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विंटर्स में क्यों बढ़ जाता है एंजायटी और हार्ट अटैक का रिस्क? (Why does anxiety and the risk of heart attack increase in winters?)

सर्दियों के मौसम में एंजाइटी और हार्ट अटैक के मामले ज़्यादा बढ़ जाते हैं, क्योंकि सर्दी के मौसम में शरीर को गर्म और स्वस्थ रखने के लिए हार्ट को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इस बारे में अधिक जानकारी दे रही हैं डॉक्टर रिया अग्रवाल.

क्या कहती है रिसर्च

वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अनुसार, दुनियाभर में हृदय रोग हर साल 2.05 करोड़ लोगों की जान लेता है, जो कैंसर, संक्रमण या सड़क हादसों से कहीं अधिक है. विश्‍व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक़ साल 2022 में 1.98 करोड़ मौतें हृदय संबंधी बीमारियों (कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज) के कारण हुईं. इनमें से 85 फ़ीसदी मौतें दिल का दौरा और स्ट्रोक के कारण हुई.

- पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक़, जिन्हें पहले से कोई हार्ट डिज़ीज है, उनमें ठंड में हार्ट अटैक का ख़तरा 31% तक बढ़ जाता है, इसलिए ठंड के महीनों में हार्ट को अतिरिक्त देखभाल की ज़रूरत होती है.

- दिसंबर महीने में हार्ट अटैक का ख़तरा सबसे ज़्यादा होता है.

- ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में साल 2018 में एक ज़रूरी स्टडी पब्लिश हुई. इस स्टडी में साल 1998 से 2013 के बीच 16 सालों में स्वीडन में हुए हार्ट अटैक केसेस की स्टडी की गई. इसमें रिसर्चर्स ने पाया कि हर साल सर्दी के मौसम में हार्ट अटैक के मामले 15% तक बढ़ गए थे. अकेले क्रिसमस से एक दिन पहले 24 दिसंबर को हार्ट अटैक में 37% का इज़ाफा देखने को मिला.

- अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल सर्कुलेशन में साल 2004 में एक स्टडी पब्लिश हुई. यह स्टडी कहती है कि अमेरिका में पूरे साल हार्ट अटैक से उतनी मौतें नहीं होतीं, जितनी अकेले स़िर्फ 25 दिसंबर के दिन होती हैं. इसके बाद 26 दिसंबर और फिर 1 जनवरी को हार्ट अटैक से सबसे ज़्यादा मौतें दर्ज़ की जाती हैं.

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विंटर्स में क्यों बढ़ जाते हैं एंजाइटी और हार्ट अटैक के केस

रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना (तरीेलेपीींीळलींळेप)

ठंड लगने पर शरीर की नसें (रक्त वाहिकाएं) सिकुड़ जाती हैं, ताकि शरीर की गर्मी बाहर न निकले और आंतरिक तापमान बना रहे. इस प्रक्रिया को वाहिकासंकुचन (तरीेलेपीींीळलींळेप) कहते हैं. जब ये वाहिकाएं पतली हो जाती हैं, तो रक्त का संचार सीमित हो सकता है, इससे रक्त वाहिकाएं  (इश्रेेव तशीीशश्री) सीमित हो सकती हैं और इससे हार्ट में कम मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है. इससे बीपी भी बढ़ जाता है. हार्ट को ऐसे में काफ़ी मेहनत भी करनी पड़ती है. इस बढ़े हुए बल के कारण ही ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और हृदय को खून पंप करने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इन सभी कारकों के चलते हार्ट अटैक आने की संभावना बढ़ जाती हैं.

ब्लड का थिक होना

सर्दियों में जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है और तापमान कम होता है, तो खून गाढ़ा होने लगता है. इससे खून के थक्के बनने लगते हैं, येहृदय की धमनियों में रुकावट पैदा कर सकते हैं, जो हार्ट अटैक का कारण बनती है.

