इन्फ्लुएंसर सिर्फ़ एक शब्द नहीं, बल्कि एक नई पहचान है. सोशल मीडिया की चमक-दमक के पीछे छुपी होती है मेहनत, संघर्ष, असफलताएं और वो जुनून, जो किसी को भीड़ से अलग बनाता है. हमारे इस ख़ास कॉलम में हर महीने हम मिलेंगे ऐसे ही इन्फ्लुएंसर्स से, जो अपनी कहानी ख़ुद लिख रहे हैं. यह सिर्फ़ उनकी सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि एक सफ़र है- सपनों से हक़ीक़त तक का.

मानव मंगलानी ने अपनी कड़ी मेहनत और काम के जुनून के बलबूते आज इस फील्ड की भीड़ में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. जी हां, मानव मंगलानी किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं. पिछले 26 सालों से वे लगातार काम करते आ रहे हैं. काम के प्रति उनका समर्पण ही उन्हें आज इस मुक़ाम पर ले आया है कि वे सितारों के भी चहेते बन गए हैं.
लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था. करियर की शुरुआत में काफ़ी संघर्ष करना पड़ा. उन्होेंने वासु भगनानी की वेबसाइट डिज़ाइनिंग के प्रोजेक्ट में अपना हुनर दिखाया. धीरे-धीरे उनके बेहतरीन काम की तारीफ़ होने लगी, जहां लोगों ने प्रशंसा की, वहीं स्टार्स भी प्रभावित हो उनके साथ जुड़ते गए.

मानव जी में काम का जुनून इस कदर रहा कि कभी-कभी ख़ास ब्रेकिंग स्टोरी के लिए घंटों इंतज़ार भी करना पड़ा तो वे हिचकिचाए नहीं. उनके अनुसार, सलमान खान और शाहरुख खान के दोबारा साथ आने की रीयूनियन की तस्वीर लेने की ख़ातिर सात-आठ घंटे तक के इंतज़ार को भी उन्होंने धैर्य के साथ सहजता से लिया और वेट करते रहे. और उसका रिजल्ट इतना सुखद रहा कि क्या कहने. शाहरुख-सलमान के साथ की वो फोटो देखते ही देखते वायरल हो गई. हर किसी ने इसे हाथोंहाथ लिया.
मानवजी का मानना है कि पहले की बात और थी, पर आज पैपराजी कल्चर में स्टार्स और पैप्स दोनों एक-दूसरे के पूरक बन रहे हैं. इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि दोनों को ही एक-दूसरे की ज़रूरत पड़ती है. मंगलानी जी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं- यूं तो सभी कलाकार अच्छे होते हैं, परंतु कुछ स्थिति-परिस्थितियों की वजह से थोड़े बदल भी जाते हैं जैसे कि शाहरुख खान.

बेटे आर्यन खान के केस के बाद उनमें बहुत बदलाव आया. जहां पहले वे हमेशा पोज़ देने के लिए तैयार रहते थे, वहीं अब वे पैप्स से बचते फिरते हैं. या फिर उनका मूड होता है तो क्लिक करवाते हैं, वरना नौ दो ग्यारह हो जाते हैं. अम्ब्रैला ट्रेंड शाहरुख की ही देन है. वे लंबे समय तक सार्वजनिक स्थानों पर छतरी या शील्ड की आड़ में पैप्स से बचने की कोशिश करते रहे हैं. मुंबई के बाहर तो वे कुछ दरियादिली दिखा भी देते हैं, परंतु मुंबई में तो एयरपोर्ट पर भी उनकी चलते-फिरते ही फोटोज़ ले पाते हैं हम.

मेरे यादगार लम्हों में से अभिषेक बच्चन-ऐश्वर्या की बेटी आराध्या की पहली तस्वीर थी, आलिया-रणबीर कपूर की राहा का पहला फोटो, सैफ-करीना के तैमूर का पहला लुक ख़ास रहा है.

रणबीर कपूर की ‘संजू’ मूवी में उनके संजय दत्त का लुक क्लिक करना यादगार अनुभव रहा.
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हां एक बात और आमिर खान जब ‘दंगल’ फिल्म कर रहे थे, तब उन्होंने अपना वज़न काफ़ी बढ़ाया था और पब्लिकली आने से बच रहे थे. लेकिन हमने डोमेस्टिक एयरपोर्ट पर उन्हें ढूंढ़ ही निकाला और उनके उस बेहतरीन लुक को कैमरे में क़ैद करना बेहद सुखद व संतुष्टिभरा रहा.

चाहे कोई भी फील्ड हो, कामयाबी के लिए मेहनत और जुनून का होना बेहद ज़रूरी है. मैं न्यूकमर से यही कहना चाहूंगा कि आपको लगातार पूरी लगन से काम करते रहना है. इससे न केवल आप आगे बढ़ते जाएंगे, बल्कि सफलता भी आपके कदम चूमेगी.
- ऊषा गुप्ता

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