हेल्थ मैनेजमेंट के 50 स्मार...

हेल्थ मैनेजमेंट के 50 स्मार्ट आइडियाज़(50 Smart Health Management Ideas)

रोज़मर्रा की भागदौड़ में सेहत कहीं पीछे छूटती जा रही है. ऐसे में बीमारियां हमें बड़ी आसानी से घेर रही हैं. बीमारियों को दूर रखने और ख़ुद को स्वस्थ रखने के लिए आपको ज़रूरत है कुछ स्मार्ट आइडियाज़ की. इसलिए हम लेकर आए हैं, स्मार्ट हेल्थ मैनेजमेंट आइडियाज़, ताकि आप रहें चुस्त-दुरुस्त व तंदुरुस्त.

Health Management Ideas

 

– दिनभर चुस्ती-स्फूर्ति के लिए हल्का व्यायाम बेहद ज़रूरी है, इसलिए रोज़ाना योग और हल्की एक्सरसाइज़ करें.

– वर्कआउट के समय बीच-बीच में पानी पीते रहें. एनर्जी ड्रिंक या अन्य किसी तरह का पेय पदार्थ न पीएं. ताज़ा पानी ही सबसे बेहतर है.

– नाश्ता ज़रूर करें. अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग नाश्ता नहीं करते, उनका वज़न जल्दी बढ़ता है.

– सुबह का नाश्ता पौष्टिक होना चाहिए, ताकि शरीर को पूरे दिन की ऊर्जा मिले. आप फल, फ्रूट जूस, स्प्राउट्स, अंडे या दूध व टोस्ट नाश्ते में ले सकते हैं.

– बेरीज़ का सेवन करें (ब्लूबेरीज़, रसबेरी व स्ट्रॉबेरी), इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने में सहायक होते हैं.

– लहसुन, प्याज़, हरी प्याज़ आदि भी अपने भोजन में शामिल करें. केप टाउन के चाइल्ड्स हेल्थ इंस्टीट्यूट में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि कच्चे लहसुन के सेवन से बच्चों को होनेवाले बहुत-से गंभीर इंफेक्शन्स से बचाया जा सकता है.

– ड्रायफ्रूट्स भी अपने डायट में ज़रूर शामिल करें. होल ग्रेन्स और फाइबर्स भी भरपूर मात्रा में लें.

– टमाटर को भी अपने डेली डायट में शामिल करें. ये न स़िर्फ विटामिन सी का अच्छा स्रोत हैं, बल्कि इनमें मौजूद लाइकोपीन तत्व कैंसर से बचाव करता है. सबसे अच्छी बात यह है कि पके हुए टमाटर पोषण से भरपूर होते हैं.

– अपने दांतों का भी ख़्याल रखें. कुछ लोग जल्दबाज़ी में ब्रश करते हैं और ओरल हाइजीन की तरफ़ ध्यान ही नहीं देते, न ही नियमित रूप से डेंटिस्ट को मिलते हैं. दांतों में प्लाक जमा हो या कैविटी हो, तो उसका फ़ौरन इलाज करवाएं.

– दांत और मसूड़ों की कोई तकलीफ़ हो, तो सेंधा नमक और सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों की मालिश करें. मुंह की दुर्गंध मिटाने के लिए पानी में बेकिंग सोडा डालकर गरारे करें.

– रोज़ाना कम से कम 8 ग्लास पानी ज़रूर पीएं. बीच-बीच में फ्रूट जूस भी लें.

– हमेशा भूख से थोड़ा कम ही खाएं. ओवर ईटिंग से बचें.

– इसी तरह अंडरईटिंग से भी बचें, वरना इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाएगा. पौष्टिक भोजन करें.

– भरपूर नींद लें, ताकि आप तनाव से दूर रहें.

– रात को सोते समय एक ग्लास गुनगुना दूध पीने से नींद अच्छी आती है और शरीर को पर्याप्त प्रोटीन भी मिलता है.

– नींद न आए, तो गोलियों या अल्कोहल का सेवन न करें. कोशिश करें कि प्राकृतिक तरी़के से ही नींद आए.

– हमेशा खाना चबा-चबाकर खाएं. इससे पचने में भी आसानी होती है.

– अलग-अलग प्रोटीन्स लें. ये आपको बीन्स, नट्स, सीड्स, टोफू, सोया प्रोडक्ट्स में मिलेंगे. लेकिन सॉल्टेड, शुगरी या रिफाइन्ड नट्स न लें.

