अगर पहली शादी में तलाक़ हो चुका है या अन्य वजहों से आप पार्टनर से अलग हो चुके हैं और दूसरी शादी करना चाहते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है. लेकिन दूसरी शादी से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है.

पहले वाली ग़लतियां ना दोहराएं
पहले आपके रिश्ते में जो भी प्रॉब्लम्स थीं, उन सबको दूर करने की कोशिश करें. अगर साथी को आपका अपने मायकेवालों के साथ ज़्यादा इन्वॉल्व होना पसंद नहीं था, तो इस बार ये ग़लतियां ना करें. हर चीज़ की लिमिट होती है, इसलिए ससुराल की हर छोटी-छोटी बातें अपने मायके में ना बताएं. ऐसा करना किसी को पसंद नहीं आएगा. इसके अलावा अगर आप अपनी सैलेरी घर में नहीं ख़र्च करती थीं और ये बात पति को पसंद नहीं थी और इस बात पर विवाद बढ़ता गया, तो इस बार ध्यान रखें कि ऐसा ना करें. घर आप दोनों का है, तो ख़र्चा भी दोनों ही करेंगे. इस तरह अपनी हर छोटी-बड़ी ग़लती से सीखें और उसे ना दोहराएं.
अतीत को ख़ुद पर हावी ना होने दें
पहली शादी के ख़राब अनुभवों या पुरानी यादों को अपने वर्तमान रिश्ते पर हावी न होने दें. ज़रूरी नहीं जो पहले हुआ, वो अभी भी होगा इसलिए पुरानी बातें भूल जाएं और नए रिश्तों और नए लोगों को समझें और उनके साथ सामंजस्य बैठाएं. ज़रूरी नहीं कि हर सास बुरी हो या हर पति झगड़ालू हो. एक नई शुरुआत करें.
दूसरी शादी का फ़ैसला दबाव में ना लें
आपके पैरेंट्स आपको मजबूर भले ही कर रहें हो कि दूसरी शादी करो और शादी करने में कोई बुराई भी नहीं है, बल्कि ख़ुद को एक मौक़ा देना ही चाहिए. लेकिन लाख समझाने पर भी अगर आपका मन नहीं मान रहा, तो किसी और की ज़िंदगी बर्बाद ना करें. पहले ही सबको बता दें कि अभी आप शादी के लिए तैयार नहीं हैं. आधे-अधूरे मन से किसी की लाइफ में शामिल ना हों, क्योंकि वो बंदा भी बहुत से अरमानों के साथ आपकी ज़िंदगी में शामिल होगा, लेकिन आपकी बेरुखी उसे भी तोड़ देगी. इसलिए शादी का ़फैसला किसी के कहने पर नहीं, बल्कि अपने मन से लें.
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साथी के साथ समय बिताएं तभी कोई फ़ैसला लें
शादी का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता होता है, जिसमें यदि अपने साथी से आपकी सोच न मिलें, एक-दूसरे पर विश्वास न हो, एक-दूसरे की कदर न करते हों, या एक-दूसरे की भावनाओं को न समझते हों, तो ऐसे रिश्ते का कोई मतलब नहीं होता है. इसलिए आपको दूसरी शादी करने से पहले चाहिए कि आप उनके साथ थोड़ा समय बिताएं. उनसे मिलें उनके व्यवहार को समझें, जिससे आपकी सोच कहां तक मिलती है, इस बात का आपको पता चले. इसके अलावा क्या आप एक-दूसरे के साथ अपनी ज़िंदगी बिता सकते हैं, इस बात को अच्छे से समझने के बाद ही शादी का ़़फैसला लें.
दोनों के बच्चे हैं तो शादी से पहले उन्हें तैयार करें
यदि आपके या आपके साथी के बच्चे हैं तो यह सुनिश्चित करें कि मिलकर किस प्रकार उनका पालन-पोषण करेंगे. बच्चों की देखरेख से जुड़ी चीज़ों पर भी बात कर लेना महत्वपूर्ण है. आप बच्चों को भी अपने नए रिश्ते के लिए सहज महसूस कराएं. उन्हें अपनी दूसरी शादी के बारे में बताएं, उन्हें मनाएं. इसके बाद ही अपने रिश्ते को आगे ले जाएं.
