स्वतंत्रता दिवस 2018: पाएं आज़ादी इन आदतों से (Independence Day 2018: Freedom From Unhealthy Habits)

स्वतंत्रता दिवस के ख़ास मौ़के पर देश की आज़ादी के साथ-साथ उन तमाम मुद्दों पर भी बात करना ज़रूरी है, जहां हमें आज़ादी की ज़रूरत है. यदि हम महिलाओं की बात करें, तो महिलाओं को अपनी कुछ आदतों से आज़ादी पाना बहुत ज़रूरी है. उनकी ये आदतें उन्हें आगे बढ़ने से रोकती हैं और उनके व्यक्तित्व के विकास में भी बाधक बनती हैं. हमारे देश की अधिकतर महिलाएं अपनी कुछ आदतों के कारण अपना बहुत नुक़सान करती हैं. ये आदतें बदलकर महिलाएं अपने आप में और अपने परिवार में बहुत बदलाव ला सकती हैं. कौन-कौन-सी हैं ये आदतें? आइए, जानते हैं.

Freedom

अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ करना
हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे को हुए कैंसर की ख़बर ने सभी को चौंका दिया, लेकिन इसकी एक बड़ी वजह सोनाली बेंद्रे की ख़ुद के प्रति लापरवाही भी थी. सोनाली बेंद्रे को कुछ समय से शरीर में दर्द की शिकायत हो रही थी. लेकिन उन्होंने भी आम महिलाओं की तरह ख़ुद के प्रति लापरवाही के चलते इसे नज़रअंदाज़ कर दिया. जब दर्द ज़्यादा बढ़ने लगा और डॉक्टर को दिखाया, तब सोनाली बेंद्रे का कैंसर एडवांस स्टेज तक पहुंच गया था. जब सोनाली बेंद्रे जैसी एक्ट्रेस अपनी सेहत के प्रति इतनी लापरवाह हो सकती हैं, तो आम महिलाओं की स्थिति का बख़ूबी अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
क्या करें?
जिस तरह आप अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य की सेहत का ध्यान रखती हैं, उनकी हर छोटी-बड़ी तकलीफ़ में उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाती हैं, उसी तरह अपनी सेहत का भी ख़ास ध्यान रखें. शरीर में कोई भी असामान्यता या दर्द होने पर तुरंत घरवालों को इसके बारे में बताएं और उनके साथ डॉक्टर के पास जाएं.

अपने शौक़ के लिए समय न निकालना
महिलाएं अपने शौक़ और ख़ुशियों को हमेशा आख़िरी पायदान पर रखती हैं. घर-परिवार की तमाम ज़िम्मेदारियों के बाद यदि टाइम मिला, तो ही वो अपने शौक़ के बारे में सोचती हैं और ऐसा बहुत कम ही हो पाता है. महिलाएं पूरी ज़िंदगी अपने परिवार के लिए खटती रहती हैं, लेकिन उनके शौक़ अक्सर अधूरे रह जाते हैं. इसका असर उनकी पर्सनैलिटी, उनके आत्मविश्‍वास और उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. जब महिलाएं अपने शौक़ पूरे नहीं कर पातीं, तो उसकी खीझ उनके व्यवहार में झलकने लगती है. ऐसी स्थिति में महिलाएं या तो बहुत चिड़चिड़ी या मुखर हो जाती हैं या फिर अपनी भावनाओं को दबाने लगती हैं. ये दोनों ही स्थितियां उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं.
क्या करें?
घर-परिवार, बच्चों की तमाम ज़िम्मेदारियां निभाते हुए अपने लिए भी अलग से व़क्त निकालिए. उस समय आप अपने शौक पूरे कीजिए, जैसे- संगीत, पेंटिंग आदि. ऐसा करने से आप अच्छा महसूस करेंगी और ख़ुश रहने लगेंगी.

घर के कामों के लिए परिवार की मदद न लेना
हमारे देश में घर के काम स़िर्फ महिलाओं के हिस्से ही आते हैं. भले ही वो वर्किंग हों, पति के बराबर कमाती हो, फिर भी घर के काम पुरुष नहीं करते. कई घरों में पुरुष घर के कामों में महिलाओं का हाथ बंटाना भी चाहते हैं, लेकिन महिलाएं ख़ुद उन्हें मना कर देती हैं. उन्हें लगता है कि उनके पति यदि घर का काम करेंगे, तो लोग क्या कहेंगे. ऐसी स्थिति में घर-बाहर दोनों जगहों की ज़िम्मेदारी निभाते हुए महिलाएं इतनी थक जाती हैं कि इससे उनका शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है. उनका व्यवहार रूखा होने लगता है, घर का माहौल बिगड़ जाता है, वो बात-बात पर चिढ़ने लगती हैं.
क्या करें?
आप घर के सभी काम अकेले नहीं कर सकतीं, इसलिए घर के सभी सदस्यों से थोड़ी-थोड़ी मदद लीजिए और अपनी ज़िम्मेदारी कम कीजिए. इस तरह घर का सारा काम भी हो जाएगा और आपके काम का बोझ भी हल्का हो जाएगा.

