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कैसे बढ़ाएं बच्चों की कम्युनिकेशन स्किल? (Effective ways to improve communication skill in children)

बच्चों का तोतली ज़ुबान में शरारत करना...  घर आए मेहमानों के साथ बदतमीज़ी करना... हर बात का उल्टा जवाब देना... ये बातें एक उम्र तक भले ही आपको प्यारी लगें, लेकिन आगे चलकर आपके लिए मुसीबत बन सकती हैं. अतः छोटी उम्र से ही बच्चों की कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर बनाना ज़रूरी है.

8 साल के देवांश की मां अपने बेटे के ज़्यादा न बोलने से परेशान हैं. उन्हें लगता है कि उनके बच्चे की ये हरक़त उसे दूसरे बच्चों से पीछे न कर दे. देवांश की मां का सोचना सही है, लेकिन इसके लिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. ये एक आम समस्या है. अक्सर बच्चे घर में अपनी बातें खुलकर शेयर करते हैं, लेकिन घर से बाहर निकलते ही चुप्पी साध लेते हैं. बाहरी लोगों के सामने वो कुछ बोलते ही नहीं हैं. दरअसल, बच्चे ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता होता कि सामनेवाले को कैसे जवाब दिया जाए. चलिए, हम आपको बताते हैं कि अपने बच्चे की कम्युनिकेशन स्किल को आप किस तरह विकसित कर सकती हैं.

बच्चे से ख़ूब सारी बातें करें

अगर आपको ऐसा लगता है कि आपका बच्चा सही तरह से बात नहीं कर पा रहा है, तो ये आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप उसकी कम्युनिकेशन स्किल सुधारें. इसके लिए आपको ही शुरुआत करनी होगी. बच्चे से स़िर्फ काम से काम न रखें. जितना हो सके उससे बात करने की कोशिश करें. उसकी हिचक दूर करने के लिए उसका मनोबल बढ़ाएं. उदाहरण के लिए, जब आप उसके साथ मार्केट जाएं, तो उसे रास्ते में पड़ने वाली चीज़ों की जानकारी दें. साथ ही उससे उन चीज़ों से संबंधित सवाल भी पूछें. इससे बच्चे को ज़्यादा से ज़्यादा चीज़ों के बारे में पता चलेगा और उसका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा.

दिनचर्या पूछें

आमतौर पर आजकल के माता-पिता के पास इतना समय ही नहीं रहता कि वे बच्चे से उसकी दिनचर्या के बारे में पूछ सकें. बच्चे के बार-बार बोलने पर वो चिढ़ जाते हैं और उसके हाथ में टीवी का रिमोट, मोबाइल, वीडियो गेम आदि थमाकर अपने काम में मशगूल हो जाते हैं. इससे बच्चे की कम्युनिकेशन स्किल पर बुरा प्रभाव पड़ता है. ऐसा न करें. बच्चों से बात करें. उनकी बात सुनें. पैरेंट्स होने के नाते ये आपकी ज़िम्मेदारी है कि अपने बच्चे की कमियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें दूर करने की कोशिश करें. जब बच्चा स्कूल से आए, तो उससे उसके स्कूल, दोस्तों, टीचर आदि के बारे में पूछें. साथ ही बच्चे की बोलने की क्षमता पर गौर करें. यदि उसने सही शब्दों का प्रयोग नहीं किया है, तो उसे बताएं कि सही तरीके से किस तरह बोला जाता है. उदाहरण के लिए, अगर बच्चा टीचर के लिए तू शब्द का प्रयोग कर रहा है, तो उसे सिखाएं कि तू नहीं आप कहे.

बच्चों की बात सुनें

बच्चों की बात ध्यान से सुनें और उन्हें समझने की कोशिश करें. बच्चों की बात पर प्रतिक्रिया दें, ताकि उसे लगे कि आप उसकी बातों में दिलचस्पी ले रही हैं. बच्चों को दूसरों की बातें सुनने के लिए भी प्रोत्साहित करें.

शब्दकोष बढ़ाएं

बच्चों को नए शब्द सिखाएं और उन्हें उसका सही इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करें. उन्हें किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें. जिन शब्दों का मतलब उन्हें समझ नहीं आ रहा, उन्हें उसके अर्थ बताएं. किताबें पढ़ते समय बच्चे को ज़्यादा से ज़्यादा बोलना सिखाएं. पढ़ते हुए उसे क्या समझ में आया, ये उससे पूछें. स्टोरी बुक पढ़ते समय उससे कहानी के पात्रों के बारे में पूछें. मॉरल ऑफ द स्टोरी क्या है, ये भी पूछें. इससे बच्चे की विचारशक्ति बढ़ेगी. साथ ही आप उसे सही उच्चारण करना भी सिखा सकती हैं.

