Close

विंटर केयरः कैसे बचें सर्दियों में होने वाले आई ड्राईनेस से? (Winter Care: How to Avoid Eye Dryness in Winters?)

सर्दियों के मौसम में हमें ऐसी कई समस्याएं घेर लेती हैं, जिन पर पहले कभी हमारा ध्यान ही नहीं जाता. इसी में से एक है आई ड्राईनेस यानी आंखों का सूखापन. विंटर में ठंड, शुष्क हवा व इंडोर हीटिंग के कारण ये समस्या अधिक बढ़ जाती है. इस संबंध में डॉ. सी. केतु ने हमें कई उपयोगी जानकारियां दीं.

आई ड्राईनेस के कारण

ठंड के दिनों में बाहर की हवाओं में नमी अधिक नहीं रहती, इस कारण आंखों में नमी कम होने लगती है. सर्दी में कमरों में हीटर भी ख़ूब चलता है. इससे हवा अधिक शुष्क हो जाती है. हम काम के सिलसिले में कहें या फिर मनोरंजन की ख़ातिर अधिक से अधिक समय मोबाइल फोन, टैब, लैपटॉप आदि पर बिताते हैं. इस दौरान आंखों की पलकें बहुत कम झपकती हैं, जो आंखों के सूखने का कारण भी बनती हैं. विंटर में हवा में मौजूद धूल, पेट्स की रूसी, एलर्जी होने से भी आंखें ड्राई होने लगती हैं. जब कभी आंखें अधिक सूखती हैं, तब शरीर अधिक पानी बनाता है, जिससे आंखों से अधिक पानी आने लगता है. जब आंखों में खुजली, जलन, भारीपन या लालिमा होने लगे, तब समझिए आई ड्राईनेस की समस्या हो रही है. इसके अलावा धुंधला दिखाई देने लगे या फिर फोटोफोबिया यानी रोशनी से भी परेशानी होने लगे, तब आई ड्राईनेस की प्रॉब्लम होने लगती है.

यह भी पढ़ें: आंखें बोलती हैं भविष्य की भाषा (Eyes speak the language of the future)

आई ड्राईनेस से बचने के लिए इन स्मार्ट ट्रिक्स पर ध्यान दें

- आंखों का सूखापन दूर करने के लिए बॉडी को हाइड्रेट रखना बेहद ज़रूरी है, इसलिए लिक्विड अधिक से अधिक लें, जैसे ख़ूब पानी पीएं. जूस व सूप लें.

- ह्यूमिडिफायर यानी नमी बढ़ाने वाले यंत्र का इस्तेमाल करें.

- अक्सर अधिक समय तक कंप्यूटर, लैपटॉप, टैब आदि पर काम करते रहने से हम पलकें अधिक नहीं झपकाते. दरअसल, डिजिटल गैजेट्स को घूरते रहने से पलकें बहुत कम ही झपकती हैं, इसी कारण आंखें सूखने भी लगती हैं. इस आई ड्राईनेस से बचने के लिए 20-20 का नियम अपनाएं. यानी हर बीस मिनट पर बीस सेकंड के लिए आंखें बंद कर लें.

- डॉक्टर को दिखाकर लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स जिसे आर्टिफिशियल टियर भी कहते हैं, का इस्तेमाल करें.  

- गुनगुने पानी में कपड़े को भिगोकर अच्छी तरह से निचोड़कर आंखों की सिंकाई करें.   - डायट में विटामिन ए, ओमेगा-3 फैटी एसिड, जो अखरोट, फिश में अधिक होता है लें. गाजर, एवोकाडो जैसे फ्रूट खाएं. - हर्बल टी या नींबू पानी लेना भी लाभदायक होता है.  

- घर व ऑफिस से बाहर जाते समय गॉगल्स, धूप का चश्मा पहनें.

- भरपूर सोएं यानी अच्छी नींद लें, कम से कम सात-आठ घंटे की. ऐसा करने से बचें

- आंखों को रगड़ने से बचें, इससे इंफेक्शन व जलन की समस्या बढ़ सकती है.  

- डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल अधिक न करें. - पंखे या हीटर की सीधी हवा आंखों पर न आए, इसका ख़्याल रखें.

- आंखों को गंदे हाथों से न छूएं.

- लगातार स्क्रीन पर देखने से बचें. थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर आंखों को आराम दें. इसके लिए अपने स्क्रीन टाइम पर 20-20-20 वाला फॉर्मूला भी अपनाएं. यानी हर बीस मिनट पर बीस सेकंड के लिए बीस फीट की दूरी पर किसी चीज़ को देखें.

यह भी पढ़ें: आंखों का फड़कना शकुन-अपशकुन नहीं, इन बीमारियों का संकेत (Is Eyes Twitching A Sign Of Disease?)

हेल्दी आई के लिए टॉप फूड्स

डेयरी प्रोडक्ट्स, संतरा, केला, पत्तेदार हरी सब्ज़ियां, फिश, बादाम और अंडा- ये आपकी आंखों के सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.  

इन्हें भी आज़माएं

- पलकें भारी होने लगे, सूजन सा हो जाए, तो ठंडे कपड़े, खीरे या टी बैग आंखों पर रखकर थोड़ी देर रिलैक्स करें.

- आंखों के नीचे काले घेरे हो गए हों, तो इसे कंसीलर से कम किया जा सकता है.

- आई केयर के लिए ऐसे आई क्रीम का उपयोग करें, जिसमें कैमोमाइल, कैफीन जैसे सूजन रोधी तत्व हों.  

हेल्दी रेटिना के होम टिप्स

- आंखों को नियमित रूप से धोएं.

- आई एक्सरसाइज़ करें, जिसमें ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं देखें. आंखों को गोल-गोल घुमाएं.

- तेज रोशनी व बहुत अधिक चकाचौंध देखने से बचेें. इससे आंखों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है.

यह भी पढ़ें: समीर वानखेड़े- सत्य परेशान हो सकता है, पर पराजित नहीं… कुछ ऐसी ही रही है उनकी लाइफ जर्नी भी! (Sameer Wankhede – Satya Pareshan Ho Sakta Hai, Par Paraajit Nahi… His life journey has been similar!)

रिसर्च

शोधों में यह पाया गया है कि विटामिन व मिनरल्स से भरपूर भोजन आंखों की सुरक्षा में मदद करते हैं. इसमें ख़ासतौर पर ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ई, जिंक, विटामिन सी, ज़ेक्सैंथिन, ल्यूटिन व बीटा कैरोटीन शामिल हैं.

एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि यदि शरीर में बी12 की कमी होने लगती है, तो आई ड्राईनेस के साथ-साथ आंखों में दर्द की परेशानी भी होने लगती है. इसलिए इस पहलू पर भी ध्यान दें.

- ऊषा गुप्ता

Share this article