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रिश्तों में दूरियां ला रहे हैं डिजिटल टूल्स (Digital tools are creating distance in relationships)

स्मार्ट फोन, सोशल मीडिया आज हमारी ज़िंदगी का अहम् हिस्सा बन गए है. काम से लेकर टाइमपास, मनोरंजन और सोशल कनेक्शन तक, हर चीज़ मोबाइल पर सिमट चुकी है. लेकिन इसी डिजिटल दुनिया की लत अब रिश्तों को धीरे-धीरे खोखला कर रही है. आइए, जानें ये डिजिटल टूल्स कैसे रिश्तों में दूरियां ला रहे हैं?

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कपल्स हर बात सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, तो कैसे इससे रिश्ते की नींव कमज़ोर होती है...

छोटी सी पर्सनल प्रॉब्लम बड़ी हो जाती है
अगर पति-पत्नी में किसी बात को लेकर कोई विवाद हो जाता है, तो वह बातचीत के ज़रिए सुलझ सकता है. लेकिन जब एक पार्टनर के द्वारा वह विवाद सोशल मीडिया पर डाल दिया जाता है और वह पब्लिक हो जाता है, तो उस पर आए हुए कमेंट्स और लोगों की बेफ़िजूल की राय से बात बनने की बजाय ईगो पर चली जाती है और रिश्ता टूटने के कगार पर पहुंच जाता है.

बजट बिगाड़ते हैं डिजिटल टूल्स
आजकल सोशल मीडिया पर नए-नए फोटो डालने का चलन है और उसके लिए हर बार नई ड्रेस का होना भी ज़रूरी है. ऐसे में लोग हर छोटे से छोटे मौ़के या त्योहार के लिए भी कुछ नई ड्रेसेस या ऐक्सेसरीज़ ख़रीदने में जुटे रहते हैं. ज़ाहिर है कि इससे आपका बजट तो बिगड़ेगा ही. इसलिए भी ज़रूरी है कि इस मार्केट गिमिक से बचा जाए और डिजिटल डिटॉक्स किया जाए, इससे फ़िज़ूलख़र्ची बचेगी.

पर्सनल फोटो शेयर करना पार्टनर को पसंद नहीं आता
कपल्स अपने हॉलिडे या हैप्पी मोमेंट्स की तस्वीरें शेयर करते हैं. इसमें कोई बुराई भी नहीं है. लेकिन कई बार लोग अपने लाइक्स व व्यूज़ बढ़ाने के चक्कर में कुछ कोजी मोमेंट्स की तस्वीरें भी शेयर कर देते हैं. ये तस्वीरें काफ़ी निजी होती हैं और पार्टनर को यह बात अच्छी नहीं लगती, तो इस बात को लेकर उनमें तनाव बढ़ जाता है. हो सकता है कि इससे आपके पार्टनर को शर्मिन्दगी का एहसास हो या फिर उन्हें ऐसा लगने लगे कि आपको उनकी इज़्ज़त की कोई परवाह नहीं है. कभी-कभी उन पर्सनल तस्वीरों का लोग ग़लत तरी़के से इस्तेमाल भी कर लेते हैं, जिससे आपको बाद में काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

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ब्रेकअप की बात शेयर करने में जल्दबाज़ी रिश्ता तोड़ देती है
हर बात सोशल मिडिया पर शेयर करते-करते हम यह भी भूल जाते हैं कि हर बात मज़ाक नहीं होती. अगर दोनों के बीच लड़ाई चल रही है, तो इसे सार्वजानिक करना ज़रूरी तो नहीं है. ब्रेकअप एक बहुत बड़ा डिसिजन होता है और उस स्थिति में आपके मन में भावनात्मक उथल-पुथल चलती है. यह भी संभव है कि ब्रेकअप के बाद आपका पैचअप भी हो जाए. लेकिन घर से निकली बात जब बाहर पहुंच जाती है, तो फिर उसे संभालना नामुमकिन हो जाता है.

घूमने जाना मतलब फोटो शूट करना रह गया है अब
इन दिनों आपका ट्रैवलिंग डेस्टिनेशन भी वही होता है, जिसके बारे में आपने सोशल मीडिया पर सबसे ज़्यादा रील्स देखे हों या किसी ब्लॉगर ने सलाह दी हो. आप भी उनकी तरह ही फैशनेबल ड्रेसेस लेकर, उन्हीं स्पॉट्स पर जाते हैं, रील्स बनाते हैं, हज़ारों फोटोज़ और सेल्फ़ीज़ लेकर लौट आते हैं. फिर फैंसी कैप्शन लिख कर जब आप उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, तो लोग वाह-वाह करते नहीं थकते और आप हैश टैग करते नहीं थकते. ऐसे में आपको यह एहसास ही नहीं होता कि किसी पहाड़ी इलाके की सुबह की धूप में जो सुकून है, झरनों की आवाज़ में जो खनक है, रेगिस्तान की लोक गीतों की जो ख़ुशबू है, सागर किनारे चैन से दो पल बैठने में जो रूमानियत और रूहानियत है, वह कभी तस्वीरों में कैद हो ही नहीं सकती. इसलिए जब आप कोई भी ट्रैवेल प्लान कर रहे हैं, तो वहां जाकर स़िर्फ कैमरे की दुनिया में ही लीन मत रहें. नई चीज़ों को देखें, एक्सप्लोर करें. वहां होने को महसूस करें. अपने परिवार के साथ गए हैं, तो वहां के स्पोर्ट्स का मज़ा लें, एक-दूसरे के साथ नेचुरल ब्यूटी में खेलें, अपने जीवनसाथी या पार्टनर के साथ गए हैं, तो उनके साथ कुछ नहीं बस सुकून के पलों को एंजॉय करके देखें.

