छोटे बच्चे की देखभाल के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies For Child Care)

 

 

बच्चे का अचानक या अकारण रोना पैरेंट्स या परिवार के लिए बेहद चिन्ता का विषय बन जाता है. कभी-कभी तो कारण समझ में नहीं आता कि आख़िर बच्चा रो क्यों रहा है? बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. इसी कारण उन्हें बीमारियां जल्दी घेरती हैं. ऐसे में पैरेंट्स का चिन्तित होना स्वाभाविक है. यदि घर में कोई बड़ा या बुज़ुर्ग है, तो सलाह मिल जाती है, अन्यथा करें भी तो क्या? उन्हें तो खांसी-ज़ुकाम, उल्टी, दस्त, कब्ज़, गैस जैसी तकलीफ़ या दांत निकलने के दौरान होनेवाली परेशानियों के लिए भी डॉक्टर की सलाह लेनी ही पड़ेगी. वैसे ऐसे छोटे-मोटे रोगों के लिए कुछ एक घरेलू नुस्ख़े अपनाएं जा सकते हैं.

 

* बदन पर छोटी-छोटी फुंसियां हो जाएं, तो चंदन का लेप लगाने से आराम आ जाता है.
* खांसी होने पर एक चम्मच तुलसी रस, एक चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार चटाने से लाभ होगा.
* अंजीर चूसने से छाती में जमा बलगम साफ़ हो जाता है.
* हल्दी, गुड़ व घी का मिश्रण चटाने से भी खांसी से राहत मिलती है.
* सोते समय अजवाइन का तेल बनाकर (सरसों के तेल में अजवाइन पकाकर छान लें) छाती व गले पर लगाएं. ठंड के कारण हुई खांसी में लाभ होगा. इसी प्रकार गाय का घी भी लगाया जा सकता है.
* काली खांसी को खत्म करने के लिए बांस को जलाकर राख बना लें और शहद मिलाकर चटाएं, लाभ होगा.
* नवजात शिशु को शहद चटाने से जल्दी ठंड नहीं लगती है.
* बच्चे के आस-पास कुचली हुई प्याज़ की पोटली रख देने से भी सर्दी का प्रभाव जल्दी नहीं पड़ता.
* रात को सोते समय तुलसी का रस उसके नाक, कान और माथे पर मलें. तुलसी के रस का सेवन सर्दी से बचाव का अच्छा साधन है. इसमें शहद मिला कर भी चटाया जा सकता है.
* जायफल को पत्थर पर घिस कर चटाना भी सर्दी का अच्छा उपाय है.
* दांत निकलते समय बच्चों को काफ़ी तकलीफ़ होती है. वे बेवजह ही रोते दिखाई देते हैं. ऐसे में दस्त, कब्ज़, बुखार जैसे विकार सामने आने लगते हैं. दांत निकलने के दौरान भुना सुहागा व मुलहठी पीसकर बच्चों के मसूड़ों पर मलने से दांत आसानी से निकल आते हैं.

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* शहद और सुहागा पाउडर मसूड़ों पर मलने से भी दांत बिना कष्ट के निकल आते हैं.
* कच्चे आंवले व कच्ची हल्दी का रस मसूड़ों पर मलने से दांत आसानी से निकल आते हैं.
* अनार के रस में तुलसी का रस मिलाकर बच्चों को चटाने से उनके दांत सुगमता से निकल आते हैं और दस्त नहीं लगती.
* सुहागे की खील 125 ग्राम की मात्रा में मां के दूध में मिलाकर बच्चे को सुबह-शाम चटाएं. साथ ही इसे शहद में मिलाकर मसूड़ों पर मलें. बच्चे को इस दौरान तकलीफ़ नहीं होने पाएगी.
* अक्सर दांत निकलने के दौरान मतली या उल्टी होने लगती है. ऐसे में अदरक, नींबू व शहद समान मात्रा में मिलाकर चटाएं, आराम आ जाएगा.
* इलायची के छिलकों को जलाकर उसकी भस्म चटाने से भी मतली में लाभ होता है.
* अजवाइन और लौंग पाउडर की एक-एक चुटकी लेकर शहद में मिलाकर चटाएं.
* बच्चे को नैपी रैश हो जाने पर मक्खन में हल्दी मिलाकर उसका लेप लगाने से लाभ होता है.
* बच्चे को गैस की तकलीफ़ हो तो एक चम्मच लहसुन के रस में आधा चम्मच घी मिलाकर पिलाएं, गैस से तुरन्त राहत मिलेगी.
* हींग को भूनकर उसमें पानी मिलाकर नाभि के चारों ओर लेप करें, आराम आ जाएगा.
* कच्ची हींग व थोड़ा-सा बेसन मिलाकर हल्के हाथ से पेट पर मलें, गैस निकल जाएगी.
* अजवाइन पाउडर का लेप करने से भी राहत मिलती है.
* यदि बच्चे को कब्ज़ की शिकायत हो, तो चार मुनक्का रात को पानी में भिगो दें. सुबह उसे मसल कर उसका रस छान कर बच्चे को पिलाएं.
* बड़ी हरड़ को पानी के साथ घिसें. इसमें ज़रा-सा काला नमक मिलाकर हल्का-सा गर्म करके दिन में 2-3 बार पिलाएं, अवश्य लाभ होगा.
* यदि बच्चे के पेट में कीड़े हो गए हों तो शहद में काले जीरे का चूर्ण मिलाकर चटाएं.
* सौंफ का कपड़छान चूर्ण 1/4 चम्मच भर शहद के साथ सुबह-शाम चटाएं.

* नवजात शिशुओं को सर्दी के प्रभाव से बचाए रखने के लिए आप उन्हें खूब हंसाएं या फिर रोते समय कुछ पल उन्हें रोने दें. सर्दी से बचाव का यह कुदरती प्राणायाम है. इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

– प्रसून भार्गव
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