मां मनी प्लांट की एक डंडी तोड़कर हम दोनों के पास आकर खड़ी हो गईं, "देख बिट्टो, नारी का जीवन ना इसकी तरह होना चाहिए, जहां लगा दो, वहीं पनप जाए!"

"देख बिट्टो! गोपी कैसे रम गई है ससुराल में, उसका यहां मन ही नहीं लगता. तू भी कुछ सीख बड़ी बहन से!" मां पौधों को पानी देते हुए बिट्टो को भी सींच रही थीं.
बिट्टो ने मेरी ओर देखा. पापड़ बनाते हुए मेरे दिमाग़ में बिजली की तरह विशाल की दी चेतावनी गूंज गई, "मैं तो ठीक शादी वाले दिन आऊंगा, और बिट्टो की विदाई के तुरंत बाद तुम्हें लेकर निकल लूंगा. क्या करोगी और रुककर... तुम्हारी तो मायके बाज़ी कभी ख़त्म ही नहीं होती है."
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"इसका खान-पान, रहन-सहन सब विशाल जी की पसंद का हो गया है. वैसे मुझे तो पता था मेरी गोपी कहीं भी आराम से रह लेगी... तू ही है अड़ियल!"
बिट्टो ने मां को जवाब देने के लिए मुंह खोला, मैंने इशारे से चुप रहने को कहा. रहन-सहन कैसे बदला... ये मैं भी जानती हूं, बिट्टो भी! विशाल ने कुछ भी तो पहले जैसा नहीं रहने दिया.
"ये अपने मायके वाले चमाचम कपड़े यहां ना पहना करो. थोड़ी पसंद सुधारो और आइंदा लौकी में जीरा डाल दिया तो पूरी सब्ज़ी फेंक दूंगा कड़ाही समेत!.."
मां मनी प्लांट की एक डंडी तोड़कर हम दोनों के पास आकर खड़ी हो गईं, "देख बिट्टो, नारी का जीवन ना इसकी तरह होना चाहिए, जहां लगा दो, वहीं पनप जाए!"
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मैंने मां का हाथ पकड़कर रोक लिया, "नहीं मां! इसकी तरह नहीं होना चाहिए. मनी प्लांट टूटने के बाद भी पनप जाता है, ये सोचकर सब तोड़ लेते हैं..."
मां एकटक मुझे देख रही थीं. मैंने प्यार से बिट्टो के सिर पर हाथ फेरा, "याद रखना, नारी का जीवन गुलाब की तरह होना चाहिए; जो सुगंध तो बिखेरता है, लेकिन देखभाल के बाद!"
- लकी राजीव

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