एक्टर यश ने ‘केजीएफ’ फिल्म से जो अपनी फैंस फॉलोइंग बनाई थी उसे ‘केजीएफ 2’ तक बरक़रार रखा था. लेकिन उसी कड़ी को आगे बढ़ाने की नाकाम कोशिश की गई है ‘टॉक्सिक’ मूवी से. क़रीब सवा तीन घंटे की यह फिल्म दर्शकों के लिए भयंकर टॉक्सिक साबित हुई है. कथा-पटकथा और निर्देशन में कोई तारतम्य नहीं दिखाई देता. कई बार तो ऐसा लगता है कि निर्देशिका गीतू मोहनदास भी ख़ुद कई जगहों पर कंफ्यूज़ सी हो गई हैं.

गोवा के पृष्ठभूमि से ख़ून-ख़राबा के साथ शुरू हुई पिक्चर अंत तक एक्शन और थ्रिलर के साथ बनी रहती है. फिल्म में इतना अधिक वॉयलेंस की भरमार है कि ऑडियंस कई बार अपनी कुर्सी से उठकर रिफ्रेश होने निकल पड़ते हैं. पांच सौ करोड़ के बजट में बनी फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, वीएफएस और एक्शन ज़बर्दस्त है. पूरी फिल्म में यश अपने एक्शन, रोमांस और दरिंदगी वाली इमेज के साथ छाए रहते हैं. बंदूक, हथियार जो भी हाथ में आया उससे इस कदर तबाही मचाते हैं कि देखनेवाले के रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
उस पर तबाही तबाही… गाने में कियारा आडवाणी के साथ उनका बोल्ड एंड ब्यूटीफुल अंदाज़ में प्यार-मोहब्बत, नफ़रत, रोमांस सब कुछ जानलेवा है. दोनों के अंतरंग दृश्यों के हर जगह ख़ूब चर्चे हो रहे हैं. यहां तक की दोनों के व्यक्तिगत ज़िंदगी को भी इसमें घसीटने में लोगों ने कसर नहीं छोड़ी. चूंकि दोनों ही शादीशुदा और बाल-बच्चे वाले हैं और उनका इस कदर एक-दूसरे में इनवॉल्व हो जाना बहुतों के गले नहीं उतरा. वैसे इसमें कोई दो राय नहीं कि कियारा बेइंतहा ख़ूबसूरत और क़ातिल लगी हैं.

नयनतारा, तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी और रक्मिणी वसंत ने भी अपने शानदार अभिनय से प्रभावित किया है. इनके अलावा अक्षय ओबेरॉय, सुदेव नायर व डैरेल डीसिल्वा ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है.
कहानी बस इतनी सी है कि राया, यश गोवा में गैंगस्टर के रूप में खूनी खेल खेलते हुए राज कर रहा है, जिसे अपनी प्रोटेक्टिव बड़ी बहन का बराबर का साथ मिलता है. एक मोड़ पर जब वह कहती है- भाई तेरे लिए मैं सौ बार मर सकती हूं तो क्या तू मेरे लिए एक बार जी नहीं सकता?.. दोनों की गैंगस्टर ज़िंदगी को बयां कर देता है.
रिश्तों का मकड़जाल भी है- गॉडफादर गैंगस्टर की बेटी तारा सुतारिया यश को चाहती है और रंगीन मिजाज़ राया सभी को, पर अंततः नादिया, कियारा के मोहब्बत में दीवाना हो जाता है.
रुक्मिणी भी यश को पसंद करती है. यानी एक तरह से राया की ज़िंदगी में लड़कियों का हुजूम है. हुमा कुरैशी गॉडफादर गैंगस्टर की प्रेमिका के तौर पर अलग जलवा दिखाती हैं.
अंत में राया द्वारा एक बेटे के होने का भ्रम और एक बेटे को बचाने की जद्दोजेहद चलती है.
पहली बार किसी महिला निर्देशिका ने गैंगस्टर के खून ख़राबे से भरपूर, एक्शन, बोल्ड लव सीन्स का ऐसा तड़का लगाया है कि दिमाग़ घूम जाता है. बिना किसी कट के ए सर्टिफिकेट के साथ पांच भाषाओं हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड और मलयालम में फिल्म को वर्ल्ड वाइड रिलीज किया गया है. राजीव राय की सिनेमैटोग्राफी लाजवाब है. यश ने वेंकट के. नारायण के साथ मिलकर मूवी को प्रोडयूस किया है. उन्होंने अभिनय के अलावा निर्देशक के साथ मिलकर कहानी में भी अपना टैलेंट दिखाया है और क्या हुआ वे आप सब देख ही रहे हैं. एडिटर उज्वल कुलकर्णी चाहते तो फिल्म को छोटी कर सकते थे, क्योंकि मूवी ज़रूरत से ज़्यादा लंबी हो गई है, जिस पर दर्शक भी बोरियत से भर जाते हैं.

रवि बसरुर, तनिष्क बागची व विशाल मिश्रा का संगीत कहीं बढ़िया तो कहीं कानफा़ेडू सा लगता है. फिर भी बैकग्राउंड म्यूज़िक की वजह से मूवी में गति बनी रहती है. केवीएन प्रोडक्शंस, मॉन्स्टर माइंड, क्रिएशंस एलएलपी के बैनर तले बनी ‘टॉक्सिक’ हमारे दिलोदिमाग़ के लिए टॉक्सिक ही साबित होगी. दर्शक अपने रिस्क पर ही देखें, वरना टार्चर हुए बिना नहीं रह पाएंगे.

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