा हक़ है और अस्तित्व की पहचान भी.
15. रिश्ते बनाओ और उन्हें निभाओ भी, लेकिन अगर रिश्ते तकलीफ़ देने लगें या चोट पहुंचाने लगें तो सही समय पर ऐसे रिश्ते से दूरी बना लो. बेटी को ये बात समझाएं कि आत्मसम्मान से बड़ा कुछ भी नहीं.
16. पैसे की क़ीमत समझाएं. फाइनेंशियली आत्मनिर्भर बनाएं. ये उसे स्वतंत्रता, सुरक्षा और आत्मविश्वास देगा.
17. उसे खुद को टॉप प्राथमिकता देना सिखाएं. उसके इमोशन, उसकी ज़रूरतें और उसकी मेंटल हेल्थ ज़रूरी हैं. दूसरों की मदद करो, पर खुद को थकाकर नहीं. खुद को भी समय दो. ये स्वार्थ नहीं, आपकी ज़रूरत है.
18. मेहनत का कोई विकल्प नहीं. सफलता शॉर्टकट से नहीं आती. ना ही एक रात में मिलती है. इसलिए कोशिश और मेहनत करते रहो. हार मत मानो. थोड़ा देर ही सही, सफलता ज़रूर मिलेगी.
19. किसी से तुलना मत करो. हर इंसान, उसका जीवन अलग होता है. खुद को बेहतर बनाने पर फोकस करो. अपनी स्पीड से आगे बढ़ो.

20. लोगों को परखना सीखो. हर मुस्कान सच्ची नहीं होती. हर हंसी दिल से नहीं होती. हर व्यक्ति भरोसे लायक नहीं होता, इसलिए किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा मत करो. थोड़ा समय लो, सामनेवाले को परखो और फिर उस पर भरोसा करो.
21. जो महसूस करती हो, उसे ज़ाहिर करो. दिल की बात कहना कमजोरी नहीं. अपनी भावनाओं को समझो, लिखो और व्यक्त करो. रोने का दिल करे, तो रो लो. ये बातें अपनी बेटी को ज़रूर बताएं. इससे उसका मेंटल हेल्थ को दुरुस्त रहता है और आत्मबल बढ़ता है.
22. लोग क्या कहते हैं या क्या सोचते हैं, इसकी परवाह करके स्ट्रेस मत बढ़ाओ. बस अपना काम करते रहो. तुम्हारा काम ही तुम्हारी असली आवाज़ है. लोग क्या कहते हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता. देखना एक दिन यही लोग तुम्हारी तारीफ़ करते नहीं थकेंगे.
23. सोशल मीडिया को सीरियसली मत लो. सोशल मीडिया असली ज़िंदगी नहीं है. लाइक्स सच्ची ख़ुशी नहीं देते. दूसरों की ख़ुशी से अपनी तुलना मत करो. ऑनलाइन तुलना सिर्फ मन को थकाती है. असल रिश्तों, असल पलों और असल जीवन को अहमियत दो.
24. उसे रिश्तों में एक लाइन ड्रॉ करना सिखाएं. एक सीमा तय करने की अहमियत बताएं. जो बात अच्छी न लगे, उसका तुरंत विरोध करो. रिश्ता है तो सब कुछ सह लेंगे, ये वाली पॉलिसी उसे तकलीफ देगी और रिश्ते को भी टॉक्सिक बनाएगी.
25. लाइफ में चैलेंजेज़ आएंगे. इनसे घबराना नहीं. लोग जज करेंगे, पर तुम अंदर से मजबूत रहो. तुम्हारी ये मजबूती तुम्हें सारी चुनौतियों का सामना करने में तुम्हारी मदद करेगी. तुम्हें ज़्यादा सक्षम बनाएगी.
26. हेल्पफुल बनो, लेकिन बेवकूफ नहीं. किसी के प्रति दया रखना, किसी की मदद करना अच्छी बात है, पर कभी खुद को नुकसान पहुंचाकर किसी की मदद मत करो. जहां बहुत ज़रूरी है, वहीं मदद का हाथ बढ़ाओ. ध्यान रखो कि लोग तुम्हारे हेल्पफुल स्वभाव को तुम्हारी कमज़ोरी समझकर तुम्हारा फायदा न उठाएं.
27. सेल्फ लव सीखें. खुद से प्यार करना सबसे ज़रूरी है. तुम दूसरों से प्यार तभी कर सकती हो, जब तुम खुद को प्यार करती हो, खुद को स्वीकार करती हो. इसलिए अपनी खूबियां पहचानो, अपनी कमियां सुधारो. आप जैसी हो, खुद को उसी तरह एक्सेप्ट करो.
28. अपने फैसले खुद लो. सलाह सबकी सुनो, पर मानो सिर्फ वही जो सही लगे. ध्यान रखो जीवन तुम्हारा है, तो फैसले भी खुद करो. अपने अनुभवों पर भरोसा रखना सीखो. अपने जीवन का लक्ष्य तय करो, मेहनत करो और अपना रास्ता खुद बनाना सीखो.
29. ग़लती हो जाए, तो उसे स्वीकार कर लो और उस ग़लती की ज़िम्मेदारी लेना भी सीखो. ग़लती मान लेने से इंसान छोटा नहीं हो जाता. हां उस ग़लती को सुधारने की कोशिश करो और फैसला करो कि वो ग़लती नहीं दोहराओगी.
30. टाइम की वैल्यू करना सीखो. बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता. इसलिए हर मोमेंट की कद्र करो. टाइम मैनेजमेंट सीखो और ज़रूरी चीज़ों पर फोकस करो. सक्सेस का यही मंत्र है.

31. सेल्फ रिस्पेक्ट बहुत ज़रूरी है. उतना ही ज़रूरी है रिस्पेक्ट हासिल करना. तुम्हारा काम और व्यवहार तुम्हें सम्मान दिलाता है. नकली दिखावा नहीं. इसलिए लाइफ में मेहनत, ईमानदारी और विनम्रता कभी मत छोड़ो.
32. दोस्त कम बनाओ, पर अच्छे दोस्त बनाओ. ध्यान रखो दो सच्चे लोग दस नकली लोगों से बेहतर होते हैं. रिश्तों में क्वालिटी ज़रूरी है, क्वांटिटी नहीं. ऐसे लोग से कनेक्ट हो, जो साथ निभाएं. ऐसे लोगों से दूर रहो, जो स़िर्फ फायदा उठाना जानते हैं.
33. प्रॉब्लम्स से भागो नहीं, उनका सामना करो. भागने से समस्याएं बड़ी और सामना करने से छोटी होती हैं. हिम्मत रखो और प्रॉब्लम्स का सोल्यूशन निकालो. इससे लाइफ आसान बनेगी और कॉफिंडेस भी बढ़ेगा.
34. ग्रेटिट्यूड देना सिखाएं. जो कुछ तुम्हारे पास है, उसके लिए धन्यवाद दो. शिकायतें कम करो और ग्रेटिट्यूड जताओ. इससे मन शांत रहता है और ख़ुशियां बढ़ती हैं.
35. किसी के लिए खुद कभी मत बदलना. तुम जैसी हो वैसी ही ख़ूबसूरत हो. अपनी पहचान मत कभी मन खोना. तुम्हारी पहचान ही तुम्हारी असली ताक़त है.
36. अपनी सुरक्षा को लेकर अलर्ट रहना ज़रूरी है. सावधानी रखना डर नहीं, समझदारी है. देर रात, अनजान जगहों और अजनबियों से विवेकपूर्ण दूरी रखो.
