पहली बार पैरेंट्स बन रहे हैं तो बचें इन 7 ग़लतियों से (7 Mistakes New Parents Make)

 

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पहले बच्चे के जन्म के बाद कई बार मां का बच्चे से लगाव इस कदर बढ़ जाता है कि बच्चे के अलावा उसे और कुछ नज़र नहीं आता. इतना ही नहीं अपने नन्हें-मुन्ने की वो ज़रूरत से ज़्यादा फ़िक्र करने लगती हैं. ऐसे में उससे ऐसी कई ग़लतियां होने लगती हैं, जो उसे नहीं करनी चाहिए.

 

बच्चे के जन्म के बाद का पहला साल आपके लिए उमंग-उत्साह से भरपूर होने के साथ ही बहुत थका देनेवाला भी होता है. पहले बच्चे के आने से आप जितनी ख़ुश होती हैं, उसकी देखभाल आपको उतना ही थका देती है.ऐसे में ख़ुद से ये उम्मीद न रखें कि उसकी देखभाल से जुड़े हर काम को आप अच्छी तरह कर पाएंगी. याद रखें कि कोई भी इंसान जन्म से ही किसी काम में परफेक्ट नहीं होता, वो अपनी ग़लतियों और अनुभव से ही सीखता है. आइए, जानते हैं परफेक्ट बनने के चक्कर में पहली बार बने पैरेंट्स क्या-क्या ग़लतियां करते हैं?

बच्चे को रोता देखकर परेशान हो जाना

आपने बच्चे को दूध पिला दिया, उसकी गीली नैपी भी बदल दी, लेकिन फिर भी वो रोए जा रहा है, तो परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है. दरअसल, छोटे बच्चों का रोना कोई चिंता की बात नहीं है. जन्म से लेकर कुछ महीनों तक वो बहुत ज़्यादा रोते हैं, लेकिन कई पैरेंट्स ख़ासकर मां को लगता है कि बच्चे को कोई परेशानी है, इसलिए वो रो रहा है या फिर उससे कोई भूल हो गई है, जबकि ऐसा नहीं है. नवजात शिशु का रोना आम है, लेकिन हां, अगर बच्चा एक घंटे से ज़्यादा समय तक लगातार रोए जा रहा है, तो इसे अनदेखा न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

दूध के लिए रात को बच्चे को जगाना

कई महिलाएं ये सोचकर कि बच्चा भूखा होगा आधी रात को उसे जगाकर दूध पिलाने लगती है, जबकि ऐसा करने की कोई ज़रूरत नहीं है. भूख लगने पर बच्चा ख़ुद-ब-ख़ुद जग जाता है और रोने लगता है. आमतौर पर अगर आपने बच्चे को सोते वक़्त अच्छी तरह ब्रेस्टफीड कराया है, तो वो पूरी रात आराम से सोता रहेगा, इसलिए आधी रात को बच्चे को जगाकर उसकी और ख़ुद अपनी नींद ख़राब करने की ग़लती न करें.

उल्टी व लार को लेकर चिंतित होना

छोटे बच्चों के मुंह से अक्सर लार निकलती रहती है, लेकिन इसमें फ़िक्र की कोई बात नहीं है. ये सामान्य क्रिया है. साथ ही दूध पीने के बाद बच्चे अक्सर उल्टी कर देते हैं, जिसे लेकर भी पैरेंट्स परेशान हो जाते है. जबकि इसमें घबरानेवाली कोई बात नहीं है. दरअसल, बच्चा दूध पूरी तरह से पचा नहीं पाता या फिर जब वो ज़्यादा दूध पी लेता है, तो उल्टी आ जाती है. ऐसा दिन में कभी-कभार हो तो परेशान होने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन हां, अगर हर आधे घंटे में बच्चे को उल्टी आए, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जााएं.

