टीम इंडिया का फ्लॉप शो- क्या अनुभव की कमी ले डूबी टीम को? (Flop show of team India- inexperienced players are reason behind this defeat ?)

New-Zealand-22

न्यूज़ीलैंड के साथ चौथे वनडे मैच में भारत 19 रन से हार गया है. टीम इंडिया के कैप्टन कूल धोनी के घर में यह मैच था. रांची में खेले गए इस मैच में टीम इंडिया के बल्लेबाज़ों ने निराश किया. पिछले मैच में अच्छा स्कोर करनेवाले धोनी होम ग्राउंड पर महज़ 11 रन ही टीम के खाते में जोड़ पाए. इसके अलावा रोहित शर्मा एक बार फिर से फेल हुए. रोहित की ही तरह मनीष पांडे भी कुछ ख़ास नहीं कर पाए. उनके लिए यह बेहतरीन मौक़ा था, लेकिन मनीष ने टीम को निराश किया. दर्शकों से खचाखच भरा स्टेडियम टीम इंडिया की जयकार कर रहा था, लेकिन टीम ने दर्शकों को भी निराश किया.

क्या अनुभव की कमी ले डूबी टीम इंडिया को?
जिस टीम में महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली जैसे बल्लेबाज़ हों, वो टीम रनों को चेज़ करते हुए हार जाए, तो बड़ा अजीब लगता है. यक़ीन करना मुश्किल हो जाता है कि एक ओर रन मशीन और दूसरी ओर हेलीकॉप्टर शॉट लगाने वालों के रहते हुए टीम रन बनाने में पीछे रह सकती है, लेकिन यह सच है. क्रीज़ पर जब मनीष पांडे और अक्षर पटेल बल्लेबाज़ी कर रहे थे, तो कुछ शॉट्स ऐसे लगे, जो नहीं लगाने चाहिए थे. कॉमेंट्री बॉक्स में बैठे कपिल देव भी मनीष के कई शॉट पर ऐसा बोलते हुए नज़र आए कि शायद अनुभव की कमी के कारण मनीष इस तरह का शॉट खेल रहे हैं. हार्दिक पांड्या भी टीम के लिए खेलते हुए नज़र नहीं आए. कीवी गेंदबाज़ों के सामने इंडियन प्लेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरते चले गए. हालांकि अक्षर ने 38 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन कहीं न कहीं शायद कीवी टीम के गेंदबाज़ों के टीम इंडिया के युवा खिलाड़ी हैंडल करने में नाकाम रहे.

हिट रहे कीवी प्लेयर
टीम इंडिया के फ्लॉप शो के बाद बारी थी न्यूज़ीलैंड की. भले ही कीवियों ने बड़ा स्कोर खड़ा नहीं किया था, लेकिन उनके गेंदबाज़ों ने विरोधी टीम को उस लक्ष्य से पहले ही आउट करने में सफल साबित हुए. मार्टिन गप्टिल के 72 रनों की पारी और पूरी टीम की शानदार और जानदार फील्डिंग ने टीम इंडिया के बल्लेबाज़ों को क्रीज़ पर लंबे समय तक टिकने ही नहीं दिया. लगातार कीवि गेंदबाज़ों ने टीम को परेशान किया और अंत में पूरी टीम को 19 रन से पहले पवेलियन का रास्ता दिखाकर विरोधी टीम के कप्तान धोनी के घर में उनकी टीम को धराशायी किया.

टीम की हार की ज़िम्मेदारी किसके मत्थे मढ़ी जाए, ये कहना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि कोई एक दोषी नहीं, बल्कि सभी बराबर के दोषी हैं. टीम को हराने में सभी की बराबर की हिस्सेदारी है.