ठंड में ब्लड प्रेशर का बढ़ना

ठंड के संपर्क में आने पर शरीर एड्रेनालिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज़ करता है. ये हार्मोन दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर दोनों को बढ़ाते हैं. ठंड में लोग अक्सर ज़्यादा नमक और तली-भुनी चीज़ें खाते हैं, जो ब्लड प्रेशर को प्रभावित करती हैं. साथ ही इस मौसम में पानी भी कम पिया जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन और ब्लड प्रेशर बढ़ने का ख़तरा हो सकता है.

फिजिकल एक्टिविटी कम होना

सर्दियों में लोग आलसी हो जाते हैं और ठंड की वजह से बिस्तर में पड़े रहते हैं. वॉक-एक्सरसाइज़ बंद कर देते हैं. इससे कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ जाता है और हार्ट से जुडी एंजायटी और हार्ट अटैक जैसी कई समस्याएं हो जाती हैं.

शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है

जब कोई व्यक्ति बहुत ठंडी, सूखी हवा में सांस लेता है, ख़ासकर अगर उसे अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज जैसी श्‍वसन संबंधी समस्याएं हैं, तो फेफड़ों तक हवा ले जानेवाली छोटी नलियां सिकुड़ सकती हैं. इस सिकुड़न के कारण हवा का प्रवाह बाधित होता है, जिससे फेफड़ों में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है.

हार्ट से जुड़ी बीमारी का ख़तरा सबसे ज़्यादा किसे होता है?

- अगर आपका दिल कमज़ोर है और सर्दियों में आप विंटर डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करते हैं या फिर हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज़ है, तो ऐसे लोगों को भी अधिक सावधानी बरतने की ज़रूरत है.

- अगर आपको अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज जैसी श्‍वसन संबंधी समस्याएं हैं.

- बुज़ुर्ग लोगों ख़ासकर 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को सर्दी के मौसम में अपना ज़्यादा ख़्याल रखने की ज़रूरत है.

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कैसे जानें कि ये एंजायटी है या हार्ट अटैक?

- जब किसी व्यक्ति के सीने में तेज़ दर्द होता है, तो शुरुआत में यह पहचान पाना मुश्किल होता है कि यह एंजायटी है या हार्ट अटैक. बहुत से लोग मामूली सी एंजायटी को अटैक समझ घबरा जाते हैं और कुछ लोग अटैक को एंजायटी समझ कर इस पर धयान नहीं देते और अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं, लेकिन अगर उनका समय से इलाज हो जाए, तो जान बचाई जा सकती है.

- हार्ट अटैक या दिल का दौरा तब पड़ता है, जब कोरोनरी आर्टरी में रक्त का थक्का जमकर हृदय में खून और ऑक्सीजन को जाने से रोकता है, लेकिन एंजायटी या हार्ट अटैक के दर्द में फ़र्क़ होता है.

हार्ट अटैक के लक्षण क्या है?

- दिल का दौरा पड़ने पर छाती के केंद्र में और संभवतः बाईं तरफ़ और पीठ में भी एक दमघोंटू दर्द महसूस होता है.

- दर्द केवल छाती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह पूरे शरीर, जैसे- हाथ, जबड़े, पीठ तक फैलने लगता है और भारीपन जैसा महसूस होता है.

- जी मिचलाना

- उल्टी आने जैसा लगता है

- बेहोशी आती है

- सांस लेने में गंभीर तकलीफ़ होती है

- यह दर्द आराम करने से कम नहीं होता है, बल्कि दर्द और लक्षण आमतौर पर लंबे समय तक बने रहते हैं या रुक-रुक कर आते-जाते रहते हैं.

- अगर पांच मिनट तक ये लक्षण रहें और ठीक ना हो तो तुरंत हॉस्पिटल जाएं.

एंजायटी के लक्षण क्या हैं?

- जबकि एंजायटी में सीने में दर्द या बेचैनी होती है. यह अक्सर हार्ट अटैक जैसा महसूस होता है. - सांस लेने में कठिनाई होती है. दम घुटने या सांस रुकने जैसा महसूस होता है.