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पर्सनल चैट शेयर करना मुसीबत बन सकता है
आजकल अपनी पर्सनल चैट या वीडियो शेयर करने का भी चलन बन गया है. यहां तक के लोग अपनी लड़ाई और प्यार के निजी पल को भी शेयर करने से बाज नहीं आते. इससे सामाजिक रूप से कई बार लोग उस परिवार का बहिष्कार भी करते हैं कि इनके परिवार की तो कोई इज़्ज़त नहीं है. इनके घर में तो इतने लड़ाई-झगड़े होते हैं. इससे कई बार बच्चों की शादियां और सोशल सर्कल बनाने में भी द़िक्क़त होती है. पर्सनल चैट का कोई ग़लत फ़ायदा भी उठा सकता है.

भरपूर नींद तक को तरस गए है हम
बिस्तर पर जाने के बाद भी घंटों हम मोबाइल में लगे रहते हैं. रील्स देखते-देखते पता ही नहीं चलता कब घंटों बीत गए और सोने का टाइम कम हो गया. फिर सुबह आंख नहीं खुलती और पूरे दिन का रूटीन बिगड़ जाता है. अपनी पत्नी के साथ सुबह की सुकून भरी चाय का आनंद भी हड़बड़ी में निकल जाता है और सेहत से जुड़ी कई समस्याएं, जैसे- आंखों के नीचे काले घेरे आना, हार्मोन्स असंतुलित होना, सिरदर्द आदि समस्याएं होने लगती हैं. इससे किसी काम में मन नहीं लगता और चिड़चिड़ाहट साथी पर निकलती है, जो रिश्तों में दूरियां पैदा करती है.

पति-पत्नी के रिश्तों पर पड़ रहा असर
स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स की लत किसी नशे की लत की तरह लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित कर रही है. इसका सबसे बुरा असर पति-पत्नी के रिश्तों पर पड़ रहा है. डिजिटल लत के कारण पति-पत्नी के बीच संवाद के कम होने से रिश्ते खालीपन से भर गए हैं. उनके बीच भावनात्मक और शारीरिक दूरी बढ़ी है. उनके बीच क्वालिटी टाइम की जगह डिवाइस ने ले ली है, जिससे पति-पत्नी का रिश्ता कमज़ोर पड़ता जा रहा है. एक-दूसरे के प्रति प्रेम और विश्‍वास की जगह बेवजह के शक, झगड़े एवं तनाव ने ले ली है.

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इसका हल है डिजिटल डिटॉक्स
अक्सर देखा जाता है कि साथ बैठकर भी दोनों पार्टनर अपने-अपने फोन में बिज़ी रहते हैं. बातचीत कम होती जा रही है, भावनात्मक जुड़ाव कमज़ोर पड़ रहा है. ऐसे में डिजिटल डिटॉक्स यानी कुछ समय के लिए फोन और स्क्रीन से दूरी बनाना, रिश्तों को फिर से मज़बूत बनाने का असरदार तरीक़ा बन सकता है. डिजिटल डिटॉक्स का मतलब है कि कुछ निश्‍चित समय के लिए आप अपने तमाम डिजिटल गैजेट्स, जैसे- फोन, कंप्यूटर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यहां तक कि टीवी से भी दूरी बनाएं. इसका उद्देश्य तकनीक को पूरी तरह छोड़ना नहीं, बल्कि उसका संतुलित इस्तेमाल सीखना है, ताकि असली ज़िंदगी और रिश्तों पर फोकस किया जा सके. दिन का एक निश्‍चित समय ऐसा रखें जब घर का कोई भी सदस्य फोन का इस्तेमाल न करें.

घर में नो-फोन ज़ोन बनाएं
- खाने की मेज और बेडरूम में फोन का इस्तेमाल न करें. इससे वहां आप दोनों एक-दूसरे के साथ कुछ समय के लिए जुड़ पाएंगे और आप दोनों के बीच कोई नहीं होगा.
- किसी के जन्मदिन पर स़िर्फ स्टेटस लगाने या व्हाट्सएप करने की बजाय, कोशिश करें कि उन्हें कॉल करें या उनसे मिलें.
- डिजिटल विश कुछ सेकंड में भूल जाती है, लेकिन एक मुलाक़ात या लंबी कॉल याद रहती है.
- पति-पत्नी को चाहिए कि बिना फोन लिए साथ में 15 मिनट की सैर पर जाएं. इससे दोनों को साथ में क्वालिटी टाइम बिताने का मौक़ा मिलेगा.
- शिखा जैन

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