प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट के ईज़ी टिप्स

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दिन-ब-दिन ब़ढ़ती महंगाई, बच्चों की हायर स्टडीज़ और लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियों के चलते आम आदमी के लिए प्रॉपर्टी में निवेश करना थोड़ा मुश्किल होता है. वैसे भी प्रॉपर्टी में निवेश करना बहुत जोख़िम का काम होता है, लेकिन अपने और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए यह जोख़िम उठाया जा सकता है. प्रॉपर्टी में निवेश करके आप भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से पूरा कर सकते हैं.

योजना बनाएं:
अगर आप प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले योजना बनाएं कि प्रॉपर्टी ख़रीदने में आपको कितनी अनुमानित राशि ख़र्च करनी है? प्रॉपर्टी कहां लेनी है? किस बैंक से लोन लेना है? आदि. इन बातों को ध्यान में रखकर योजना बनाएंगे, तो प्रॉपर्टी में निवेश करना आसान होगा. योजना के अनुसार प्रॉपर्टी ख़रीदने पर ख़र्चे बजट के अंदर होंगे और आप अतिरिक्त ख़र्चों के बोझ से भी बचेंगे.

अपना बजट तय करें:
प्रॉपर्टी ख़रीदने की योजना बनाने के बाद दूसरा चरण आता है बजट का. बजट बनाते समय प्रॉपर्टी की अनुमानित क़ीमत, स्टैंप ड्यूटी, ब्रोकर की फीस, मॉर्गेज़ इंश्योरेंस (अगर आवश्यक हो तो), मेंटेनेंस चार्जेस आदि ख़र्चों का ध्यान रखें. इसके अलावा कुछ अन्य ख़र्चे, जैसे- बैंक से कितना लोन मिल सकता है, फिक्स्ड डिपॉज़िट्स आदि से कितना मैनेज हो सकता है. यदि रेनोवेशन, इंटीरियर और होम डेकोर आदि कराना है, तो कितना ख़र्च आएगा? इन सब बातों को ध्यान में रखकर अपना बजट बनाएं.

लोकेशन (प्रॉमिसिंग एरिया) का चुनाव करें:
यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय है कि आपको किस एरिया में प्रॉपर्टी ख़रीदनी है? वहां पर किस-किस तरह की सुविधाएं (बच्चों के लिए पार्क, स्कूल, अस्पताल, मॉल आदि) उपलब्ध हैं? वहां पर भविष्य में विकास की कौन-कौन-सी संभावनाएं हैं? भविष्य में अगर किराए पर देना हो या प्रॉपर्टी बेचनी पड़े, तो मुना़फे की कितनी संभावना है. यदि इन सब बातों को ध्यान में रखकर प्रॉमिसिंग एरिया का चुनाव करेंगे, तो प्रॉपर्टी में निवेश करना आसान होगा.

अनुभवी व योग्य प्रॉपर्टी मैनेजर/रियलटर्स का चुनाव:
प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए स्थानीय एजेंट की बजाय विश्‍वसनीय, कुशल व योग्य प्रॉपर्टी मैनेजर या रियलटर्स (रियल इस्टेट एजेंट, जिनका संबंध नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियलटर्स से होता है और प्रॉपर्टी की ख़रीद-फ़रोख़्त करते समय वे एसोसिएशन से जुड़े नियमों को फॉलो करते हैं) का चुनाव करें. ये प्रॉपर्टी मैनेजर आपको प्रॉपर्टी संबंधी सही अधिकार और ज़िम्मेदारियों के बारे में बताएंगे, ताकि डील करते समय आपके साथ किसी तरह की कोई धोखाधड़ी न हो. ये मैनेजर्स आपके बजट और रिक्वायरमेंट के अनुसार प्रॉपर्टी ख़रीदने में आपकी मदद करेेंगे.

मार्केट के उतार-चढ़ाव को जानें:
लोकेशन का चुनाव करने के बाद मार्केट के उतार-चढ़ावों का समझदारी के साथ अध्ययन करें. उस एरिया के प्रॉपर्टी मैनेजर और लोकल एजेंट से मिलकर सारी जानकारियां हासिल करें. लेकिन 1-2 व्यक्तियों से ही नहीं, बल्कि रियल इस्टेट/प्रॉपर्टी के बिज़नेस से जुड़े अन्य लोगों से मिलकर उस प्रॉपर्टी के बारे में कुछ जानकारियां हासिल करें. इंटरनेट पर भी आप उस एरिया/लोकेशन की प्रॉपर्टी की क़ीमत, औसत किराया और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त नेट पर उनके फ्री कॉन्टैक्ट नंबर भी दिए रहते हैं, जिन पर डायल करके आप उनसे मार्केट और प्रॉपर्टी के बारे में पूछ सकते हैं.

