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आज हम फिटनेस फ्रीक हैं, तो क्यों नहीं बीमारियों पर ब्रेक है? (Today we are fitness freaks, so why is there no break on diseases?)

आज की तारीख़ में फिटनेस न सिर्फ़ एक फैशन है, बल्कि ज़रूरत भी है. हममें से हर कोई फिट दिखना चाहता है, जी हां, फिट रहने से कहीं अधिक ज़रूरी लगता है फिट दिखना यानी ध्यान पूरा शरीर पर है, जबकि फिटनेस को लेकर अपने आपमें एक कम्पलीट सोच होनी चाहिए कि तन और मन दोनों फिट हों. यही वजह है कि फिटनेस फ्रीक होने के बाद भी आज यंग लोगों में कई गंभीर बीमारियां नज़र आती हैं. चलिए विस्तार से चर्चा करते हैं विषय पर.

फिटनेस फ्रीक

- देखने में आ रहा है कि कम उम्र में ही लोगों को हार्ट अटैक आने लगा है. इसी तरह से डायबिटीज़, किडनी-लिवर संबंधी बीमारियां, मेंटल हेल्थ इश्यूज़ युवाओं में काफ़ी बढ़ रही हैं.

- फिटनेस फ्रीक इस जनरेशन की सबसे बड़ी समस्या है अन्हेल्दी लाइफस्टाइल. न समय पर सोने का ठिकाना और न खाने का, तो ज़ाहिर है समस्या तो होगी ही.

- यंगस्टर्स में नशे की लत भी काफी बढ़ रही है. देर रात तक पार्टी करना, शराब, ड्रग्स को पहले शौक की तरह लेना और फिर इनकी गिरफ्त में आ जाना, ये युवाओं की बेहद गंभीर समस्या है.

- सोशल मीडिया और पीयर प्रेशर के चलते भी युवा ग़लत दिशा में बढ़ रहे हैं.

- आजकल लोग घर का बना खाना भी पसंद नहीं करते. फ़ोन की एक क्लिक पर मनचाहा जंक फूड घर बैठे आ जाता है, जो युवाओं को बहुत भाता है. लेकिन रोज़-रोज़ जंक फूड उनके शरीर के पोषण को कम करता जाता है.

- छोटी फैमिली और बिजी पैरेंट्स यंगस्टर्स को भटकाने की एक वजह है, क्योंकि पैरेंट्स बच्चों को टाइम और गाइडेंस दोनों ही नहीं दे पाते. बच्चों को भी आज़ादी मिल जाती है, तो शुरुआत में उन्हें सब अच्छा लगता है, लेकिन आगे चलकर उनमें अकेलापन, स्ट्रेस, डिप्रेशन का कारण भी बनता है.

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- आजकल जिम जाना भले ही एक फैशन या फिटनेस का प्रतीक बन गया हो, लेकिन दूसरी तरफ़ यह भी सच है कि जिम में घंटों पसीना बहानेवाली इस जनरेशन की फिज़िकल एक्टिविटी कम हो गई है, क्योंकि एक तो वो रेग्युलर जिम या एक्सरसाइज़ नहीं करते, दूसरे उनका स्क्रीन टाइम बहुत ज़्यादा होता है, बैठे-बैठे घंटों सोशल मीडिया पर वक़्त बिताते हैं.

- मेंटल हेल्थ की तरफ़ भी उनका ध्यान नहीं जाता क्योंकि योग या मेडिटेशन करने का टाइम उनके पास नहीं होता.

कौन-कौन-सी बीमारियां बढ़ रही हैं युवाओं में

- हार्ट डिसीज़ काफ़ी खतरनाक रूप से बढ़ रही है. युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. कभी वर्कआउट करते हुए अचानक अटैक आ जाता है, तो कभी हॉलिडे एंजॉय करने गए किसी युवा को स्ट्रोक आ जाता है. इस तरह की ख़बरें अब आम हो गई हैं.

