
- फिल्म इंडस्ट्री को लेकर इन दिनों कई विवाद चल रहे हैं. मैं तो सोचता हूं कि यहां कहीं न कहीं फिल्मी लोगों व ऑडियंस के बीच सही तालमेल न होने के कारण समस्याएं आ रही हैं.
- नब्बे के दशक में मुझे मुंबई के अंडरवर्ल्ड की धमकियों के बहुत सारे फोन आते रहे हैं. लेकिन मैंने डरने व परेशान होने की बजाय उसका डटकर सामना किया.
- कारगिल के दिनों को याद करते हुए गर्व के साथ घायल व शहीद फौजियों को देख आंखें भर आती हैं. जब मैं उनसे मिलने मेकशिफ्ट हॉस्पिटल गया था, तब घायल सैनिकों को देखकर तो रो पड़ा था.
- आज जिस तरह फिल्मों की हालत हो रही है, उससे कलाकार थोड़े सहमे हुए हैं. बॉक्स ऑफिस के प्रतिकूल प्रदर्शन ने उन्हें परेशान कर दिया है. मेरे ख़्याल से यदि हम मल्टी स्टारर फिल्में बनाने पर अधिक ध्यान दें, तो स्थिति अच्छी हो सकती है.
- भाषा को लेकर राजनीति मुझे कभी रास नहीं आई. मुंबई में मराठी सीखने व बोलने पर मुझे कोई द़िक्क़त नहीं है. लेकिन यह दिल से और सम्मान के साथ होनी चाहिए, न कि प्रेशर देकर या ज़बर्दस्ती.
- अपने दामाद (के. एल. राहुल) का क्रिकेट में परफॉर्मेंस देखकर ख़ुशी होती है. लेकिन टेंशन के कारण मैं उनका लाइव मैच देखने से बचता हूं. राहुल एक डिसिप्लीन वाले हंबल पर्सनैलिटी हैं.

- फिल्म इंडस्ट्री का यह रवैया मुझे कभी भी पसंद नहीं आया कि न्यूकमर्स की फिल्में फ्लॉप होने पर उन्हें इनकरेज करने की बजाय उनकी आलोचना करना शुरू कर देते हैं.
- अहान (बेटा) को लेकर भी एक अनकहा डर बना रहता है, जो उसकी सफलता से कम असफलता को लेकर अधिक रहता है.

- क्या आप मानेंगे कि माना (पत्नी) से शादी करने के लिए मुझे फैमिली को क़रीब नौ साल तक मनाना पड़ा. दरअसल, हम दोनों अलग समुदाय के थे और परिवार शादी के विरुद्ध था.
- एक और मज़ेदार बात आपको बताता हूं कि मैंने अपनी पहली फिल्म ‘बलवान’ के रिलीज़ से पहले ही क़रीब 40 फिल्में साइन कर ली थीं.
- वेलकम टू द जंगल, हेरा फेरी 3 और शेर जैसी फिल्मों में काम करने में बहुत मज़ा आया और ये लोगों को भी ख़ूब पसंद आएगा.
- ऊषा गुप्ता

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