कैसे करें होमवर्क प्रेशर को हैंडल?

 

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यदि सही प्लानिंग, टाइम मैनेजमेंट, पॉज़िटिव एटीट्यूड, पैरेंट्स की मदद, घर का शांत व ख़ुशहाल माहौल हो, तो होमवर्क का प्रेशर हैंडल करना आसान हो जाता है. तो आइए, इससे जुड़े सभी पहलुओं के बारे में जानते हैं.

 

बच्चों के लिए होमवर्क करना हमेशा किसी टेंशन से कम नहीं. उस पर यदि पैरेंट्स बच्चों पर पढ़ाई के लिए अधिक प्रेशर देने लगते हैं, तो अक्सर बच्चों का मन पढ़ाई-लिखाई और होमवर्क से हटने लगता है. वे स्कूल जाने व होमवर्क करने से कतराने लगते हैं. लेकिन यदि पैरेंट्स चाहें, तो बच्चों की पढ़ाई और होमवर्क को इंट्रेस्टिंग बना सकते हैं. बच्चों के होमवर्क प्रेशर को कैसे हैंडल करें, इस बारे में कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल की कंसल्टंट सायकोलॉजिस्ट डॉ. श्‍वेता शर्मा और टीचर व करियर काउंसलर संगीता श्यामा ने महत्वपूर्ण जानकारियां दीं.

बच्चों बताएं कि रेग्युलर होमवर्क उनकी स्टडीज़ के लिए बेहद ज़रूरी है.
बच्चा होमवर्क करने में इतनी आनाकानी क्यों कर रहा है? होमवर्क करते समय वो उग्र क्यों हो जाता है? इन बातों की तह तक जाने के लिए बच्चे से बातचीत करें. आख़िर क्या कारण है कि होमवर्क को लेकर बच्चे का एटीट्यूड सही नहीं? इसके कारणों को जानने के लिए आप उसकी क्लास टीचर या स्कूल काउंसलर की भी मदद ले सकते हैं.
पैरेंट्स बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं, इसलिए बच्चे के हर काम में उन्हें मार्गदर्शन व सहयोग दें, फिर चाहे वो होमवर्क हो या बच्चों के साथ पैरेंट्स मीटिंग्स.
बच्चों को हमेशा पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहें, ताकि उन्हें होमवर्क करते समय भी परेशानी न हो.
होमवर्क के लिए एक निश्‍चित समय निर्धारित कर लें. पैरेंट्स वर्किंग हैं, तो जब वे घर पर हों, तब अपने समय के अनुसार होमवर्क का समय निश्‍चित कर लें.
घर में सुपरविज़न जैसा माहौल क्रिएट करें, ख़ासकर डाइनिंग टेबल के आसपास. इससे बच्चा होमवर्क करने के लिए प्रेरित होगा.
यदि घर में एक से अधिक बच्चे हैं, तो पैरेंट्स बच्चों के होमवर्क का समय इस तरह से ऑर्गेनाइज़ करें कि बच्चे मिलकर पढ़ाई कर सकें. कुछ बच्चे पैरेंट्स की देखरेख में साथ बैठकर होमवर्क करना पसंद करते हैं, तो कुछ अपने भाई-बहन के कारण परेशानी महसूस करते हैं. इसलिए पैरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों की वर्क स्टाइल के अनुसार उनके होमवर्क को मैनेज करें.
होमवर्क के मामले में परिवार का रवैया ऐसा होना चाहिए कि बच्चे को लगे कि वही नहीं, अन्य फैमिली मेंबर भी उसके साथ अपने-अपने काम में इन्वॉल्व है. इससे बच्चे को होमवर्क करने में मदद मिलती है. यानी आप भी बच्चे के साथ अपने कामों को करते हुए उसे कंपनी दें, फिर चाहे वो न्यूज़पेपर पढ़ना हो या अन्य कोई कार्य.
यदि पैरेंट्स बचपन से ही अनुशासनात्मक रवैया अपनाएं, तो बच्चे शुरू से ही होमवर्क को समय पर कंप्लीट करना सीख सकते हैं.
होमवर्क करने से पहले चेक करें कि किस सब्जेक्ट में क्या-क्या होमवर्क मिला है.
फिर हर सब्जेक्ट को कितना समय देना है, उसे निर्धारित करें. इससे होमवर्क कंप्लीट करना आसान रहता है.
पैरेंट्स बच्चे को मैथ्स व साइंस के होमवर्क व प्रोजेक्ट्स में मदद भी कर सकते हैं.
यदि बच्चा होमवर्क करने से पहले अपनी ज़िद पूरी करवाना चाहता हो, तो अवश्य ही उसकी बात को पूरी करने की कोशिश करें.
बच्चों को कोई भी सब्जेक्ट का होमवर्क बोझ समझकर न करने की सलाह दें. उसे मन लगाकर पढ़ना व अच्छे से समझना ज़रूरी है, क्योंकि इस समय पढ़ा गया कोर्स भविष्य में भी काम आ सकता है.

घर का सही माहौल भी ज़रूरी

बच्चों के होमवर्क करने के लिए शांत व सही जगह चुनें.
होमवर्क करने के लिए घर का सहज व ख़ुशनुमा माहौल ज़रूरी है.
हर दिन ऐसा समय तय करें, जब शोर-शराबेवाली गतिविधियां न हों यानी उस समय टीवी, रेडियो, खेल आदि का शोर न हो.
बच्चों के होमवर्क की जगह पर अच्छी रोशनी होनी चाहिए.
बच्चों के साथ मिलकर होमवर्क की जगह को साफ़-सुथरा रखें.

मैनेजमेंट को महत्व दें

होमवर्क पूरा करने के लिए टाइम मैनेजमेंट का होना बेहद ज़रूरी है. जो समय फिक्स किया हो, उससे 10 मिनट पहले अपने स्टडी टेबल पर पहुंचकर सारी चीज़ें व्यवस्थित कर लें.
जो काम जिस दिन, जिस समय करना है, उसी समय पूरा करें. अभी कर लेंगे, थोड़ी देर में कर लेंगे, कहकर काम को कल के लिए बिल्कुल भी न टालें.
होमवर्क करते समय हर एक घंटे के बाद 10-15 मिनट का ब्रेक लें.

विल पावर भी अहम् भूमिका निभाती है

होमवर्क पूरा करने में विल पावर यानी इच्छाशक्ति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसलिए विल पावर स्ट्रॉन्ग करना भी ज़रूरी है. इस बारे में एक्सपर्ट भी यही मानते हैं कि एकाग्रता बढ़ाने में आपकी इच्छाशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है.
हेल्दी फूड्स यानी कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स व फाइबरयुक्त आहार का सेवन करें.
साइकिलिंग, स्विमिंग, जॉगिंग आदि करने से आपके विल पावर व कॉन्संट्रेशनल लेवल में बढ़ोतरी होती है.
रूटीन फॉलो करें व इसे मेंटेन भी रखें.
अच्छी नींद ज़रूर लें.
कभी भी एक विषय पढ़ते समय दूसरे विषयों के बारे में सोच-विचार न करें.
पढ़ाई करते समय कुछ खाने, फ्रेंड्स को फोन करने, टीवी देखने आदि से ख़ुद को रोकें.

– ओमप्रकाश गुप्ता