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7 साल की उम्र में पिता ने दिल्ली की सड़क पर छोड़ा, भूख लगी तो एक ब्रेड खाने और 10 रुपए के लिए सहा कई बार रेप का दर्द, रुला देगी ट्रांसजेन्डर कृष्णा मोहिनी की कहानी (Abandoned on the Streets at 7… Raped multiple times just for a piece of bread, transgender Krishna Mohini’s Story Will Shake You)

एक छोटी सी बच्ची, जिसे 7 साल की उम्र में दिल्ली की सड़कों पर छोड़ दिया गया, क्योंकि वो ट्रांसजेन्डर (Transgender) थी.  भूखे सोई, फूल बेचे, सड़कों पर कई बार रेप हुआ, लेकिन कृष्णा मोहिनी ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने ठोकरों को ताकत बनाया और दुनिया के सामने ताली बजाई नहीं, बल्कि अपना डांसिंग हुनर दिखा कर लोगों से ताली बजवाई. 

Transgender Krishna Mohini

यह है कृष्णा मोहिनी (Krishna Mohini) की कहानी, फूल बेचने से लेकर ट्रेनों में नाचने तक का दर्द, संघर्ष और हिम्मत से भरी उनकी इंस्पायरिंग जर्नी जानने के लिए देखें मेरी सहेली का ये पॉडकास्ट. नीचे दिए गए लिंक पर अभी क्लिक करें.

ये कहानी पहचान की नहीं है… ये कहानी उस समाज की है, जो इंसान को इंसान मानने से पहले उसका जेंडर पूछता है. कृष्णा मोहिनी की कहानी किसी एक इंसान की नहीं — ये उस समाज का आईना है, जो ताली तो बजाता है, लेकिन गले लगाने से डरता है. कृष्णा मोहिनी जी एक ट्रांसजेंडर हैं, लेकिन अपने जज़्बे, अपने हौसले, अपने टैलेंट से इन्होंने एक अलग पहचान बनाई है.

Transgender Krishna Mohini

कृष्णा की कहानी शुरू होती है एक ऐसे परिवार से जहां जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ. एक बेटा और दूसरी संतान कृष्णा, जो थोड़ी बड़ी हुईं तो पता चला कि वो सामान्य बच्ची नहीं हैं. ट्रांसजेंडर हैं. वो 7 साल की थीं जब उनके पिता गुड़िया दिलाने के बहाने उन्हें बाहर ले गए और दिल्ली की सड़कों पर छोड़कर गायब हो गए. "मैं काफी देर तक पापा पापा चिल्लाती रही, लेकिन पापा नहीं आए. भूख लगी तो मां की याद आने लगी, लेकिन मां भी नहीं थी आसपास. मैं रोती रही. 7 साल की बच्ची और कर भी क्या सकती थी. मुझे तो ये भी नहीं पता था कि मेरे पापा ने ऐसा क्यों किया." 

Transgender Krishna Mohini

कृष्णा सड़क पर ही पलने लगीं. "कभी फूल बेचा, तो कभी कुछ और. 7 साल की उम्र थी, लोगों ने रेप भी किया. भूख लगती थी तो लोग एक ब्रेड दिखाते थे, और ब्रेड देने से पहले बलात्कार करते थे. और ऐसा करनेवाले कोई छोटे मोटे लोग नहीं थे. 20 फ्लोर के टावर से लेकर झोपड़ी में रहनेवाले लोग तक थे, जो कार में आते थे, खाने का लालच देकर कार में बिठाते थे. गंदी हरकतें करते थे और बदले में खाने के लिए कुछ या 10 रुपये दे देते थे. इतनी समझ नहीं थी मुझे कि लोग मेरे साथ गलत कर रहे हैं, मुझे बस खाने के लिए कुछ मिल जाता, उसी में खुश हो जाती." कृष्णा ने बताया कि सड़क पर रहने और पलने वाले हर बच्चे के साथ यही होता है. उनको लोग इंसान नहीं समझते. अपनी प्रॉपर्टी समझते हैं.

Transgender Krishna Mohini

कृष्णा ने बताया कि जब वो बड़ी हुईं तो उन्हें किन्नर समाज को सौंप दिया गया." वहां ताली बजाकर कभी कोई एक-दो रुपए देता तो कभी 5-10 रुपए. इतने में गुजारा करना मुश्किल था. इसलिए मैं धंधा करने लगी. प्रॉस्टिट्यूशन करने लगी. लेकिन मुझे ऐसी ज़िंदगी नहीं जीनी थी. मुझे कुछ और करना था. मुझे डांस करने का शौक था. तो मैंने मुम्बई की लोकल ट्रेनों में डांस करना शुरू किया. ट्रेन में लेडीज लोगों ने मेरा डांस वीडियो बनाना शुरू किया और मुझसे कहा आप इसे सोशल मीडिया पर डालो. धीरे धीरे मैं सोशल मीडिया और पॉपुलर होने लगी. ज़िंदगी पूरी तो नहीं बदली, लेकिन बहुत बदल गई है."

Transgender Krishna Mohini

कृष्णा अब किन्नर समाज के लिए भी कुछ करना चाहती हैं. वो कहती हैं लोग उन्हें पैसे भले मत दें, लेकिन अपनी तरह इंसान तो समझें. वो कहती हैं कि किन्नर भी तो मां की कोख से ही पैदा होते हैं न तो उन्हें भी मां की गोद में रहने का हक है और समाज ऐसे बच्चों से उनका हक न छीने, ताकि वो भी आम बच्चों की तरह स्कूल जा सकें, अपनी फैमिली के बीच पल-बढ़ सकें, एक नॉर्मल लाइफ जी सकें.

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