Close

रिश्तों में बराबरी चाहते हैं तो देना होगा बराबर का सम्मान (If you want equality in relationships, you must give equal respect)

कुछ रिश्ते जन्म से बंधे होते हैं और कुछ रिश्ते हम ख़ुद बनाते हैं, जैसे- दोस्ती-यारी, प्यार-मुहब्बत, शादी का रिश्ता आदि, लेकिन अक्सर यह देखा जाता है कि हम अपने रिश्तों से उम्मीदें तो बहुत ज़्यादा रखते हैं, लेकिन ख़ुद उन रिश्तों के प्रति हमारी क्या ज़िम्मेदारियां हैं, उसके बारे में हम सोचते तक नहीं. आज हम इसी विषय को समझने का प्रयास करेंगे कि अगर रिश्तों में बराबरी की चाह रखते हैं, तो हमें रिश्तों को बराबरी का सम्मान भी देना होगा.

क्यों ज़रूरी है सम्मान देना?
– सम्मान देने से आपसी विश्‍वास बढ़ता है.
– ईगो दूर होता है.
– आपसी प्यार बढ़ता है.
– आपका पार्टनर आपके सम्मानजनक व्यवहार से खुश रहता है और वो भी आपको वही प्यार और रिस्पेक्ट देने की कोशिश करता है.
– आपका एक-दूसरे के प्रति शालीन और सम्मानजनक व्यवहार आपके रिश्ते में तनाव और झगड़ों को कम करता है.
– आपको समानता का दर्जा मिलता है और रिलेशनशिप को लेकर जो डिप्रेशन और स्ट्रेस होता है, आपका रिश्ता उससे बचा रहता है. इसके अलावा और भी कई फायदे हैं.

कैसे बढ़ाएं अपने रिश्तों में सम्मान और समानता?
– आजकल अक्सर हर किसी को यही कहते सुना होगा कि ये इक्वैलिटी का ज़माना है, चाहे पुरुष हो या महिला- सब बराबर हैं, लेकिन यही इक्वैलिटी का गुरूर आपके बराबरी के हक़ को न सिर्फ़ छीन सकता है, बल्कि आपका रिश्ता भी बिगाड़ सकता है.
– रिश्तों में बराबरी कमानी पड़ती है न कि बातों और एटीट्यूड से जतानी पड़ती है. आप पार्टनर का सम्मान करेंगे, तो वो भी आपको समझेगा.
– अगर आपकी पार्टनर हाउस वाइफ़ है, तो उसे ये कभी न कहें कि घर में सारा दिन पड़ी-पड़ी करती ही क्या हो या फिर बाहर जाकर पैसे कमाओ तब उड़ाओ.
– अगर आप वर्किंग वाइफ हैं, तो आपको भी यह कहने से बचना चाहिए कि मुझे तो घर और बाहर दोनों संभालना पड़ता है, तुम्हारा क्या है बस ऑफिस से आकर टीवी के सामने बैठकर हुकुम चलाना.
– इन सब तानों की बजाय आप दोनों को ही अपने रिश्ते और अपनी ज़िम्मेदारियों को लेकर कुछ बातें कहनी-समझनी होंगी.
– आप दोनों ही हर हफ़्ते एक नोट बनाएं, जिसमें आप दोनों ही अपनी-अपनी परेशानियां और एक-दूसरे से उम्मीदें क्या हैं, वो लिखें और साझा करें.
– उन बातों पर चर्चा करें कि कैसे समाधान निकलेगा और कैसे आप पार्टनर की उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश करेंगे.
– अगले हफ़्ते फिर रिव्यू करें कि क्या छूटा, क्या रह गया और क्या पूरा हुआ.
– साथ ही आपको एक प्रॉमिस नोट भी बनाना होगा कि इस रिश्ते और इस घर में आप दोनों के ही समान अधिकार हैं.
– एक-दूसरे की सलाह के बिना कोई काम नहीं किया जाएगा.
– अपने काम और ज़िम्मेदारियां बांटें.
– एक-दूसरे की बातें सुनें और समस्याएं साझा करें.
– घर और रिश्ते से जुड़े हर छोटे-बड़े ़़फैसले साथ लें.
– ग़लतियों को स्वीकारें और ज़िद पर न अड़ें.
– एक-दूसरे को टाइम दें और शिकायत होने पर प्यार से अपनी बात कहें.
– अगर आपके पति को लगता है कि थोड़ा फ़िज़ूलख़र्च करती हैं, तो कुछ महीने को एक्स्ट्रा सेविंग्स करके दिखाएं.
– इसी तरह अगर आपकी पत्नी को लगता है कि आप फिटनेस पर ध्यान नहीं देते, लेकिन वो सीधे-सीधे कहती कुछ नहीं तो कुछ महीनों में उनको फिट होकर दिखाएं. यही तो है एक-दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान.

– समानता का अर्थ रिश्तों में यह नहीं कि मैं हो क्यों रोज़ खाना बनाऊं तुम भी हफ़्ते में कुछ दिन बनाओ, बल्कि मिल-जुलकर काम करना ही प्यार और समानता है.
– थोड़ा-सा झुक जाना भी आपको छोटा नहीं बना देगा, बल्कि आपके बड़प्पन को ही दर्शाएगा.
– रिश्तों में समर्पण में भी समानता और सम्मान है, अपने पार्टनर की छोटी-सी ख़ुशी को भी पूरा करना सम्मान है.
– बराबरी का दर्जा तो सब चाहते हैं, लेकिन उसे ज़िद, गुस्से या अहंकार से पाना चाहते हैं, लेकिन यह संभव नहीं, क्योंकि नेगेटिव एटीट्यूड से नेगेटिविटी ही बढ़ेगी.
– बराबरी के दर्जे के लिए रिश्तों में इन्वेस्ट करना पड़ता है, जिसमें प्यार, समर्पण, सम्मान और त्याग भी शामिल है.
– ज़रूरत पड़ने पर एक-दूसरे के लिए कुछ त्यागना भी ज़रूरी लगे, तो पीछे न हटें. बुरे वक़्त में साथ निभाएंगे तभी तो अच्छे दिन आएंगे.
– पॉज़िटिव भावना के साथ अपने रिश्ते को निभाएं, तो ज़ाहिर है वो पॉज़िटिव और मज़बूत ही बनेगा.
– कुल मिलाकर हर रिश्ते में एक मर्यादा और शिष्टता होती है, उसे न तोड़ें. शिष्टता या मर्यादा का यह मतलब नहीं फॉर्मल हो जाएं या फॉर्मालिटी से बात-व्यवहार करें. इसका सीधा मतलब यह है कि ग़ुस्से में भी गाली गलौज से बचें, पार्टनर पर हाथ न उठाएं. अपना व्यवहार शालीन और शब्दों का चयन सही रखें बस.
– लेकिन अपने बेडरूम में थोड़ी मर्यादा तोड़कर नॉटी बनें, रोमांस में स्पाइस ऐड करें और हॉलिडेज़ पर भी ज़रूर जाएं.
– छोटी-छोटी चीज़ें ही बड़ी खुशियों में तब्दील होती हैं. संडे को पत्नी को नींद पूरी करने दें और ख़ुद अपने हाथों से चाय-कॉफ़ी बनाकर पिलाएं. पार्टनर के भी आराम का पूरा ध्यान रखें.
– सिर्फ़ फिज़िकल ही नहीं इमोशनल और मेंटल हेल्थ को भी समझें और उस पर ध्यान दें.
– गीता शर्मा 
Sources: Shutterstock

Share this article