- पसीना आता है या हॉट फ्लैशेस होते हैं. - मांसपेशियों में खिंचाव होता है.

- कांपना या कंपकंपी महसूस होना.

- जी मिचलाना या पेट ख़राब होना.

- चक्कर आना या बेहोशी महसूस होना.

- हाथों या पैरों का सुन्न हो जाना या झुनझुनी होना.

- दर्द अक्सर छाती तक सीमित रहता है.

- यह दर्द आराम करने पर, तनाव कम होने पर और गहरी सांस लेने से कम होने लगता है.

- यह दर्द आमतौर पर कुछ मिनटों से लेकर एक घंटे तक रहता है और फिर धीरे-धीरे कम हो जाता है.

दूसरे शब्दों में कहें तो पैनिक अटैक या एंजायटी आपको खाली समय में बैठने या काम न करने के वक़्त फील होता है और दिल से जुड़ी समस्या आपको मेहनत वाले काम करते हुए महसूस होगी. जैसे कि ज़्यादा देर तक पैदल चलना, दौड़ लगाना आदि. इन दोनों स्थितियों के अनुसार ही हम एंजायटी और दिल से जुड़ी बीमारियों में फ़र्क कर सकते हैं. जब जान का ख़तरा हो, तो ग़लती से भी यह मानकर ख़ुद को ख़तरे में न डालें कि यह केवल एंजायटी है. डॉक्टर ही सही जांच, जैसे- ईसीजी करके सही वजह बता सकते हैं.

हार्ट अटैक से बचने के लिए क्या करें?

- वॉक सबसे अच्छी एक्सरसाइज़ है. वॉक करते समय शुरू में गति को धीमा रखें और धीरे-धीरे अपनी स्पीड और वॉक के समय को बढ़ाते जाएं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए कम से कम 30 मिनट की वॉक को बेहतर बताया है. लेकिन ध्यान रखें कि ज़्यादा ठंड के मौसम में घर पर ही व्यायाम करें. - 30 साल से अधिक उम्र के लोगों को सर्दियों से पहले हेल्थ चेकअप कराना चाहिए. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर चेक करें.

- जिन मरीज़ों को पहले से हृदय संबंधी समस्याएं हैं, वे दवाओं की खुराक की समीक्षा करें और सर्दियों में फ्लू के टीके लगवाएं. यह संक्रमणों की गंभीरता को कम करेगा और आपातकालीन स्थितियों से बचाएगा.

- अगर आपको दिल की बीमारी है, तो ठंड के दिनों में घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है, ताकि अचानक विंटर स्ट्रोक से बचा जा सके.

- मरीज़ को सर्दी में अतिरिक्त गर्म कपड़ों से ढंक कर रखना चाहिए, ताकि ठंड के प्रभाव से रक्त वाहिकाएं संकुचित न हों.

- सर्दियों में ऑयली और फैटी फूड से बचें, क्योंकि इससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है, जो दिल के लिए हानिकारक होता है.

- अधिक फल, सब्ज़ियां और फाइबर युक्त आहार लें. ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन (जैसे मछली, अलसी के बीज) और अच्छे वसा का सेवन दिल के लिए लाभकारी होता है.

- अगर आप पहले से दिल की बीमारी या उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों और सलाह का पालन करें. सर्दियों में नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह लें और कोई भी असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.

- अपने खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव करें. कम मात्रा में नियमित अंतराल पर भोजन लें.

- वज़न पर कंट्रोल रखें.

- तनाव से दूर रहें.

- ठंड में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए पानी पीते रहें.

- हार्ट के मरीज इमर्जेंसी ड्रग्स, जैसे- एस्पिरिन, नाइट्रो ग्लिसरीन की गोली अपने पास रखें और ज़रूरत हो, तो उसका इस्तेमाल करें.

- शिखा जैन 

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