बचपन की आदतें भी प्रभावित करती हैं रिश्तों को (Childhood habits can effect your relationships)

बचपन के गलियारों से गुज़रते हुए जब हम युवावस्था की दहलीज़ पर पहुंचते हैं, तो हमारे संग होती हैं, कई अच्छी व बुरी आदतें (Childhood habits can effect your relationships). आदतें जो हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा होती हैं और जिनका हमारे रिश्तों पर गहरा असर पड़ता है. ऐसी ही कुछ आदतें हैं, जो हमारे वैवाहिक जीवन को कभी कड़वा, तो कभी मधुर बनाती हैं. इस बारे में हमने बात की मनोचिकित्सक डॉ. अणुकांत मित्तल से. आइए जानें, बचपन की आदतें जो प्रभावित करती हैं आपके वैवाहिक रिश्ते को.

Childhood habits can effect your relationships

आदतें और हम
बचपन से ही हम अपने आस-पास कई चीज़ों को देखते-सुनते हुए बड़े होते हैं और धीरे-धीरे उसे अपने व्यवहार में लाने की कोशिश करते हैं. चाहे-अनचाहे ये आदतें हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती हैं  और इन आदतों के कारण हम पहचाने जाने लगते हैं.

कहां से सीखते हैं आदतें?

– 0-6 साल तक के बच्चों पर उनके पैरेंट्स का बहुत प्रभाव रहता है. अपने पैरेंट्स को कॉपी करके बच्चे बहुत-सी आदतें सीखते हैं.

– 6-12 साल के बीच के बच्चों में कई आदतें विकसित होने लगती हैं. इस दौरान वो स्कूल में जो कुछ भी सीखते हैं, चाहे अच्छी आदतें या बुरी, अगर उन्हें उसमें बढ़ावा मिलता है, तो वे उसे अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लेते हैं.

– 12-18 साल तक के बच्चे अपने दोस्तों की तरफ़ ज़्यादा अट्रैक्ट रहते हैं. उनके बीच एडजस्ट होने के लिए और पॉप्युलर बने रहने के लिए वे कई नई आदतें अपनाते हैं, तो कई पुरानी आदतें छोड़ भी देते हैं. चाहे आदतें जैसी भी हों, उनके लिए अपने पीयर ग्रुप में फेमस होना ही सबसे बड़ी बात होती है.

– 18 साल की उम्र तक बच्चों के व्यक्तित्व का विकास हो जाता है. हर चीज़ के प्रति उनका अपना नज़रिया होता है, जिसे बाद में बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में यह पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी है कि 18 साल तक की उम्र के बच्चों को सही परवरिश दें, ताकि जीवन के प्रति उनका नज़रिया सकारात्मक व उत्साहवर्द्धक हो.

Childhood habits can effect your relationships

आदतें व उनके नकारात्मक प्रभाव

शेयरिंग न करने की आदत: बच्चे स्कूल में दोस्तों के बीच और घर में भाई-बहनों के साथ शेयरिंग की आदत सीखते हैं. लेकिन कुछ बच्चे इस आदत को अपना नहीं पाते, क्योंकि दूसरों के लिए त्याग करना या अपने अहं को छोड़ पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता.

क्या प्रभाव पड़ता है: शादी के बाद अपने पार्टनर के साथ भी वे चीज़ें शेयर करना पसंद नहीं करते. पार्टनर का उनकी चीज़ों पर अधिकार जमाना उन्हें नागवार गुज़रता है, जिससे उनकी मैरिड लाइफ में प्रॉब्लम्स आती हैं.

झूठ बोलने की आदत: ग़लती करने पर अपनी ग़लती को छुपाने के लिए अगर बचपन से ही बच्चे को झूठ बोलने की आदत पड़ जाती है, तो वह उसके रिश्ते को भी प्रभावित करती है.

क्या प्रभाव पड़ता है: शादी के बाद पति-पत्नी अपनी छोटी-छोटी ग़लतियों को स्वीकार नहीं करते और अक्सर झूठ बोलते हैं. जो पार्टनर ख़ुद झूठ बोलता है, उसे लगता है कि दूसरा पार्टनर भी झूठ बोल रहा है और ऐसे में वो न कभी उस पर और न ही रिश्ते पर विश्‍वास कर पाता है.

परिवार के नियमों को ताक पर रखना: जिन बच्चों को बचपन से ही समाज और परिवार की सीमाओं और मर्यादाओं को टेस्ट करने या चुनौती देने की आदत होती है, वे बड़े होकर उन सीमाओं और मर्यादाओें को नहीं मानते.

क्या प्रभाव पड़ता है: अगर बचपन से ही बच्चे को रात में समय पर घर आना, सबके साथ खाना खाना, अपने कपड़े-जूते ख़ुद रखना जैसी आदतें न सीखने की बजाय अपनी मनमर्ज़ी करने देते हैं, तो शादी के बाद भी ये आदतें उनके वैवाहिक जीवन में खलल डाल सकती हैं. उनका जीवन अनुशासित नहीं होता.

