यह तो आपने सुना ही होगा कि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी, लेकिन कई बार सावधानी रखने पर भी एक पल की लापरवाही के चलते या फिर किसी दूसरे की ग़लती से हादसे हो जाते है. लेकिन परेशानी तब होती है जब हमें पता ही नहीं होता कि इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करना है. इस संबंध में जीवन बीमा करने वाले सुनील जैन से हर पहलू पर हमने बातचीत की. आइए जानें कि एक्सीडेंट हो जाए, तो क्या करें और कैसे करें.
एक्सीडेंट होने पर तत्काल उठाए जाने वाले कदम
रोड एक्सीडेंट (सड़क दुर्घटना) होने पर सबसे पहले शांत रहें और घबराएं नहीं. 2 मिनट आराम से बैठें और फिर सोचें कि करना क्या है. पैनिक करना किसी भी समस्या का हल नहीं है.
सुरक्षित स्थान पर रुकें
दुर्घटना के बाद गाड़ी को साइड में खड़ा करें. कई बार देखा जाता है कि अपनी ग़लती नहीं होने पर भी हम घबराकर मौ़के से भाग जाते हैं. इससे सामनेवाला आपको फंसा सकता है. इसलिए ग़लती किसी की भी हो, आप दुर्घटना के बाद गाड़ी को साइड में खड़ा करें. गाड़ी के इंडिकेटर चालू कर दें, ताकि पीछे से आनेवाले वाहन रुक सकें.
हैजर्ड लाइट करें ऑन
जब आपका एक्सीडेंट हो, तो उसके तुरंत बाद हैजर्ड लाइट्स ज़रूर ऑन कर दें. ऐसा करने से दूसरी गाड़ियों को ये पता लग सकेगा कि आपकी कार एक जगह पर खड़ी है. ऐसा करने से दूसरे लोग हादसे का शिकार नहीं होंगे.
पुलिस को बुलाएं
दुर्घटना होने पर तुरंत पुलिस को सुचना दें. मामूली दुर्घटनाओं में भी पुलिस को कॉल करें. इसके साथ ही किसी के घायल होने पर एंबुलेंस को भी सूचित करें. ऐसा करने से आपकी सूचना सही जगह पर पहुंच जाएगी. तुरंत 108 (एम्बुलेंस) या 112 (पुलिस) पर कॉल करें.
'हॉस्पिटल्स नियर मी’ सर्च करें
अगर आपको चोटें आई हैं और तुरंत इलाज की ज़रूरत है, तो यदि संभव हो तो अपनी गाड़ी से या राह चलते किसी राहगीर से लिफ्ट भी मांग सकते हैंं. यदि आपको नहीं पता कि कहां जाना है, तो गूगल में ’हॉस्पिटल्स नियर मी’ सर्च करें.
घायलों की मदद करें
घायलों की मदद करें, उन्हें सुरक्षित स्थान पर लाएं और प्राथमिक उपचार दें और एम्बुलेंस के लिए कॉल करें. अगर ज़्यादा ब्लीडिंग हो रही है तो उसे रोकने के लिए प्राथमिक उपचार करें. अगर किसी का खून बह रहा है, तो किसी साफ़ कपड़े से उस जगह को दबाकर रखें, ताकि खून रुक सके.
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गंभीर रूप से घायलों को न हिलाएं
अगर किसी को गर्दन, पीठ या सिर में गंभीर चोट लगी है, तो जब तक बहुत ज़रूरी न हो (जैसे गाड़ी में आग लगना), उन्हें उनकी जगह से न हिलाएं. ग़लत तरी़के से हिलाने से चोट और गंभीर हो सकती है.
जिससे टक्कर हुई है उसका नंबर नोट करें
यह बहुत ज़रूरी है कि जिस गाड़ी या जिस भी वहिकल से आपकी टक्कर हुई है, उसका नंबर नोट करें. घटना की तस्वीरें लें और गवाहों के नंबर लें. अगर मिल पाए, तो आप हादसे में इन्वॉल्व ड्राइवर का नाम, पता और फोन नंबर भी नोट करें, ताकि आप सामनेवाले के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए पुलिस को उसकी जानकारी दें सकें.
गवाहों की जानकारी
अगर आसपास लोग थे, जिन्होंने एक्सीडेंट देखा है, तो हो सके तो उनका नाम और नंबर ले लें.

फोटो और वीडियो बनाएं
हादसे वाली जगह का वीडियो बनाएं. साथ ही जिन गाड़ियों से टक्कर हुई है, उसके नंबर प्लेट और हादसे में शामिल लोगों की फोटो भी ज़रूर लें. इस तरह आप पुलिस या फिर इंश्योरेंस कंपनी को हादसे की सही स्थिति से अवगत करवा सकेंगे.
