कई कवियों ने गोरी की कलाइयों और सुकोमल हाथों पर न जाने कितनी श्रृंगारिक कविताएं लिखी होगी, हाथ मानव शरीर का एक अहम् हिस्सा है. उस पर प्यार भरी छुअन एक सुखद अनुभूति...
खाना खिलाने से लेकर सारे दैहिक कर्म करते हैं हाथ. लेकिन कितने ही लोग यह नहीं जानते हैं कि इनके अलावा भी कई प्रभावकारी गुण हाथों में होते हैं. क्या आप जानते हैं कि ज़रा-सा आपके हाथों का स्नेहिल स्पर्श किसी को नवजीवन दे सकता है. सामने वालों की दुख-तकलीफ़ भी कम कर सकता है.
रेकी, एक्युप्रेशर व एक्युपंचर से अधिक कारगर पद्धति है 'स्पर्श चिकित्सा', यह चिकित्सा दरअसल वैज्ञानिक आधार पर टिकी है. जो जितने अच्छे स्वयंसेवी/स्वयंसेविका होंगे, उनके हाथों में उतना ही अधिक जादू होगा.
मदर टेरेसा उस देवी का नाम है, जिन्होंने अपने हाथों के जादुई स्पर्श से न जाने कितने लोगों को स्वस्थ किया. जिस प्रकार पारस के छूने से लोहा भी सोना बन जाता है उसी प्रकार गंभीर से गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्ति किसी के हाथों का कोमल, मादक, ममतामयी व स्नेहिल स्पर्श पाकर आधा स्वस्थ हो जाता है. उसके शरीर के रक्त संचरण की गति बढ़ जाती है, जिससे दूषित रक्त प्रभावित होता है, वह अधिक-से-अधिक ऑक्सीजन ग्रहण करता है और अशुद्ध वायु बाहर छोड़ता है. इससे शरीर में शुद्ध रक्त की मात्रा बढ़ जाती है. फलस्वरूप वह हल्कापन महसूस करता है.
इंजन को जिस प्रकार ईंधन की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार शरीर में रक्त को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए कभी-कभी दूसरों के हाथों के स्पर्श की, जो आपको प्रेम दे सके, ममता दे सके, स्नेह दे सके की भी जरूरत होती है, जो आपके दुख-सुख में सहभागी बन सके अपनी मौन भाषा से.
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हाथों का कोमल स्पर्श अलौकिक और चमत्कारिक होता है. कुछ देर को तो सामने वाले को लगता है कि जैसे उसकी सारी पीड़ा ग़ायब हो गई. वह पूर्ण रूपेण स्वस्थ हो गया, उसका स्वयं के जीवन के प्रति आत्मविश्वास बढ़ जाता है और तब... तब वह आपके प्रति नतमस्तक और आस्थावान हो जाता है और यही जीवन का अकाट्य सत्य है.
मां, बहन, बेटी, पत्नी यहां तक कि एक अदद वेश्या के रूप में भी हमेशा नारी पुरुष वर्ग की सेवा करती आई है. कभी उसकी शक्ति बनकर, कभी सहारा बनकर तो कभी अपनी ममता की छांव में उसने सामने वाले की सारी दुख तकलीफ़ें समेट लीं.
ज़रूरत है अपने में छिपी उस अदृश्य शक्ति को पहचानने की, समय-समय पर उसका उचित प्रयोग कर परोपकार करने की. हर आदमी डॉक्टर या वैद्य तो नहीं बन सकता, किंतु वह कुशल परिचारिका या परिचारक तो बन ही सकता है. कष्ट या संकट के समय जब कोई किसी प्रकार की शारीरिक या मानसिक पीड़ा दर्द से परेशान हो. किसी प्रकार के उन्माद का शिकार हो, विक्षिप्तावस्था या हीनभावना से जकड़ गया हो, ऐसे में आप अपने हाथों का कमाल दिखाइए.
बड़े ही अपनेपन से अपने हाथ सामने वाले के सिर पर फिराते हुए कहिए, "आप तो बिल्कुल स्वस्थ हैं. बेकार में परेशान हो रहे हैं." या फिर सामनेवाले का हाथ अपने हाथ में लेकर कहिए, "फ़िक्र मत कीजिए. आप शीघ्र ही स्वस्थ हो जाएंगे, बस आप अपनी परेशानी का कारण हमें बता दीजिए, हम पलक झपकते सब ठीक कर देंगे." तब देखिए सामने वाली/वाला कितनी राहत की सांस लेता है. देखते-ही-देखते तब आपके घर-संसार रूपी बागीचे में ख़ुशियों के फूल खिल उठेंगे, जिससे आपकी घर-गृहस्थी में आनंद ही आनंद की बरसात होने लगेगी. वजह होगी आपके प्रति सदस्यों के मन में आस्था एवं विश्वास.
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अतः समय-समय पर, आवश्यकता पड़ने पर, कभी मां बनकर, तो कभी बहन बनकर, कभी भाभी, तो कभी बेटी बनकर अपने हाथों के कमाल या जादू का अनुभव अपने स्वजनों को करा कर उनका दिल एवं विश्वास जीतने की कोशिश कीजिए, देखिए कितनी ख़ुशी मिलती है. जिसे हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते.
- सरल जैन
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