“अब कैसा फील कर रहे हैं आप?” यह आवाज़ सुनकर तो मेरे दिल की धड़कन और तेज़ हो गई. कंपकंपाते स्वर में बोला, “मोहिनी तुम?”
ट्रेन की खिड़की से गुज़रने लगे जब तेरे शहर से... वो स्कूल... वो प्यारी बातें... हाथों में हाथ... स्कूल की कैंटीन... और वह आख़िरी मुलाक़ात... सभी एक लम्हे में आंखों के सामने एक चलचित्र की तरह सामने आ गया.
कितना प्यारा नाम था तुम्हारा- मोहिनी यानी मन को मोहने वाली और मैं तुम पर मोहित होने वाला यानी मेरा नाम मोहित. हम दोनों शहर के कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते थे. तुम शहर के नामी गिरामी डॉक्टर दंपति की बेटी थीं और मैं बैंककर्मी का बेटा. हम दोनों ही किशोरावस्था में थे और एक-दूसरे के प्रति आकर्षित थे.
तुम्हारा भविष्य तुम्हें पता था कि तुम्हें डॉक्टर ही बनना है, लेकिन मुझे कुछ बनना है यह तो पता था, परंतु डॉक्टर नहीं बनना यह तय था, क्योंकि मैं किसी की तबियत ख़राब देखकर या इंजेक्शन लगते देखकर ही घबरा जाता था तो डॉक्टर कैसे बनता?
10वीं के बाद जब विषय चुनने की बारी आई तो तुमने बेझिझक बायोलॉजी ली और मैंने मैथ.
“मेरी ख़ातिर डॉक्टर बन जाओ ना मोहित?” तुमने बच्चों की तरह मनुहार किया था.
“मेरा दिल बहुत कमज़ोर है. मैं नहीं बन सकता डॉक्टर.” मैंने दिल पर हाथ रखकर कहा था.
“तुम्हारे दिल को संभाल लूंगी मैं. फ़िक्र ना करो.” तुमने मेरे दिल पर हाथ फेरते हुए बेहद रोमांटिक अंदाज़ में कहा था.
“क्या फ़र्क़ पड़ता है तुम्हें मेरे डॉक्टर ना बनने पर. हमारे प्यार में कमी थोड़ी आ जाएगी.”
“बात प्यार में कमी की नहीं है मोहित, बस पापा-मम्मी की शर्त यही है कि डॉक्टर से ही शादी करनी है चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो, क्योंकि पापा-मम्मी डॉक्टर हैं और मैं उनकी इकलौती संतान. भविष्य में मुझे और उनके भावी दामाद को उनके नर्सिंग होम को संभालना है.” मेरे हाथों को अपने हाथों में लेकर तुमने कहा था.
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“सॉरी मोहिनी, यह नहीं हो सकता. अव्वल तो मैं डॉक्टर ही नहीं बनना चाहता. दूसरे मेरे मम्मी-पापा भी यह नहीं चाहेंगे कि मैं घर जमाई बनूं, क्योंकि मैं भी अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूं.” मैंने भी तुम्हें तुरंत जवाब दिया था.
बस यही आख़िरी मुलाक़ात थी हमारी. तुमने स़िर्फ इतना कहा था, “मोहित, तुम्हारा दिल मेरी अमानत है. उसे हर हाल में संभालूंगी. मैं उसकी हिफ़ाजत करूंगी हमेशा...”
फिर हमारी राहें अलग-अलग हो गईं. कुछ महीने बाद ही तुम्हारे शहर से मेरे पापा का ट्रांसफर भी हो गया.
समय के साथ मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन गया और तुम अपने शहर की मशहूर दिल की डॉक्टर. यही सोचते-सोचते अचानक से सीने के बाईं तरफ़ असहनीय दर्द उठा. पसीना पसीना हो गया मैं. बुरी तरह तड़पने लगा. तभी एक सहयात्री चिल्लाया, “हार्ट अटैक आया है इन्हें. अगर कोई यहां डॉक्टर है, तो प्लीज़ हेल्प हिम.”
अचानक फुर्ती के साथ किसी ने मेरे सीने को ज़ोर-ज़ोर से थपथपाया. तुरंत एक गोली मेरी जीभ के नीचे रख दी.
“अब कैसा फील कर रहे हैं आप?” यह आवाज़ सुनकर तो मेरे दिल की धड़कन और तेज़ हो गई. कंपकंपाते स्वर में बोला, “मोहिनी तुम?”
“प्लीज़ रिलैक्स... हां, मैं डॉक्टर मोहिनी...” हल्की सी मुस्कान बिखेरते हुए तुमने कहा. “अब तो आपको प्राथमिक उपचार मिल गया है. एक डॉक्टर होने के नाते मैं आपको आदेश दे रही हूं कि अब आप आगे यात्रा नहीं कर सकते. गाड़ी की चैन खींच दी है मैंने. नर्सिंग होम चलो. वहीं सब टेस्ट वगैरह होंगे, तभी जाने दूंगी आपको, क्योंकि ये दिल मेरी अमानत है और मुझे अपनी अमानत की हिफ़ाजत करनी है. उसे संभालना है हमेशा के लिए!”
- डॉ. अनिता राठौर मंजरी

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