इन दिनों अपनी खरी खरी पर सच्ची बातों को लेकर कंगना रनौत बेहद सुर्ख़ियों में हैं. आए दिन समाज में हो रही उथल-पुथल को लेकर अपनी बेबाक़ राय रख रही हैं. और जब से उन्होंने तिलचट्टों के आंदोलन को लेकर अपनी बुलंद आवाज़ लगाई है तब से वे न जाने कितने विद्रोहियों के निशाने पर हैं.

हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर कंगना रनौत भी इन दिनों कई ज्वलंत मुद्दों को उठाते हुए वीडियो साझा कर रही हैं. वे इसे अपनी ज़िम्मेदारी भी समझ रही है कि उन तमाम पहलुओं पर बात करनी चाहिए, जो शायद भोली जनता जान नहीं पा रही है. इसलिए अपना उत्तरदायित्व समझते हुए संसद में जाने से पहले उन्होंने एक रील शेयर कर अपने हिंदुत्व के ललकार की पुरज़ोर अंदाज़ में पैरवी की. मानो वे ख़ुद को ही कठघरे में खड़ी कर अपने हिंदू होने की लड़ाई लड़ रही हों.

कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम पर अपने मन की बात को सशक्त तरी़के से कुछ यूं रखा-
जबकि मैं पार्लियामेंट के लिए लेट हो रही हूं. लेकिन फिर भी मैंने सोचा मैं आपके साथ अपने कुछ विचार नहीं एक फिलिंग है, जो शेयर करूं. क्योंकि मैं आज सुबह एक पोस्ट कर रही थी. एक हमारी फिल्म इंडस्ट्री की बहन है... बहुत ऐसी हमारे फिल्म इंडस्ट्री में हिंदू बेटियां-बहनें हैं, जिनके संपर्क में हम रहे हैं, उनको बहुत क्लोज़ली देखा भी है, जाना भी है. और हम देखते हैं कि है वो हिंदू, लेकिन चाहे पॉलिटिक्स हो, चाहे रिलीजन हो, उसको लेकर उनकी कोई विचारधारा नहीं है. यूथ में यूजिली ऐसा होता है. वो बहुत न्यट्रिल हैं. लेकिन जैसे ही वे आप संबंध कह लीजिए, दोस्ती कह लीजिए, वे इस्लामिक संपर्क में आते हैं वैसे ही उनकी सोच इतनी डिफाइन हो जाती है कि कट्टरपंथी लेफ्टिस्ट वो बन जाते हैं. आई थिंक नो हार्म्स इन दैट... लेकिन आपको संविधान आज़ादी देता है. आप जोे चाहे जिस तरह का रिलीजन, आइडोलॉजी एडॉप्ट कर सकते हैं.
लेकिन जो प्रॉब्लम की बात है. जो हिंदुओं की बात आती है... आज मैं अपने आप को डिफेंड नहीं करूंगी.. मैंने आइटम्स नंबर के ख़िलाफ़, पैपरीटि के ख़िलाफ़ काम नहीं किया. हीरोज़ के ख़िलाफ़ काम नहीं किया. बहिष्कार किया. मैंने नेपोटिज़्म के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी... कह सकते हैं.
हां, मैं एक मॉडरेट हिंदू थी. मैंने ख़ुद को डिफेेंड कर लिया, तो न जाने कितने बेटियां लीप नहीं ले पाएंगी. हां, मैं मॉडरेट हिंदू थी. आज इसी वक़्त मुझे तंज किया जाता है कि तुम कब से संघी बन गई. हां मुझे संघी बनना है. बेजीपी की आइडोलॉजी, अपनाना है.
मैं क्यों नहीं कंवर्ट हो सकती. ये जो दोगलापन है समाज का. जब हिंदूत्व की बात आती है तो समाज के ठेकेदार मेरे दस साल पुराने वीडियो को दिखाकर कहते हैं कि तुम तो पार्टी करती थी, तुम तो ये करती थी... तुम तो वो करती थी... ठीक है मैं सब कुछ करती थी...
लेकिन आज मुझे भी कंवर्ट होना है. मुझे डिफाइन और अवेकन हिंदू बनना है. तो मेरे लिए वो रास्ता क्यों बंद है.
तो ये दोगली सोच और दोगली विचार नहीं चलेंगे. तो आप लोग मुझे बताइएगा कि मेरे विचार और कैसे फाइन हो सकते हैं. आई जस्ट फील कि हमारी बेटियों को भी वो आज़ादी होनी चाहिए कि उन्हें कंवर्ट होना है डिफाइन हिंदू में तो वाय नॉट!!
देखा आपने कंगना का बिंदास अंदाज़.. इस पर आपका क्या कहना... बताइएगा!

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