गेम्स खेलें

बच्चे को सेल्फ गेम्स का आदी बनाने की बजाय उसके साथ ख़ुद खेलें. इससे बच्चे की कम्युनिकेशन स्किल बढ़ेगी. जो खेल आप उसके साथ खेलने वाली हैं, उसके बारे में उसे बताएं. बच्चे को उस खेल के नियम समझाएं और अगले दिन खेलते समय ख़ुद ग़लती करें. आपके ऐसा करने पर बच्चा आपको टोकेगा. बच्चे के टोकने पर आप अपनी बात पर अड़ जाएं और उसे खेल के नियम समझाने को कहें. ऐसे में बच्चा आपको नियमों के बारे में बताएगा. उसके द्वारा की गई ग़लतियों को आप सुधारें. 

डायनिंग टेबल टॉक

कुछ बच्चे शर्मीले स्वभाव के होते हैं, लेकिन कुछ चीज़ों की सही जानकारी न होने के कारण चाहकर भी बोल नहीं पाते. उदाहरण के लिए, आपके किसी फ्रेंड या रिश्तेदार के घर जाने पर अगर ग़लती से बच्चे ने बिना पूछे स्वीट कर्ड का बाउल अपनी ओर खिसका लिया, तो आप झट से उसे डांट देती हैं कि बच्चों को कोई भी चीज़ मांगकर अपनी प्लेट में रखनी चाहिए. ऐसा करते समय आप क्या इस बात पर ध्यान देती हैं कि इससे पहले क्या कभी आपने घर पर स्वीट कर्ड बनाया और बच्चे को उसका नाम बताया? वहां दोस्त के घर में आपकी डांट सुनने के बाद आगे से बच्चा आपके साथ खाने से डरने लगेगा या उसकी प्लेट में जो भी रखा जाएगा, वो शांत होकर खा लेगा. आपकी इस छोटी-सी हरक़त से बच्चा कभी कुछ सीख नहीं पाएगा, इसलिए घर से ही इसकी शुरुआत करें. हमेशा बच्चे के साथ खाना खाएं और खाने की हर डिश का नाम उसे बताएं. उसे ये भी बताएं कि किसी के घर जाने पर प्लीज़ कहकर ही कोई चीज़ मांगे. इस तरह आप बच्चे का शब्दकोश बढ़ाने के साथ-साथ उसका आत्मविश्‍वास भी बढ़ाएंगी.

बच्चे को बोलने दें

आपका लिटिल मास्टर बोलने का सही तरीक़ा तभी सीख पाएगा, जब आप उसे बोलने का अवसर देंगी. अक्सर जब बच्चा कुछ कहना चाहता है, तो पैरेंट्स उसकी बात को बीच में ही काटकर उसे चुप करा देते हैं या फिर समझ जाते हैं कि वो क्या कहना चाह रहा है. ये आदत ग़लत है. इससे बच्चा आगे से कुछ कहेगा ही नहीं और वो समझेगा कि सामने वाला उसकी बात समझ जाएगा. अतः बच्चा जब आपसे कुछ कहे, तो उसे ध्यान से सुनें. उसे अपनी बात पूरी करने दें. उसके बाद उसे अपनी बात सही तरह से कहना सिखाएं और फिर उसे दोहराने को कहें. इससे बच्चे के चेहरे पर स्माइल आएगी और आगे से वो उसी तरह  बोलेगा.

मां की भूमिका

बच्चा घर में सबसे ज़्यादा समय अपनी मां के साथ बिताता है. ऐसे में मां को सतर्क रहना चाहिए कि वो बच्चे से किस तरह की बातचीत करे. काम से निपटने के बाद बच्चे को अच्छी-अच्छी बातें, कविताएं आदि सिखाएं. आपसे बात करते समय बच्चा सहज महसूस करता है, इसलिए कुछ भी बोलने से डरता नहीं. ऐसे में उसके द्वारा बोले गए शब्दों पर बारीक़ी से ध्यान दें और उसे सुधारें.

बेसिक कम्युनिकेशन स्किल

बच्चे को कुछ बेसिक कम्युनिकेशन स्किल्स ज़रूर सिखाएं.

- दूसरों से नम्रतापूर्वक बात करना.

- सही और स्पष्ट बोलना.

- जब दूसरे बात कर रहे हों, तो उनकी बात बीच में काटकर अपनी बात न कहना.

- दूसरों की बात को सही तरह से सुनना और फिर बोलना.

- बोलते समय ग्रामर (व्याकरण) का सही प्रयोग करना.

- किसी से अपनी बात कहते समय सही व्यवहार करना.

- बात करते समय सही फेशियल एक्सप्रेशन रखना.

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