उल्टा जवाब देने की आदत: बच्चों को बचपन से ही तहज़ीब और तमीज़ सिखाई जाती है. किससे किस तरह बात करनी चाहिए, किससे क्या कहना है, क्या नहीं कहना है, किसके साथ कैसा व्यवहार करना है? यदि ये आदतें न सीखने की बजाय बच्चा बदतमीज़ी से बात करना और उल्टा जवाब देना सीखेगा, तो शादी के बाद अपने पार्टनर से भी उसी तरह का व्यवहार करेगा.

क्या प्रभाव पड़ता है: पार्टनर को उल्टा जवाब देना, उसे नीचा दिखाने की कोशिश करना और अपनी बात को ऊपर रखना- ऐसे लोगों की आदतों में शामिल हो जाता है.

फैंटसी में जीना: बचपन की कहानियां सुनकर सपनों का राजकुमार और ख़्वाबों की मल्लिका की चाह रखनेवाले बच्चे फैंटसी में ही जीना पसंद करते हैं. हक़ीक़त से कोसों दूर उनके सपनों की एक दुनिया होती है, जिसे वे सच मानते हैं.

क्या प्रभाव पड़ता है: शादी के बाद अपने पार्टनर में अपने ख़्वाबों का हमसफ़र न मिलने पर ये पार्टनर को अपने सपनों जैसा बनाने की कोशिश करने लगते हैं. अपने पार्टनर पर अपनी पसंद-नापसंद थोपने लगते हैं, जिससे पार्टनर की भावनाएं आहत हो सकती हैं. पार्टनर को अपने अनुसार ढालने की कोशिश में अक्सर वे उसकी भावनाओं को अनदेखा भी कर देते हैं.

अकेले व चुपचाप रहना: जिन बच्चों में आत्मविश्‍वास की कमी होती हैै और दूसरों पर विश्‍वास नहीं कर पाते, ऐसे बच्चे चुपचाप और अकेले रहना पसंद करते हैं, जो धीरे-धीर उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है.

क्या प्रभाव पड़ता है: ज़रूरी नहीं कि रिश्ते पर इसका नकारात्मक प्रभाव ही पड़े. अक्सर देखा गया है कि शादी के बाद ऐसे लोगों में पार्टनर का साथ व प्रोत्साहन पाकर उनमें आत्मविश्‍वास पैदा होता है और वे एक दूसरों पर विश्‍वास करना भी सीखने लगते हैं.

कमियां व नुक्स निकालना: दूसरे बच्चों की कमियां निकालकर उन्हें नीचा दिखाना अक्सर बहुत-से बच्चों की आदत होती है.

क्या प्रभाव पड़ता है: यह ऐसी आदत है, जो किसी भी रिश्ते में दरार डाल सकती है. हर व़क्त पार्टनर की कमियों को गिनाने से उसका आत्मविश्‍वास टूटने लगता है.

नोट: ज़रूरी नहीं कि बुरी आदतों का आपके वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव ही पड़े. अक्सर हालात के बदलने और सही पार्टनर के मिलने से भी पार्टनर की आदतों को सुधारा जा सकता है. ये आदतें हमारे वैवाहिक जीवन के साथ-साथ हमारे बाकी के रिश्तों को भी उतना ही प्रभावित करती हैं.

Childhood habits can effect your relationships

अच्छी आदतों का सकारात्मक प्रभाव

समझौता करने की आदत: जिन बच्चों में बचपन से ही समझौता करने की आदत होती है, वे हर हाल में ख़ुश रहते हैं. शादी के बाद जब पति-पत्नी दो अलग-अलग लोग एक साथ एक परिवार बनकर साथ रहने लगते हैं, तो अक्सर उनकी आदतें, पसंद-नापसंद टकराती हैं, ऐसे में जो चीज़ उनके रिश्ते को संभालती है, वो है समझौता या कॉम्प्रोमाइज़ करना. दोनों अगर थोड़ा-बहुत समझौता करें, तो उनके दांपत्य जीवन में समस्याएं नहीं आतीं.

दूसरे की बातों को अहमियत देना: यह एक बहुत अच्छी आदत है, जो बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है, क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है और उसके सोचने का तरीक़ा भी अलग होता है, फिर कोई कैसे उम्मीद कर सकता है कि दूसरा व्यक्ति आपके अनुसार सोचेगा. ऐसे में यह आदत आपके दांपत्य जीवन पर हमेशा सकारात्मक प्रभाव डालती है.

आत्मनिर्भरता: जिन बच्चों में आत्मनिर्भर रहने की आदत होती है, उनमें बाकी बच्चों की तरह झुंझलाहट या चिड़चिड़ापन नहीं होता. शादी के बाद वे अपने पार्टनर पर निर्भर नहीं रहते, जिससे उनके बीच अपना काम पूरा न होने के लिए लड़ाई-झगड़े नहीं होते. ऐसे में वैवाहिक रिश्ता उन्हें कहीं से भी बोझ नहीं लगता.

ग़लतियों को सुधारना: जिन बच्चों में बचपन से ही अपनी ग़लती मानने और उसे सुधारने की आदत होती है, उनका कभी किसी से मन-मुटाव नहीं होता. शादी के बाद अपनी ग़लती को मानने और उसे सुधारने से उनका रिश्ता और मज़बूत होता है. जीवन के हर क्षेत्र की तरह उनका वैवाहिक जीवन भी सफल रहता है.

– अनीता सिंह

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