- मोटापा यानी ओबेसिटी भी एक बड़ी समस्या है. जंक ़फूड और शारीरिक गतिविधियां कम होना इसकी वजह है.

- भारत तो जैसे डायबिटीज़ का गढ़ बनता जा रहा है. युवाओं में टाइप 2 डायबिटीज़ तेज़ी से बढ़ रही है.

- मेंटल हेल्थ इश्यूज़ भी इस जनरेशन की बड़ी समस्या है. बढ़ता कम्पटीशन, बढ़ता प्रेशर, अकेलापन- ये यंगस्टर्स को एंजाइटी, स्ट्रेस, डिप्रेशन जैसी समस्याओं का शिकार बनाता है.

फिटनेस फ्रीक

- बोन्स की कमज़ोरी आजकल आम हो गई है. कम उम्र में जोड़ों का दर्द, हाथ-पैरों में थकान और कमज़ोरी हर दूसरे व्यक्ति की समस्या हो गई.

- किडनी-लिवर की बीमारियां भी अनहेल्दी लाइफस्टाइल की देन हैं.

उपाय क्या है?

- उपाय बहुत ही आसान है- अनहेल्दी लाइफस्टाइल को हेल्दी बनाएं.

- नियमित व्यायाम करें, खासतौर से योगा और मेडिटेशन.

- जंक फूड कम करें और घर का बना हेल्दी खाना खाएं.

- पोषण पर ध्यान दें- हरी सब्जियां, नट्स, सीज़नल फ्रूट्स खाएं.

- हर चीज़ में संतुलन बनाए रखें. एक्सट्रीम में न जाएं.

- मेंटल हेल्थ पर बड़ों से बात करें. छुपाएं नहीं. - सोशल मीडिया पर टाइम कम स्पेंड करें और अपने पैरेंट्स के साथ फैमिली टाइम को महत्व दें.

- सिर्फ़ शरीर दिखने में फिट होना चाहिए ऐसा नहीं है, ओवर ऑल हेल्थ पर ध्यान दें.

- पैरेंट्स को भी चाहिए कि वो अपने बच्चों पर फोकस करें. आजकल पैरेंट्स ख़ुद ही सोशल मीडिया पर लगे रहते हैं. एक ही घर में रहते हुए भी सब अपने-अपने फ़ोन में बिज़ी रहते हैं, जो आगे चलकर नुक़सान पहुंचा सकता है.

- क्रैश डायट या बिना सलाह के डायट व एक्सरसाइज़ करने से बचें.

- इसी तरह बिना एक्सपर्ट की राय लिए बिना कोई हेल्थ सप्लीमेंट भी न लें, ये जानलेवा भी हो सकता है.

- बॉडी बनाने के लिए इंटरनेट से पढ़कर अपनी मर्ज़ी से प्रोटीन या कोई सप्लीमेंट न लें. नेचुरल तरीकों पर भरोसा रखें.

- फास्ट रिज़ल्ट के चक्कर में न पड़ें. किसी भी अच्छी चीज़ का कोई शॉर्ट कट नहीं होता. लाइफ को सिंपल रखें, मोटिवेटेड रहें, पॉजिटिव रहें, बहुत ज़्यादा दिखावे या ग्लैमर के चक्कर में न पड़ें, क्योंकि ये आगे चलकर भारी पड़ सकता है.

- ऐसा नहीं है कि आप अपने मन का कुछ न करें या लाइफ एंजॉय न करें, लेकिन जो करें सीमा और संतुलन बनाए रखते हुए करें.

- एक्सपेरिमेंट के चक्कर में न पड़ें, बुरी संगत से बचें.

- माना कि ये सब युवाओं को ज्ञान जैसा लगता है और सच है कि ज्ञान देना आसान है, लेकिन अपने शरीर की अगर आप रिस्पेक्ट करते हैं, तो उसे स्वस्थ बनाए रखने की कोशिश करना भी आपका ही काम है.

- गीता शर्मा 

फिटनेस फ्रीक

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