– कैल्शियम युक्त पदार्थ ज़रूर लें, जैसे- दूध, छाछ और दही. ये जल्दी डायजेस्ट हो जाते हैं. इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्ज़ियां भी कैल्शियम की अच्छी स्रोत हैं.

– हर रोज़ कम से कम एक नींबू का सेवन ज़रूर करना चाहिए. इसे आप या तो नींबू पानी के रूप में ले सकते हैं या फिर खाने में नींबू का रस डालकर. यह आपकी पाचनशक्ति को बेहतर बनाता है.

– किसी भी तरह के दर्द में पेनकिलर्स लेने की बजाय घरेलू नुस्ख़े आज़माएं.

– हमेशा सिंपल डायट फॉलो करें. कैलोरीज़ गिनने से बेहतर होगा कि आप खाने में वेरायटीज़, कलर्स और ताज़गी को महत्ता दें. भोजन में जितने ज़्यादा कलर्स होंगे, उतना ही वो हेल्दी और पोषक होगा.

– सामान्य चाय की बजाय ब्लैक टी या ग्रीन टी लें.

– अपने बारे में हमेशा अच्छा महसूस करें और सकारात्मक सोच बनाए रखें.

– अगर आपकी ईटिंग हैबिट्स ठीक नहीं हैं, तो एकदम से उसे बदलने की बजाय धीरे-धीरे बदलाव लाएं.

– खाना बनाने और खाने से पहले हाथ ज़रूर धोएं. अगर साबुन और पानी न हो, तो सैनेटाइज़र का इस्तेमाल करें.

– खांसते-छींकते समय मुंह ढंकें. जिन लोगों को डस्ट एलर्जी है, उन्हें धूल-धूप में जाते समय अगर हो सके, तो मास्क ज़रूर पहनना चाहिए.

– हाथों की सफ़ाई के दौरान सबसे ़ज़्यादा ध्यान नेल हाइजीन पर दिया जाना चाहिए, क्योंकि नाख़ूनों में भी कई तरह के कीटाणु फंसे हो सकते हैं. इसलिए नाख़ूनों को समय-समय पर काट लेना चाहिए और हाथ धोते व़क़्त उनकी सफ़ाई पर ख़ासतौर से ध्यान देना चाहिए.

– रेग्युलर हेल्थ चेकअप भी करवाते रहें. कई बार डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का सालों तक पता नहीं चल पाता.

– ऑफिस में भी अगर आपका डेस्क जॉब है, तो देर तक एक ही जगह पर न बैठे रहें. बीच-बीच में उठकर थोड़ा टहल आएं.

– कंप्यूटर के सामने बहुत देर तक लगातार काम न करें. हर एक घंटे में कंप्यूटर से आंखें हटाएं और थोड़ी देर बंद करके रिलैक्स करें. इससे आंखों के साथ-साथ दिमाग़ को भी आराम मिलता है.

– मोबाइल फोन पर बहुत देर तक बातें करने से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. इसलिए जितना हो सके, लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल करें.

– अगर संभव हो, तो डांसिंग और स्विमिंग क्लासेस जॉइन करें. इससे फन के साथ-साथ एक्सरसाइज़ भी होगी. अगर यह संभव नहीं, तो आप कोई हेल्थ क्लब जॉइन कर सकते हैं.

– खुलकर हंसें. रोज़मर्रा के तनाव में आपकी हंसी ग़ायब न होने पाए. खुलकर हंसने से फेफड़ों का लचीलापन बढ़ता है और उन्हें ताज़ी हवा
मिलती है.

– रेडी टु ईट फूड से बचें. इनमें आर्टिफिशियल कलर्स होते हैं, जिसके कारण एलर्जी की संभावना होती है. ऐसे कलरयुक्त फूड या ड्रिंक के कारण खांसी, ज़ुकाम और गला ख़राब होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

– ज़्यादातर लोग कोई भी चीज़ ख़रीदते व़क्त उसकी उत्पादन और एक्सपायरी डेट चेक नहीं करते. आप ऐसा कतई न करें, क्योंकि प्रोडक्ट एक्सपायर हो जाने के बाद इस्तेमाल करना काफ़ी नुक़सानदेह साबित हो सकता है.

– डिनर जितना जल्दी हो सके, कर लें, क्योंकि जिस वक़्त हमारा पाचनतंत्र बेहतर काम करता है, तभी भोजन करना अच्छा होता है. डिनर और नाश्ते के बीच पाचनतंत्र को लगभग 14 से 16 घंटे का आराम मिलना चाहिए.