एफआईआर दर्ज़ कराएं
पुलिस के आने पर उन्हें सही-सही घटनाक्रम बताएं. अगर कोई घायल हुआ है या गाड़ी का बड़ा नुक़सान हुआ है, तो एफआईआर ज़रूर दर्ज़ कराएं.
बीमा कंपनी को सूचित करें
24 घंटे के अंदर अपनी बीमा कंपनी को सूचित करें. हादसे का रिलेवेंट डॉक्यूमेंटेशन हो, तो उसकी जानकारी भी इंश्योरेंस के साथ ज़रूर दें. जो आपने वीडियो और फोटो ली थी, उसे भी कंपनी के साथ शेयर करें.
क्या कहता है इंश्योरेंस?
अगर किसी ने 5 लाख का जीवन बीमा करवाया हो और अगर उस व्यक्ति की एक्सीडेंट से डेथ हो जाती है, तो उसका डबल 10 लाख का मुआवजा मिलेगा.

अगर सड़क दुर्घटना में जान चली गई है तो कम्पन्सेशन कैसे मिलेगा
अधिकतर मामलों में पीड़ित परिवार को ये पता ही नहीं होता है कि उनके किसी अपने की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई है, तो उन्हें कम्पन्सेशन यानी मुआवज़ा मिल सकता है. उन्हें लगता है हमारा तो बीमा नहीं था या फिर हम कैसे साबित करेंगे कि दुर्घटना में हमारी ग़लती नहीं थी. ये सब सोचकर वे चाहते हुए भी कम्पन्सेशन के लिए अप्लाई नहीं कर पाते हैं. जबकि आपको ऐसा कुछ साबित करने की भी ज़रूरत नहीं होती है.
हिट एंड रन केस, कैसे मिलेगा कम्पन्सेशन
2022 में सरकार के द्वारा सोलिसियम स्कीम नामक एक योजना बनाई गई थी, जो हिट एंड रन मामलों के लिए है. जब कोई ड्राइवर दुर्घटना के बाद फरार हो जाए और उसकी पहचान न हो सके, तो उसे हिट एंड रन केस माना जाता है. ऐसे मामलों में सरकार की ओर से सीधी आर्थिक सहायता दी जाती है, जैसे- अगर व्यक्ति की डेथ हो जाती है तो उसे लगभग 2,00,000 तक की सहायता दी जा सकती है. अगर जान बच जाती है, लेकिन गंभीर चोट है, तो लगभग 50,000 रुपए तक की मदद मिल जाती है. यह राशि मोटर वहिकल एक्सीडेंट फंड से दी जाती है और सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होती है.
मोटर वाहन अधिनियम, 1988
यह क़ानून पीड़ित लोगों या उसके परिवार को कम्पन्सेशन दिलाने में मदद करता है. इस कानून में दो मुख्य नियम हैं, जिन्हें धारा 163- और धारा 166 कहते हैं.
धारा 163- नो फॉल्ट क्लेम
जैसे कि इसके नाम से ही पता चलता है इसमें आपको यह साबित करने की ज़रूरत नहीं है कि दुर्घटना किसकी ग़लती से हुई है और कैसे हुई है. बस इस नियम के तहत परिवार को कम्पन्सेशन मिल सकता है. इसे नो फॉल्ट क्लेम कहते हैं यानी बिना ग़लती साबित किए कम्पन्सेशन. इससे उन लोगों को काफ़ी मदद मिल जाती है, जिनके लिए हादसे की कोई भी जानकारी इकट्ठा कर पाना मुश्किल होता है.
धारा 166 फॉल्ट बेस्ड क्लेम
इसमें कम्पन्सेशन तभी मिलता है जब यह साबित हो जाए कि दुर्घटना आपकी ग़लती से नहीं, बल्कि सामनेवाले की ग़लती से हुई है. जैसे- अगर कोई रॉन्ग साइड से आ रहा था, कोई तेज़ स्पीड में गाड़ी चला रहा था, कोई शराब या किसी नशे में गाड़ी चला रहा था और उसकी वजह से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो अदालत में यह साबित करने पर कि वह ड्राइवर ग़लत था, परिवार को मुआवजा मिल सकता है. इसके अलावा यदि वाहन बीमा किया हुआ है, तो थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के ज़रिए भी मुआवजा लिया जा सकता है.
ख़ुद करें क्लेम?