Healthy Habits

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छोटी-छोटी बात के लिए पति पर निर्भर रहना
भारतीय महिलाएं अपने पति पर इस कदर निर्भर रहती हैं कि बैंक से लेकर, बच्चों के स्कूल, घर के सामान तक ख़रीदने जैसे कामों के लिए पति का ही इंतज़ार करती हैं. पढ़ी-लिखी वर्किंग महिलाएं ऑफिस में तो सारे काम कर लेती हैं, लेकिन घर के लिए कोई भी ़फैसला लेते समय उन्हें पति की सहायता चाहिए होती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हमारे देश में हमेशा से सारे अधिकार पुरुषों को ही दिए गए हैं, ऐसे में महिलाएं कहीं न कहीं ये मान लेती हैं कि किचन के बाहर के काम उनके बस की बात नहीं है. ख़ासकर पेपरवर्क के मामले में महिलाएं हमेशा पति पर ही निर्भर रहती हैं.
क्या करें?
आपका छोटे-छोटे कामों के लिए पति पर निर्भर रहना ठीक नहीं है, इससे आपके पति को चिढ़ हो सकती है. जो काम आप पति के बिना कर सकती हैं, उन्हें करने की शुरुआत करें. इससे आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और आपके पति को राहत महसूस होगी.

अपने खानपान पर ध्यान न देना
हमारे देश की अधिकतर महिलाएं एनीमिया की शिकार पाई जाती हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है महिलाओं का अपने खानपान पर ध्यान न देना. गरीब घर की महिलाएं ही नहीं, अमीर परिवार की महिलाएं भी एनीमिया से ग्रस्त पाई जाती हैं. हमारे देश में महिलाओं को ये बचपन से सिखाया जाता है कि उन्हें पूरे परिवार को खिलाने के बाद ही भोजन करना चाहिए, तभी वो कुशल गृहिणी कहलाई जाएंगी. माता-पिता भी बेटे के खानपान पर बेटी से ज़्यादा ध्यान देते हैं. अपनी मां को ऐसा करते देख बेटी भी अपनी सेहत के प्रति लापरवाह हो जाती है. अगर परिवार को खाना खिलाने के बाद भोजन नहीं बचा, तो महिलाएं अपने लिए और बनाने की बजाय भूखी ही रह जाती हैं. पूरे परिवार को महिलाएं दूध, फल, मेवे आदि नियम से खिलाती हैं, लेकिन अपने लिए ऐसा नियम नहीं बनाती हैं.
क्या करें?
जब तक पति ऑफिस से घर नहीं आ जाते, तब तक भोजन न करना समझदारी नहीं है. इससे एक तो आपको एसिडिटी की शिकायत हो जाएगी और आपकी भूख भी मर जाएगी. संपन्न होते हुए भी कुपोषण का शिकार होना स़िर्फ लापरवाही है. आप हैं तो सबकुछ है, आपके बीमार होने से पूरा परिवार बिखर जाता है, इसलिए आपका स्वस्थ रहना बहुत ज़रूरी है. जिस तरह आप अपने परिवार का ध्यान रखती हैं, उसी तरह अपनी सेहत का भी ध्यान रखें.

मन की बात न कहना
महिलाएं घर में सभी को ख़ुश रखने के चक्कर में अक्सर अपनी ख़ुशियों को अनदेखा कर देती हैं. यदि उन्हें किसी की कोई बात बुरी लगती है, तो वो उसे मन में ही रखती हैं. उन्हें लगता है कि पलटकर जवाब देने से घर का माहौल बिगड़ जाएगा, सबकी ख़ुशी के लिए चुप रहना ही सही है. हर बात मन में रखने से कई महिलाओं को डिप्रेशन की शिकायत होने लगती है, उनका आत्मविश्‍वास कम होने लगता है, वो अपने में ही सिमट जाती हैं.
क्या करें?
मन की बात मन में रखने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और रिश्तों में भी दूरियां आने लगती हैं. किसी की कोई बात बुरी लगने पर आप उसे जवाब भले ही न दें, लेकिन आपके मन में गांठ रह ही जाती है और आप फिर उस इंसान से पहले जैसी आत्मीयता से व्यवहार नहीं कर पातीं. अत: परिवार में किसी की कोई बात बुरी लगे, तो उसे मन में न रखें, बल्कि उस व्यक्ति से उस बारे में बात करें. ऐसा करने से आपका मन हल्का हो जाएगा और उस व्यक्ति को भी पता चल जाएगा कि उसकी कौन-सी बात आपको बुरी लग सकती है. वो फिर आपसे कभी ऐसी बात नहीं करेगा.

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शर्म-हिचक हो सकती है जानलेवा
महिलाएं अक्सर वेजाइनल प्रॉब्लम्स, ब्रेस्ट प्रॉब्लम्स आदि के बारे में बात करने से हिचकिचाती हैं, जिसके चलते समस्या गंभीर हो जाती है. महिलाओं की शर्म और हिचक उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है इसलिए सेहत के मामले में कभी भी शर्म ना करें और शरीर के किसी भी हिस्से में तकलीफ़ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

– कमला बडोनी

क्या होता है जब आप बच्चों को ज़रूरत से ज़्यादा आज़ादी देते हैं, देखें वीडियो:

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स्वतंत्रता दिवस 2018: पाएं आज़ादी इन आदतों से (Independence Day 2018: Freedom From Unhealthy Habits)
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स्वतंत्रता दिवस 2018: पाएं आज़ादी इन आदतों से (Independence Day 2018: Freedom From Unhealthy Habits)
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स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के ख़ास मौ़के पर देश की आज़ादी के साथ-साथ उन तमाम मुद्दों पर भी बात करना ज़रूरी है, जहां हमें आज़ादी (Freedom) की ज़रूरत है. यदि हम महिलाओं (Women) की बात करें, तो महिलाओं को अपनी कुछ आदतों (Habits) से आज़ादी पाना बहुत ज़रूरी है. उनकी ये आदतें उन्हें आगे बढ़ने से रोकती हैं और उनके व्यक्तित्व के विकास में भी बाधक बनती हैं. हमारे देश की अधिकतर महिलाएं अपनी कुछ आदतों के कारण अपना बहुत नुक़सान करती हैं.
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