ललित मोदी जिन्हें आईपीएल का जनक भी कहा जाता है. उन्होंने ही साल 2008 में टी 20 के इस फॉर्मेट का भारत में आगाज़ करवाया था.
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आईपीएल का उस समय जो यह सफ़र शुरू हुआ आज कामयाबी के शिखर पर पहुंच गया है. हर साल क्रिकेट फैंस को आईपीएल का बेसब्री से इंतज़ार रहता है. वही पर इसे लेकर मोदी ने दावा किया है कि बीसीसीआई यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के कारण आईपीएल के टीमों व बोर्ड को हर साल 2400 करोड़ का घाटा हो रहा है. कैसे? आइए, उनके दृष्टिकोण से समझते हैं.

ललित मोदी के अनुसार, आईपीएल का असली नियम ’होम-एंड-अवे’ वाला फॉर्मेट था. इसके मुताबिक़ हर टीम को दूसरी टीम के साथ दो बार खेलना पड़ता है. एक बार अपने मैदान यानी होम ग्राउंड पर और दूसरी बार सामने वाली टीम के होम ग्राउंड पर. लेकिन जब साल 2022 में आईपीएल में टीमें दस हो गईं तो इस केलकुलेशन के अनुसार, लीग फेज में नब्बे मैच होने चाहिए थे तथा बाद में चार नॉकआउट मैच. लेकिन फ़िलहाल 74 मैच ही हो रहे हैं.
मोदीजी ने बताया कि मैच कम होने के कारण इससे होनेवाली कमाई प्रभावित हो रही है और टीम व बोर्ड को फ़ायदे की जगह काफ़ी नुक़सान भी हो रहा है. दरअसल, हर मैच से होने वाली कमाई का पचास प्रतिशत टीम को और पचास प्रतिशत बीसीसीआर्ई को मिलता है. इस तरह यदि हम नब्बे मैच खेलते हैं तो मीडिया राइट्स की कमाई को मिलाकर 2400 करोड़ अधिक होती हैं. इस अतिरिक्त इनकम में 1200 करोड़ क्रिकेट बोर्ड को और 1200 करोड़ टीमों को मिलती है. इस तरह हर टीम को कम से कम 120 करोड़ का लाभ होता है. इस गणित के हिसाब से हर टीम को फ़िलहाल करोड़ों की हानि हो रही है.
ललितजी का कहना है कि यदि कैलेंडर में जगह नहीं मिल पा रही है तो टीम अधिक न बढ़ाएं. उनके अनुसार, यह बहुत सिंपल सी बात है. आईपीएल की टीमें आज जो फीस दे रही हैं, उसके बदले में उन्हें पूरे मैच मिलने चाहिए. किसी भी टीम ने कम मैचों के लिए तो साइन नहीं किया होगा.
आज आईपीएल जिस तरह से फल-फूल रहा है उससे ललित मोदी बेहद ख़ुश भी हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि आईपीएल टीमें और बीसीसीआई उनकी इस बात पर गौर करें और कारगर कदम उठाएं.

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