मोटर वहिकल एक्ट की धारा 166 के तहत 10 रुपए के कोर्ट फीस टिकटों पर क्लेम के लिए आवेदन किया जा सकता है. यह क्लेम सड़क हादसे के छह महीने के भीतर करना होता है.
क्लेम के लिए क्या डॉक्यूमेंट ज़रूरी है?
रोड एक्सीडेंट में क्लेम लेने के लिए अप्लाई कर रहे हैं, तो कुछ डॉक्यूमेंट्स लगाने ज़रूरी होते हैं. इनके बिना क्लेम अटक सकता है.
- पुलिस की एफआईआर की कॉपी
- अगर डेथ हो गई है तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट
- घायल है तो मेडिकल रिपोर्ट
- पहचान पत्र व बैंक डिटेल्स
क्या इसके लिए किसी वकील को हायर करना पड़ेगा?
भारत में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (चेींेी रललळवशपीं उश्ररळाी ढीळर्लीपरश्र, च-उढ) नाम की विशेष अदालतें हैं. ये अदालतें सड़क हादसों से जुड़े मुआवजे के मामलों को देखती हैं. परिवार इस अदालत में जाकर मुआवजे के लिए दावा कर सकता है. दावा उस जिले में दायर किया जा सकता है, जहां हादसा हुआ था या जहां परिवार रहता है.
अगर परिवार के पास वकील रखने के पैसे नहीं हैं, तो सरकारी लीगल सेल या कुछ गैर सरकारी संगठन मुफ़्त में मदद करते हैं. ये संगठन दावा दायर करने और काग़ज़ी कार्रवाई में सहायता करते हैं. च-उढ मामले की जांच करता है और अगर दावा सही पाया जाता है, तो वह बीमा कंपनी या सरकार को मुआवजा देने का आदेश देता है.
सड़क दुर्घटनाओं पर क्या कहता है ‘गुड सेमेरिटन लॉ’?
कई बार हम घायलों की मदद करने से कतराते है, क्योंकि हमें लगता है कि बेकार क्या पुलिस के चक्करों में पड़ना. हर साल सड़क दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान स़िर्फ इसलिए चली जाती है, क्योंकि लोग पुलिस और अदालती पचड़ों के डर से घायलों की मदद करने से कतराते हैं. इसी डर को ख़त्म करने और घायलों की तुरंत मदद सुनिश्चित करने के लिए ’गुड समेरिटन क़ानून’ लागू किया गया. इसका मतलब है कि अगर आप किसी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करते हैं या उसे अस्पताल पहुंचाते हैं, तो पुलिस आपको परेशान नहीं कर सकती और न ही आपसे बार-बार पूछताछ की जाएगी, इसलिए मदद करने से न हिचकिचाएं.
गुड समेरिटन के तहत आपके राइट्स क्या हैं?
अपनी आइडेंटिटी प्राइवेट रखने का राइट है
अगर आप नहीं चाहते हैं, तो पुलिस या हॉस्पिटल आपको अपना नाम, पता या फोन नंबर देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. फॉर्म में अपनी जानकारी भरना पूरी तरह से आपकी मर्ज़ी पर निर्भर है.
पुलिस आपको तंग नहीं करेगी
अगर आप किसी घायल को अस्पताल पहुंचाते हैं, तो पुलिस आपको रोककर नहीं रख सकती और न ही आपको पुलिस स्टेशन आने के लिए मजबूर कर सकती है. आप घायल को अस्पताल में छोड़कर तुरंत जा सकते हैं.
आप ना चाहें तो हॉस्पिटल की फीस भरने को मजबूर नहीं कर सकते
कोई भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल घायल व्यक्ति का इलाज शुरू करने के लिए आपसे (मददगार से) रजिस्ट्रेशन फीस या इलाज के पैसे नहीं मांग सकता. अस्पताल को तुरंत इलाज शुरू करना ही होगा.
गवाह बनने के लिए कोई दबाव नहीं
अगर आप दुर्घटना के चश्मदीद गवाह हैं और स्वेच्छा से गवाही देना चाहते हैं, तो पुलिस को आपसे केवल एक बार आपके बताए गए समय और स्थान पर ही पूछताछ करनी होगी. आपको बार-बार कोर्ट या पुलिस स्टेशन के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
गुड समेरिटन अवॉर्ड स्कीम
अगर कोई मददगार किसी घायल को दुर्घटना के ’गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के तुरंत बाद का वह पहला एक घंटा जिसमें जान बचने की संभावना सबसे अधिक होती है) के भीतर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाता है, तो सरकार उसे 5,000 का नकद इनाम और एक प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करती है.
- शिखा जैन

