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कंगना रनौत का कॉकरोच पार्टी पर प्रहार- आप दुनिया को अपनी गंदगी, कचरा और बदसूरती दिखा रहे हैं… (Kangana Ranaut slams the cockroach party- You are showing the world your filth, garbage, and ugliness…)

जब से देश में पेपर लीक के मामले को लेकर विरोध, धरना और प्रदर्शन हो रहा है, तब से मानो लोगों की शांति-सुकून खो सी गई. विरोध के नाम पर तिलचट्टों की पार्टी ने क्या कुछ नहीं कहा, जो कहीं से भी सार्थक नहीं था. उनके निचले स्तर के व्यवहार से न केवल माता-पिता शर्मिंदा हुए, बल्कि शिक्षकों का सिर भी शर्म से झुक गया. विरोध करिए, परंतु इस स्तर और ऐसी भाषा का, जिससे दूसरे तो छोड़िए आपका ख़ुद का मुंह कितना गंदा हुआ होगा, यह प्रोटेस्ट करनेवाले अच्छी तरह से समझ रहे होंगे.

ऐसे कई लोग थे जिन्हें जेन ज़ी कहे जाने वाले ये मासूम बच्चों के विरोध करने का लैंग्वेज और अजीबोगरीब हरकतें देखकर दुख हुआ. क्या ये स्टूडेंट्स हमारे देश के हैं? अब यह सोचने का विषय है. कंगना रनौत भी इस अति को सहन न कर सकीं और उन्होंने अपने सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम पर खरी-खरी चुभनेवाली सच्चाई आख़िर बयां कर ही दी. वे कहती हैं-

मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी भी एक जगह इतनी बदसूरती नहीं देखी. जेन ज़ी के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स देखकर तो उल्टी आती है... जिस तरह से वे बात करते हैं और जैसी भाषा इस्तेमाल करते हैं, मैंने कभी नहीं देखा कि हर एक फ्रेम में सब कुछ इतना अजीब और भद्दा हो. छी!

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इन्हें कौन पैदा कर रहा है और पाल पोस रहा है? भारत तो अलग-अलग तरह के ख़ूबसूरत लोगों की जगह है, जो शालीनता और सांस्कृतिक समझ से जुड़े हैं. आप ख़ुद को कॉकरोच कहते हैं और उन्हीं की तरह दिखते और बर्ताव भी करते हैं. इसमें कोई विरोधाभास नहीं है, बस आप दुनिया के सामने अपनी गंदगी, कचरा और बदसूरती ही परोस रहे हैं. इन रील्स ने मुझे अंदर तक परेशान कर दिया है, अब मुझे ठीक होने के लिए डिजिटल डिटॉक्स की ज़रूरत है.
यह केवल कंगना रनौत की ही नहीं ऐसे तमाम लोगों की भी राय रही है, जो इस तरह का भौंडा प्रदर्शन देखकर आहत हुए.

कंगना लाजवाब अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदार नेता और नागरिक के रूप में भी समय-समय पर अपनी सहमति, प्रतिक्रिया और विरोध जताती रही हैं. उनकी ‘भारत भाग्य विधाता’ बेहतरीन फिल्म रही, जिसमें उन्होंने नर्स की भूमिका निभाई थी. यह फिल्म 26 नवंबर को हॉस्पिटल पर हुए आतंकी हमले में वहां के स्टाफ और नर्सों द्वारा मरीज़ों को बचाने जैसी इमोनशल विषय पर आधारित थी. फिल्म देखकर ही सही मायने में हम सभी जान पाए कि कैसे अस्पताल के सभी लोगों ने उस दहशत भरे संकट की घड़ी में एक-दूसरे का सहारा बने थे और मरीज़ों की जान भी बचाई थी.
कंगना की सुपर-डुपर हिट रही ‘क्वीन’ और ‘तनु वेड्स मनु’ के सीक्वल भी जल्द आ रहे हैं. ये दोनों ही फिल्में ब्लाकबस्टर रहीं और कंगना को उनके लाजवाब अभिनय के लिए कई अवॉर्ड्स भी मिले. ‘क्वीन 2’ और ‘तनु वेड्स मनु 3’ उम्मीद है साल 2026 में आ जाएगी.

फ़िलहाल कंगना रनौत की बातों की सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता. हमें भी कुछ समय के लिए डिजिटल से दूरी बना ही लेनी चाहिए. साथ ही जिन जेन ज़ी ने विरोध प्रदर्शन के नाम पर हुड़दंग मचाए थे, उनसे अधिक उनके पैरेंट्स को एक बार फिर अपने दिए गए संस्कार और परवरिश के बारे में गंभीरता से सोचना होगा. विरोध प्रदर्शन और असहमतियां पहले भी होती थीं, लेकिन उसका स्तर इतना नीचे कभी नहीं गिरा था.
तरस कहे, दया या फिर सहानुभूति ऐसे बागी बच्चों के माता-पिता के साथ उन नेता, अभिनेताओं पर भी आती है, जिन्होंने इसे न केवल उचित ठहराया, बल्कि इसकी सराहना भी की. एक पल के लिए केवल सोचिए आपके बच्चों या फिर माता-पिता को कोई गंदी-गंदी गालियां, भद्दी फब्तियां और शर्मनाक पोस्टर व बातें लिखी जाएगी, तब आपके दिल पर क्या गुज़रेगी. यह हर उस स्टूडेंट के पैरेंट्स पर ही नहीं, बल्कि राजनीति के गलियारे में बैठे पप्पू जैसे लोगों पर भी लागू होती है. क्या गांधी परिवार की परवरिश पर उंगली नहीं उठेगी. क्या वे अपनी मां-बहन के लिए भी उसी तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो हमारे प्रधानमंत्री के लिए करते हैं.


शिक्षा हो या राजनीति हर जगह एक दूसरे का सम्मान करना बहुत ज़रूरी है. यही हमारे देश की संस्कृति रही है कि हमने दुश्मनों का भी आदर किया है, ये तो सभी अपने हैं. अब व़क्त आ गया है कि जेन ज़ी बच्चे और उनके परिवार दोनों ही सोचे कि हमसे कहां चूक हो गई, वरना भारतीय बच्चों के संस्कार की तो दुनिया में मिसाल दी जाती है. कहां खो गए वे बच्चे और कहां छिप गए वे अभिभावक... आप भी ढूढ़िएगा और देखिएगा इसे कैसे सुधारें, आख़िर है तो अपने ही बच्चे ना!
- ऊषा गुप्ता

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Photo Courtesy: Social Media

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