ओरल हाइजीन का ध्यान न रखना

अक्सर देखा जाता है कि पैरेंट्स अपने बच्चे की सेहत को लेकर तो बहुत सजग रहते हैं, लेकिन जब बात ओरल हाइजीन की आती है, तो उनका रवैया लापरवाहीवाला होता है. दरअसल,
अधिकांश पैरेंट्स सोचते हैं कि जब तक बच्चे के दांत नहीं आते, उनके मुंह की सफ़ाई की ज़रूरत नहीं पड़ती, लेकिन ऐसा नहीं है. नवजात शिशु के मुंह की सफ़ाई भी ज़रूरी होती है. बच्चे के मसूड़ों को नरम कपड़े से थप-थपाकर साफ़ करें. जब बच्चे के दांत निकलने लगे, तो उसे बिस्तर पर दूध की बोतल न दें. ऐसा करके कैविटी को रोका जा सकता है. बच्चा जब एक साल से ज़्यादा का हो जाए, तो आप सॉफ्ट ब्रश से उसके दांतों की सफ़ाई कर सकती हैं.

पार्टनर की अनदेखी

बच्चे के जन्म के बाद बढ़ी ज़िम्मेदारियों और हार्मोनल बदलावों की वजह से कई महिलाएं थोड़ी चिड़चिड़ी हो जाती हैं, और छोटी-छोटी बातों पर उनका पार्टनर से विवाद हो जाता है. याद रखें कि पैरेंटिंग का फैसला अकेले आपका नहीं है, इसमें आपके पार्टनर की भी बराबर की भागीदारी है. ग़लती से भी पार्टनर को ये एहसास न दिलाए की वो अयोग्य है. क्योंकि ऐसा करने पर आपकी शादीशुदा ज़िंदगी ख़तरे में पड़ सकती है. इसलिए पैरेंट्स के साथ ही एक पार्टनर का भी फ़र्ज निभाएं. कपल्स होने के नाते आपको अपने रिश्ते के लिए थोड़ा वक़्त तो निकालना ही होगा. साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे के सामने पार्टनर से कभी बहस न करें वरना बच्चे पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा.

सबसे सलाह लेना

बच्चे के जन्म के बाद घर के बड़े-बुज़ुर्ग से लेकर दोस्त व रिश्तेदार तक हर कोई बच्चे की परवरिश से जुड़ी अपनी-अपनी नसीहते देने लगते हैं, जैसे- बच्चे को कब और कैसे दूध पिलाएं, वो रोता क्यों है, उसे गोद में कैसे उठाएं आदि. आप सबकी नसीहते सुने ज़रूर, पर आंख मूंदकर उन पर अमल करने की ग़लती न करें. क्योंकि हर बच्चा एक-दूसरे से अलग होता है. इसलिए ज़रूरी नहीं कि आपकी दोस्त का बताया परवरिश का तरीक़ा आपके बच्चे के लिए भी कारगर हो. आपके बच्चे के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा इसकी समझ आप से बेहतर किसी और को नहीं हो सकती, इसलिए सुनी-सुनाई बातों की बजाय अपने दिमाग़ से काम लें.

ख़ुद को महत्व न देना

मां बनने के बाद बच्चा महिलाओं की प्राथमिकता सूची में पहले नंबर पर आता है और ख़ुद को वो अंतिम स्थान पर रखती हैं. यानी बच्चे की देखभाल और घर के बाकी काम तो वो निपटा लेती है, पर अपने लिए थोड़ा भी वक़्त नहीं निकाल पाती. इससे धीरे-धीरे वो तनावग्रस्त हो सकती हैं. इसलिए बच्चे की देखभाल के साथ ही पूरे दिन में अपने लिए कम से कम आधे घंटे का वक़्त निकालकर अपनी मनपसंद चीज़ें करें जैसे- बुक/मैगज़ीन पढ़ें, टीवी देखें या एक कप कॉफ़ी पीते हुए गार्डन की सैर कर लें. यक़ीन मानिए फुर्सत के ये चंद पल सारी थकान दूर करके आपको तरोताज़ा कर देंगे.

– नीलम सिंह

 

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