कोरोना का मतलब मौत नहीं, ठी...

कोरोना का मतलब मौत नहीं, ठीक हो सकता है संक्रमण, लेकिन सतर्कता ज़रूरी (COVID 19: What You Need To Know)

आज पूरे विश्व में एक ही नाम की दहशत है और वो है कोरोना, पूरी दुनिया तेज़ी से इसकी चपेट में आ गई और अभी तक इसकी कोई दवा या वैक्सीन भी नहीं बनी है. यही वजह है कि सभी लोग डरे हुए हैं और उसको लेकर तरह-तरह की बातें और अफ़वाहें भी ज़ोरों पर हैं.

कोरोना से बचने और लड़ने के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप भी सतर्क रहें, सावधान रहें. इसके लिए ज़रूरी है कि इस बीमारी की सही जानकारी आपके पास हो.

COVID 19: What You Need To Know)
  • सबसे पहले यह समझ लें कि कोरोना का मतलब मौत नहीं.
  • इस संक्रमण से जूझ रहे लोग बड़ी तादाद में ठीक हुए हैं.
  • इससे संक्रमित लोगों में से मात्र 1-2.5 फ़ीसदी लोग ही मौत का शिकार हुए हैं.
  • इसे इतना गंभीर इसलिए माना जा रहा है कि यह फैलता बहुत तेज़ी से है और एक संक्रमित व्यक्ति कई लोगों में संक्रमण फैला सकता है.
  • जिस तेज़ी से ये फैलता है उतने संसाधन हमारे देश में नहीं हैं.
  • हालाँकि यह सच है कि इसकी कोई दवा या वैक्सीन अब तक नहीं बनी, लेकिन इसके हल्के लक्षणों को सही दवाओं के साथ ठीक किया जा सकता है.
  • सिर्फ़ गम्भीर लक्षणों वाले लोगों को ही ख़तरा होता है.
  • जिनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो, बुज़ुर्ग और बच्चे, मधुमेह, हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इससे अधिक ख़तरा होता है.
  • लोगों में यह कन्फ़्यूज़न होता है कि टेस्ट कब और किन परिस्थितियों में कराना चाहिए. आप यह जान लें कि एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर आपका सामान्य फ़्लू के लक्षण हैं तो एहतियात के तौर पर अन्य लोगों से खुद को अलग करें, कुछ दिन आराम करें, हेल्दी डायट लें, लिक्विड लें. अगर लक्षण ठीक हो गए तो डरने की बात नहीं.
  • हां, अगर आपको सांस लेने में तकलीफ़ हो, तेज़ बुख़ार और सूखी खांसी हो तो टेस्ट फ़ौरन करवाना चाहिए.
  • बहुत ज़रूरी है कि अपनी ट्रैवल हिस्ट्री प्रशासन से ना छिपायें.
  • अगर आप बाहर से आयें हैं तो सेफ़्टी के तौर पर खुद को आइसोलेट कर लें, १४ दिनों तक किसी से भी ना मिलें-जुलें, भले ही आपको लक्षण हों या ना हों.
  • यह ना सिर्फ़ आपके परिवार के लिए बल्कि समाज और देश की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है.
  • वैसे भी पूरे देश में लॉकडाउन है, कोरोना से बचने का सबसे कारगर तरीक़ा है बचाव! प्रशासन की बात सुनें, घर पर बैठें.
  • अब तक 199 देश इसकी चपेट में आ चुके हैं और अमेरिका व अति विकसित युरपीयन देश भी इसके गंभीर नतीजे भुगत रहे हैं.
  • इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उन्होंने इस रोग को पहले गंभीरता से नहीं लिया और अब उनके लिए यह आउट ऑफ कंट्रोल हो चुका है.
  • हमारे देश में सरकार और प्रशासन की सतर्कता ने अब तक इसे कंट्रोल में रखा हुआ है लेकिन उनकी यह मेहनत तभी सफल हो पाएगी जब हम इसे हल्के में ना लें और घर पर रहें.
  • ज़रूरी सामान के लिए पैनिक ना करें, सभी चीजें उपलब्ध हैं, बेवजह स्टोर ना करें.
  • जब भी कोई सामान लेकर आयें तो उसे अच्छी तरह साफ़ कर लें, दूध के पैकेट को डिटर्जेंट से धोयें, फल, सब्ज़ियाँ अच्छी तरह से धोयें, खुद अपने हाथ साबुन से २०-३० सेकंड तक धोयें या सैनीटाइज़र का प्रयोग करें.
  • छींक-खांसी आने पर रूमाल का इस्तेमाल करें.
  • आपकी सतर्कता ही आपका सुरक्षा कवच है.
  • कोरोना की चेन तोड़ने में मददगार बनें, बेवजह बाहर ना निकलें. जितने संसाधनों से काम चल रहा है काम चलायें. योग और एक्सरसाइज़ करें, Ac का प्रयोग कम करें, पंखे का अधिक इस्तेमाल करें.
  • अपनी ज़िम्मेदारी समझें, ज़िम्मेदार नागरिक बनें.

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