Close

डिजिटल रिश्ते: प्रेम या भ्रम? (Digital Relationships: Love or Illusion)

डिजिटल प्लेटफार्म पर बनने वाले रिश्ते यथार्थ से दूर होते हैं. चूंकि उनमें रू-ब-रू मिलना होता ही नहीं, इसलिए एक दूसरे की कमियों और ख़ूबियों को पूरी तरह समझना भी मुमकिन नहीं होता.

आज डिजिटल दौर है, जहां रिश्तों से लेकर पूरा जीवन डिजिटल तकनीकी से जुड़ा है. जीवन के हर पहलू में डिजिटल हस्तक्षेप है. ऐसे समय में डिजिटल प्लेटफार्म पर लोगों का एक दूसरे से जुड़ जाना आम बात हो गई है. लोग मीलों दूर बैठे लोगों से जुड़ जाते हैं और उनके साथ अपने सारे एहसास साझा करते हैं. दूर बैठे लोगों से अपने इमोशंस शेयर करना एक काल्पनिक दुनिया में होना होता है. कई बार ये डिजिटल रिश्ते इतने प्रगाढ़ हो जाते हैं कि लोग जीवनसाथी तक बन जाते हैं. रिश्तों का प्रगाढ़ होना एक अच्छा संकेत है, लेकिन रिश्ते जब भ्रम बन जाएं तो अपने आप में एक समस्या बन जाती है.

यह भी सच्चाई है कि जब तक हम किसी के साथ रहते नहीं तब तक हम उसको पूर्णतः समझ नहीं पाते. कभी कभी आभासी दुनिया में बने रिश्ते, प्रेम की गहरी छाप भी बनाते हैं, लेकिन कुछ रिश्ते सिर्फ़ भ्रम भी होते हैं. कल्पना से जब यथार्थ का सामना होता है तो रिश्ते बिखरने लगते हैं. रिश्ते बनाना आसान है, पर उन्हें संभालना उतना ही मुश्किल. आभासी संसार में बने रिश्ते सिर्फ़ बातों से ही बनते हैं इसलिए ऐसे रिश्ते जब यथार्थ के धरातल पर आते हैं तो उनका सच कुछ अलग होता है.

अकेलापन वजह तो नहीं?..

आजकल हर व्यक्ति अपने आपको अकेला महसूस कर रहा है, ऐसे में उसे एक सुकून की तलाश है. इसी तलाश में वो एक निज़ी दुनिया बनाना चाहता है, जो उसे डिजिटल दुनिया में आसानी से उपलब्ध है. चूंकि आजकल हमारी जीवनशैली डिजिटल दुनिया पर निर्भर है तो ऐसे में लोगों का एक दूसरे से जुड़ना आम बात है. लोग काम के साथ अपने दिल की बातें भी साझा करने लगते हैं और फिर रिश्ते में जुड़ने लगते हैं.

सबसे अहम् पहलू ये है कि डिजिटल दुनिया में केवल युवा ही नहीं, बल्कि समाज के हर उम्र, हर वर्ग के लोग जुड़े हैं. सुकून की तलाश हर उम्र के लोगों को होती है और इसी तलाश में वे डिजिटल प्लेटफार्म पर एक दूसरे से जुड़ जाते हैं. यह सुकून कितना वास्तविक है यह जाने बिना ही लोग एक दूसरे से जुड़ जाते हैं.

यह भी पढ़ें: जेन ज़ी समय पर शादी कर विवाह संस्था को नया आधार दे रही है (Gen Z is reshaping the institution of marriage by marrying on time)

अपनों से होते दूर

आभासी दुनिया में एक दूसरे से जुड़ना ग़लत नहीं, परंतु इसका सबसे ज़्यादा नुक़सान यह है कि लोग नज़दीक़ी लोगों से दूर हो गए हैं. स्क्रीन पर सिमटी दुनिया में घर के लोग दूर हो गए हैं. साथ में बैठे हुए लोग भी एक दूसरे से दूर हैं और मीलों दूर बैठे लोग दिल के क़रीब हैं. डिजिटल लाइफ में बने रिश्तों में धोखा भी ख़ूब होता है.

आभासी संसार में की गई प्यार भरी बातें यथार्थ से परे होती हैं और ऐसे रिश्ते जब विवाह के बंधन में बंधते हैं तो उन्हें अपने जीवन में धोखा प्रतीत होता है. ऐसे में सबसे ज़रूरी बात यह है कि यदि आप डिजिटल दुनिया में जुड़े हैं तो उस रिश्ते को परखना ज़रूरी है. कभी भी डिजिटल आभास को पूर्ण सच नहीं मानना चाहिए और न ही उसके आधार पर कोई निर्णय लेना चाहिए.

अलर्टनेस है ज़रूरी

यदि आप विवाह जैसा फ़ैसला लेने जा रहे हैंं तो यह अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि आप अपने जीवनसाथी को आभासी दुनिया से निकल कर वास्तविक रूप से जानें. विवाह जीवनभर का साथ है, इसमें डिजिटल माध्यम से बने रिश्ते को पूर्ण आधार नहीं बनाना चाहिए. ये कहना पूर्णतः अनुचित होगा कि आभासी दुनिया में बने सभी रिश्ते ग़लत या भ्रम होते है. आज तकनीकी ने हमारे जीवन को आसान बनाया है तो रिश्ते भी निश्चित ही सहज होंगे, बस आवश्यकता है जागरूक होने की. अलर्ट रहने की.

रिश्तों की परख

रिश्ता चाहे डिजिटल हो या फिर वास्तविक, ज़िंदगी में उसकी परख करना बेहद ज़रूरी है. डिजिटल माध्यम से बने रिश्तों की परख इसलिए ज़्यादा ज़रूरी है, क्योंकि यह हमारे हक़ीक़त के धरातल से दूर होते हैं. और इसमें बताए गए तथ्य सही हैं या नहीं, ये जानना ज़रूरी हो जाता है. रिश्तों की बुनियाद यदि सच पर आधारित हो तो वो हर कसौटी पर खरे उतरते हैं.

यह भी पढ़ें: क्या दिखावे के चक्कर में हम खो रहे हैं मेंटल पीस? (Are we losing our mental peace in the pursuit of show-off?)

सच पर आधारित

आज डिजिटल दुनिया ने दूरियां कम कर दी हैं. आज हम वसुधैव कुटुंबकम को साकार कर रहे हैं. तकनीकी माध्यम से विश्व से जुड़े हैं. रिश्ते भी आज लंबे दूरियों को तय करके नज़दीक प्रतीत होते हैं. बस रिश्तों में भावनात्मक लगाव वास्तविक होना चाहिए. रिश्ता आभासी दुनिया में बने या वास्तविक दुनिया में बने उसकी नींव मज़बूत और सच पर आधारित होना चाहिए. आभासी दुनिया के रिश्तों को यदि हम ईमानदारी से निभाए तो सचमुच एक विश्वव्यापी पहल हो जाएगी. टेक्नोलॉजी का उपयोग यदि सही दिशा में किया जाए तो वरदान साबित होती है और यदि उसका अंधानुकरण किया जाए तो अभिशाप भी बन सकती है.

- रश्मि वैभव गर्ग

Photo Courtesy: Freepik

Share this article