अतिरिक्त ख़र्चों के बारे में जानकारी हासिल करें:
डील फाइनल करने से पहले प्रॉपर्टी से जुड़े अन्य ख़र्चों के बारे में सारी जानकारियां प्राप्त कर लें. ये अन्य ख़र्च हैं- लैंड टैक्स, प्रॉपर्टी मैनेजमेंट टैक्स, काउंसिल रेट्स, डेवलपमेंट टैक्स और इंश्योरेंस आदि. डील फाइनल होने के बाद इन ख़र्चों का भुगतान आपको ही करना पड़ेगा. इसलिए प्रॉपर्टी मैनेजर/ब्रोकर से इन अतिरिक्त ख़र्चों के बारे में सही जानकारी ले लें.

जांच-पड़ताल करें:
यदि आप पुरानी प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो ख़रीदने से पहले प्रॉपर्टी डीलर या मैनेजर से सारी बातें पूछ लें यानी प्रॉपर्टी संबंधी दस्तावेज़ों के बारे में अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें. हो सकता है प्रॉपर्टी की ओनरशिप (स्वामित्व) लेने से पहले आपको उसे रिपेयर या रिनोवेट कराना पड़े. इसलिए पुरानी प्रॉपर्टी को ख़रीदने से पहले किसी प्रोफेशनल बिल्डिंग इंस्पेक्टर को हायर करें और उससे बिल्डिंग संबंधी पूरी जानकारी हासिल कर लें. तभी प्रॉपर्टी के पर्चेेज़ कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करें. ऐसा करके आप प्रॉपर्टी पर होनेवाले अनावश्यक ख़र्चे से बच सकते हैं.

अच्छे बैंक या मॉर्गेज़ ब्रोकर की तलाश करें:
यदि आपको प्रॉपर्टी में निवेश करने के लिए किसी फाइनेंसर की ज़रूरत है, तो उसके लिए अपने एरिया के प्रतिष्ठित बैंक या मॉर्गेज़ ब्रोकर की तलाश करें, जो लोन दिलाने में आपकी मदद करें. रियलटर्स भी एक बेस्ट ऑप्शन हैं, जो लोन दिलवाने में आपकी मदद करते हैं. इसके अलावा आप किसी अन्य इन्वेस्टर्स या बैंकों से भी फाइनेंशियल मदद (लोन) ले सकते हैं. आजकल नेशनलाइज़्ड बैंक ही नहीं, प्राइवेट बैंक भी होम लोन की सुविधा अपने कस्टमर्स को उपलब्ध कराते हैं, वो भी आकर्षक ऑफर्स के साथ.

होमलोन संबंधी जानकारियां:
प्रॉपर्टी के लिए लोन लेने से पहले विभिन्न बैंकों से ब्याज दर, समयावधि, टैक्स बेनीफिट्स आदि के बारे में सारी जानकारियां हासिल कर लें. आजकल बैंक अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए होमलोन पर सस्ती ब्याज दर पर ङ्गस्पेशल स्कीमम जैसे ऑफर देते हैं, जिससे उन्हें टैक्स में भी फ़ायदा मिले.
डीलर से ही नहीं, ऑक्शन साइट्स में जाकर देखें: अब वह समय बीत गया, जब प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए ख़रीददार को प्रॉपर्टी डीलर/एजेंट के कई चक्कर लगाने पड़ते थे. टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव को प्रॉपर्टी के बिज़नेस में भी देखा जा सकता है. ऑनलाइन वेबसाइट्स के ज़रिए भी आप अपनी मनपसंद प्रॉपर्टी ख़रीद सकते हैं. आजकल कई ऑनलाइन रियल इस्टेट ऑक्शन साइट्स हैं, जो प्रॉपर्टी की ख़रीद-फरोख़्त करती हैं. इन साइट्स पर लॉग इन करके आप अपने मनपसंद एरिया/लोकेशन में जाकर सारी आवश्यक जानकारी हासिल कर सकते हैं.

प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले
– निवेश करने के लिए ऐसी प्रॉपर्टी का चुनाव करें, जिसे भविष्य में यदि बेचना पड़े, तो अच्छा रिटर्न मिलने की पूरी संभावना हो.

– यदि आप दूर-दराज़ के इलाकों में प्रॉपर्टी ख़रीद रहे हैं, तो फ्रॉड से बचने के लिए सारे काग़ज़ी दस्तावेज़ों को अच्छी तरह से जांच-परख लें.

– याद रखें, प्रॉपर्टी के बिज़नेस में क़ीमतें मार्केट के उतार-चढ़ाव के अनुसार बढ़ती और घटती हैं. इसलिए प्रोफेशनल लोगों से सलाह लिए बिना न तो प्रॉपर्टी में निवेश करें और न ही बेचें.

– प्रॉपर्टी केवल ड्रीम होम ही नहीं होता, बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए किया गया निवेश होता है, प्रॉपर्टी ख़रीदते समय इमोशनल होने की बजाय समझदारी से काम लें.

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