वर्क प्रेशर में कैसे करें काम?

वर्क प्रेशर में कैसे करें काम?

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बढ़ती प्रतिद्वंद्विता, चाटुकारिता, काम का बोझ आदि के चलते क्या आपके ऑफिस का माहौल भी आजकल 100 डिग्री तापमान पर रहता है? इस माहौल में क्या आप काम करने में सक्षम नहीं हैं? परेशान न हों. ऐसी स्थिति में कैसे करें काम? जानने के लिए हमने बात की करियर काउंसलर मालिनी शाह से.

काम करें, रिऐक्ट नहीं
ऑफिस का माहौल तो ऊपर-नीचे होता रहता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आप अपना काम छोड़कर हर बात पर रिऐक्ट करना शुरू कर दें. कुछ समय से अगर आपके ऑफिस का माहौल ठीक नहीं चल रहा है, तो इस मुद्दे पर अपने कलीग्स से गॉसिप करने और ऑफिस अथॉरिटी का विरोध करने की बजाय अपने काम पर ध्यान दें, वरना ऑफिस में आपकी इमेज ख़राब हो जाएगी.

नज़रिया बदलें
जिस तरह ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, उसी तरह ऑफिस का माहौल भी कभी गरम तो कभी ठंडा रहता है. ज़रूरत है, तो बस अपना नज़रिया बदलने की. यक़ीन मानिए, जिस पल आप ऑफिस के प्रेशर को सकारात्मक नज़रिए से देखने लगेंगे, स्थितियां अपने आप बदल जाएंगी.

पॉलिटिक्स से बचें
ऑफिस में काम का प्रेशर हो या एडमिनिस्ट्रेशन का, कुछ लोग हमेशा इसका फ़ायदा उठाने में लगे रहते हैं. हर ऑफिस में कुछ ऐसे लोग ज़रूर होते हैं जिनकी दिलचस्पी काम से ज़्यादा ऑफिस पॉलिटिक्स में होती है. आप इन लोगों की राजनीति का हिस्सा बनने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे इन्हें तो फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, लेकिन आप मुसीबत में ज़रूर फंस सकते हैं. साथ ही इससे आपका काम से ध्यान भंग हो जाएगा. धीरे-धीरे आप भी उन्हीं बेकार लोगों की ़फेहरिस्त में शामिल हो जाएंगे.

अग्रेसिव होने से बचें
आमतौर पर ऑफिस का माहौल बदलते ही लोग प्रेशर में आ जाते हैं और फिर ग़ुस्से में आकर कुछ भी बोल जाते हैं, जिससे कई बार नौकरी चले जाने का भी डर रहता है. माना आजकल ऑफिस में काम का दबाव ज़्यादा है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आप ग़ुस्से में आकर कुछ भी बोल दें. अपने ग़ुस्से पर क़ाबू रखें और स्थिति को समझने की कोशिश करें.

दबाव में न आएं
दबाव में कोई काम नहीं होता, फिर चाहे वो घर का कोई काम हो या ऑफिस का. जब तक आप शांत नहीं रहेंगे, तब तक काम पर ध्यान नहीं दे पाएंगे. वर्क प्रेशर बढ़ते ही कुछ अनचाहे लोगों का प्रेशर भी आप पर बनने लगता है. ऐसी स्थिति में ये समझना बहुत ज़रूरी है कि आप ऑफिस के लिए काम कर रहे हैं न कि उन बेकार के लोगों के लिए. महीने की सैलरी आपको ऑफिस से मिलती है न कि इन लोगों की जेब से. अतः किसी के दबाव या बहकावे में आकर ऑफिस के ख़िलाफ़ कुछ भी ग़लत करने की कोशिश न करें.

प्रभावित न हों, प्रभावित करें
ये प्राकृतिक नियम है कि इंसान बहुत जल्दी अपने आसपास के माहौल से प्रभावित हो जाता है. इसमें आपका कोई दोष नहीं है, लेकिन जितना हो सके, इससे बचने की कोशिश करें. ऑफिस में किसी तरह का प्रेशर बढ़ने पर उस स्थिति से प्रभावित होकर नेगेटिव होने की बजाय अपने सकारात्मक रवैये से दूसरे कलीग को भी प्रभावित करने की कोशिश करें.

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मैनेज करें
जब तक आपके पास इस नौकरी के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है, आप स्थिति को मैनेज करने की कोशिश करें. दबाव में आकर फ्रस्टेट होने की बजाय ख़ुद पर क़ाबू रखें. ऑफिस में बेकार लोगों से बात करने की बजाय अपने काम पर ध्यान दें. बॉस द्वारा दिए काम को समय पर पूरा करें ताकि आप पर और दबाव न बने. इस तरह से व्यवहार करने पर ख़ुद आपको भी सुकून महसूस होगा.

ख़ुद को मोटीवेट करें
ऑफिस में किसी तरह की निगेटीविटी को दूर करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि ख़ुद को मोटीवेट करें. बुरे व़क्त में दूसरे आपको सहयोग नहीं करेंगे, लेकिन आप ख़ुद को हर समय सहयोग करके उस स्थिति से बाहर निकल सकते हैं. मन में ये सोच लें कि ये समय ज़्यादा दिन तक नहीं रहेगा. ऐसे में अपने आपको सकारात्मक ऊर्जा से भरें और आगे की प्लानिंग में जुट जाएं. इससे आपका ध्यान ऑफिस के माहौल पर कम और काम पर ज़्यादा रहेगा.

स्थिति को स्वीकारें
जब हम किसी हालात को बदलने की कोशिश करते हैं, मगर बदल नहीं पाते, तो बहुत दुख होता है. हमारा मनोबल गिर जाता है. समझदारी इसी में होगी कि उस स्थिति से समझौता कर लें. ये समझ लें कि अब ऑफिस का माहौल ऐसा ही रहेगा और आपको इसी माहौल में काम करना है. जिस पल आप ये स्वीकार कर लेगें, आपको स्थिति से सामंजस्य बिठाने में ज़्यादा दिक्क़त नहीं आएगी.

किसी अपने से करें शेयर
अगर आपको लगता है कि इस माहौल को झेलना आपके बस की बात नहीं, तो अपने किसी ख़ास से इस बात को शेयर करें. ऑफिस के बारे में उन्हें बताएं, हो सकता है कि वो आपकी परेशानी का हल निकाल दें.

करें सैर-सपाटा 
आपको अगर ऐसा लगता है कि ऑफिस के वर्क प्रेशर को झेलना मुश्किल हो रहा है, तो सुबह-सुबह सैर-सपाटा शुरू कर दें. सुबह की शुद्ध वायु में योगा करें. इससे आपका मानसिक संतुलन ठीक रहेगा और आप मानसिक रूप से मज़बूत भी बनेंगे.

– श्वेता सिंह