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फिल्म समीक्षा: तेरे इश्क में- जलाती, हंसाती पर इश्क़ का जुनून रुलाती भी है… (Movie Review: Tere Ishk Mein)

धनुष के इश्क़ का तीर इस तरह चला कि उनके फैंस को दीवाना कर गया. एकतरफ़ा प्यार का दर्द, मोहब्बत का जुनून, चाहत कि आग इंसान को इस कदर भी जला सकती शायद आपने सोचा भी ना हो!..

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पहली बार धनुष और कृति सेनॉन की जोड़ी पर्दे पर क्या आई धमाल कर गई. मुक्ति (कृति) अपना थीसिस पूरा करने, टीचर्स-प्रोफेसर को यह साबित करने के लिए कि काउंसलिंग, प्यार और समझदारी से बिगड़ैल शख़्स को सुधारा जा सकता है, शंकर (धनुष) के संपर्क में आती है. वह सही है साबित करने के लिए शंकर को सुधारने का टारगेट लेती है.

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लेकिन इस अनोखे सफ़र में शंकर कब मुक्ति को प्यार करने लगता है, मुक्ति अपनी पढ़ाई, प्रयोग और लक्ष्य में इस कदर उलझी रहती है कि वह शंकर के इस जुनून को देख ही नहीं पाती. लेकिन शंकर प्यार में बढ़ता चला जाता है, वो जलता है और उस आक्रोश में सारी दुनिया को जला देने का उन्माद भी रखता है.

पूरी फिल्म में धनुष और कृति की केमिस्ट्री देखते ही बनती है. दोनों की जोड़ी बहुत ही प्यार लगती है.

धनुष के पिता बने प्रकाश राज भी अपनी भावनाओं और अभिनय से बेहद प्रभावित करते हैं, ख़ासकर पिता-पुत्र की तमिल में बात करते हुए लड़ना-झगड़ना, नाचना-गाना, ख़ुशिया मनाना एक अलग ही समां बांध देता है.

इसके अलावा आशीष वर्मा, प्रियांशु पैन्यूली, परमवीर सिंह चीमा, विनीत कुमार सिंह, तोता रॉय चौधरी, वीरेन बर्मन, जसजीत, माहिर मोहिउद्दीन, सुशील दहिया, रेडिन किंग्सले, मोहम्मद जीशान अय्यूब, जया भट्टाचार्य और चितरंजन त्रिपाठी सभी ने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है.

नीरज यादव और हिमांशु शर्मा की कहानी-पटकथा और संवाद प्रभावित करते हैं. टी-सीरीज़ के बैनर तले ए. आर. रहमान का संगीत जादू बिखेरता है.

इरशाद कामिल के गीतों में गहराई है. अरिजीत सिंह, शिल्पा राव, सुखविंदर सिंह व शंकर महादेवन के सुमधुर आवाज़ गुनगुनाने पर मजबूर कर देते हैं.

सुनील रॉड्रिक्स का एक्शन कमाल का है. तुषार कांति रे की सिनेमाटोग्राफी लाजवाब है, दिल्ली और बनारस को ख़ूबसूरती से दिखाया गया है.

हेमल कोठारी और प्रकाश चंद साहू को थोड़ी और एडिटिंग करनी चाहिए थी. क़रीब तीन घंटे की यह फिल्म दर्शकों के धैर्य की भी ख़ूब परीक्षा लेती है. वैसे हिंदी, तमिल और तेलुगू में बनी 'तेरे इश्क में' लोगों को काफ़ी पसंद आ रही है.

यूं लगता है निर्देशक आनंद एल. राय को एकतरफ़ा प्यार, दिलजले, काशी-बनारस से ख़ास लगाव रहा है, तभी‌ तो उनकी 'रांझणा' की अगली कड़ी महसूस होती है 'तेरे इश्क में'.

भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, आनंद एल. राय और हिमांशु शर्मा निर्मित यह फिल्म टूटे दिलवालों को ख़ास पसंद आएगी इसमें कोई दो राय नहीं. प्यार, टॉक्सिक रोमांस, इमोशंस, एक्शन, ट्रेजेडी... कलाकारों की अदाकारी एक अलग ही लेवल पर फिल्म को लेकर जाती है.

- ऊषा गुप्ता

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Photo Courtesy: Social Media

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