– मेडिटेशन, ब्रीदिंग, क़िताब पढ़ना, म्यूज़िक सुनना आदि तनाव को कम करने में मदद करते हैं.

– चाहे पर्सनल लाइफ हो या प्रोफेशनल, ना कहना सीखें. जो चीज़ें और जो लोग आपके तनाव को बढ़ाते हैं, उनसे दूर रहें.

– एक्सप्रेस करना सीखें. मन ही मन में बातों और क्रोध को लंबे समय तक दबाकर रखने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है. अगर किसी के साथ संबंध ठीक नहीं हैं या वो आपको बेवजह परेशान कर रहा है, तो उससे बात करें और अपने गिले-शिकवे दूर करें.

– जिन परिस्थितियों को बदलना आपके हाथ में नहीं, उन्हें बेवजह बदलने की कोशिश न करें और न ही उनके बारे में सोच-सोचकर तनाव बढ़ाएं.

– खाने में सोडियम की ज़्यादा मात्रा हार्ट को नुक़सान पहुंचा सकती है. हाई ब्लड प्रेशर से बचने के लिए खाने में नमक की मात्रा कम रखना फ़ायदेमंद होता है.

– कई बार हम अपने लिए ख़रीदी दवा को किसी अन्य व्यक्ति को इसी तरह की बीमारी होने पर इस्तेमाल की सलाह दे देते हैं. लेकिन ऐसा करना हानिकारक हो सकता है, क्योंकि डॉक्टर ने आपकी हालत देखकर ऐसी दवा दी है, जो स़िर्फ आपके लिए सही है. ज़रूरी नहीं कि यह दवा दूसरे पर भी वही असर दिखाए.

– अगर आप गैस की वजह से पेटदर्द या आंतों में भारीपन से परेशान हैं, तो 1 कप ताज़ा पाइनेप्पल खाने से आराम महसूस करेंगे.
पाइनेप्पल में प्रोटियोलाइटिक एंज़ाइम्स होते हैं, जो पाचन क्रिया को तेज़ करके दर्द पैदा करनेवाले प्रोटीन्स को पचा देते हैं.

– कई लोगों की सोच होती है कि अगर वो मल्टी विटामिन्स लेेंगे, तो कभी बीमार ही नहीं पड़ेंगे या फिर 40 की उम्र पार करते ही उन्हेें सप्लीमेंट्स लेने ही चाहिए. ये सच नहीं है. दरअसल, बहुत कुछ हमारे शरीर द्वारा स्टोर किए हुए पोषक तत्वों और हम कितनी एनर्जी रोज़ाना इस्तेमाल करते हैं, इस बात पर निर्भर करता है.

– 20 साल की उम्र से अधिक आयुवालों को हर 5 साल में कोलेस्ट्रॉल का टेस्ट ज़रूर करवाना चाहिए.

 

 

हेल्थ अलर्ट

– यदि आपका रक्तचाप 140/90 से ऊपर है, तो सावधान रहें, सामान्य रक्तचाप 120/80 या उससे थोड़ा कम होना चाहिए.

– कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dl से कम होना चाहिए, जिसमें ट्रायग्लिस्राइड्स150ाmg/dl  से कम हो. यानी बैड कोलेस्ट्रॉल 100mg/dl से कम हो. और गुड कोलेस्ट्रॉल 40 mg/dl से अधिक हो.

– ब्लड शुगर (फास्टिंग) यदि 126mg/dl से अधिक हो तो सतर्क हो जाएं. ये स्तर 70-110 mg/dl

– शारीरिक अनुपात- पुरुषों की कमर 40 इंच के अंदर रहे और महिलाओं की 35 इंच के अंदर होेनी चाहिए.

– अक्सर लोग पैरों में मांसपेशियों की ऐंठन यानी क्रैम्प्स और दर्द से परेशान रहते हैं. दरअसल, इस दर्द की वजह होती है पोटैशियम की कमी. ऐसे में टमाटर के जूस का सेवन फ़ायदेमंद हो सकता है.

– लगभग 80% महिलाएं पीएमएस यानी मासिक से पहले होनेवाले तकलीफ़ों से जूझती हैं. इसकी मुख्य वजह होती है, हर महीने एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हार्मोंस के स्तरों में बदलाव. रोज़ाना 2 कप दही के सेवन से यह समस्या 40% तक कम हो जाती है.