एक-दूसरे को स्पेस दें
एक-दूसरे की व्यक्तिगत ज़रूरतों और स्पेस का सम्मान करें. रिश्तों को पनपने के लिए समय और धैर्य की आवश्यकता होती है. इसका ध्यान रखें तभी रिश्ता चल पाएगा.
पार्टनर का सम्मान करें
दूसरी शादी में अक्सर विश्वास व प्यार कायम होने में काफ़ी वक़्त लग जाता है. इसलिए रिश्ते को सफल बनाने के लिए आप पहले कदम के रूप में अपने पार्टनर का सम्मान अवश्य करें. जब दोनों पार्टनर एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और साथ ही साथ उनकी तारीफ़ करते हैं, तो इससे रिश्ते पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
परफेक्ट साथी की तलाश ना करें
अपने दिल और दिमाग़ में इस बात को बिठा लें कि किसी को भी परफेक्ट जीवनसाथी नहीं मिलता है. पति और पत्नी को एक-दूसरे की कमी और ख़ूबियों के साथ ही जीवन के इस सफ़र पर चलना होता है.
फ़ैसला लेने में किसी तरह की ज़ल्दबाज़ी न करें
शादी करना ज़िंदगी का बहुत अहम ़़फैसला होता है. बात अगर दूसरी शादी की है, तो आप इसमें किसी भी तरह की ज़ल्दबाज़ी न करें. इस ़फैसले को लेने से पहले अच्छी तरह से सोच-विचार लें. अपने घर-परिवार और क़रीबी मित्रों से राय ज़रूर लें. अपने दिल की बात भी ज़रूर सुनें.
हर बात पर एक्स का ज़िक्र न करें
कहीं ऐसा तो नहीं कि आप बात-बात पर अब भी अपने एक्स का ज़िक्र करते हैं? या फिर आप अपनी प्रेजेंट लाइफ और पार्टनर की तुलना अपने पास्ट से कर रहे हैं. ये दोनों ही सिचुएशन आपके रिश्ते के लिए ठीक नहीं है और ये बताती है कि शायद आप अब भी पुराना रिश्ते को भूल नहीं पाए हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें.
पार्टनर की इनसिक्योरिटी को समझने की कोशिश करें
हो सकता है कि आपका पार्टनर किसी वजह से इनसिक्योर फील कर रहा है. उदाहरण के तौर पर अगर पहली शादी किसी अफेयर की वजह से टूटी है, तो हो सकता है कि आपके मेल फ्रेंड्स से मिलने पर पार्टनर को इनसिक्योरिटी हो. ये सच है कि हर रिश्ता एक जैसा नहीं होता. लेकिन एकदम से झगड़ा करने की जगह आपको पार्टनर की इनसिक्योरिटी को समझने की भी ज़रूरत है. इसके अलावा हो सकता है उसे पहले रिश्ते में धोखा मिला हो और इसलिए अब उसे आपका ज़्यादा लड़कों से बात करना ना पसंद हो, तो उसे प्यार से समझाएं और थोड़े दिन सब्र करें, चीज़ें अपने आप सही होने लगेंगी.
अपने नए पार्टनर से खुलकर बात करें
आप अपने नए जीवन की शुरुआत एक बार फिर से करने जा रहे हैं, तो बेहतर है कि अपने होनेवाले नए जीवनसाथी से खुलकर बातें करें. इस दौरान आप ख़ुद से जुड़ी बातें उसको बताएं और उसके बारे में जानने की कोशिश करें. इससे आगे आनेवाले जीवन में आप दोनों के बीच कोई मतभेद नहीं होगा. जैसे कि क्या आपने अपने पार्टनर को अपनी शादी टूटने की वजह बताई है? बच्चों की ज़िम्मेदारी से लेकर उनकी इस शादी से क्या उम्मीदें हैं, क्या इस बारे में आप दोनों ने मिलकर बात की है? पिछले रिश्ते में कहां क्या ग़लती हुई, इसे जितना खुलकर आप डिस्कस करेंग,े उतना ही ठीक से आप अपने पार्टनर को समझेंगे और पुरानी ग़लतियों को दोहराने से भी बचेंगे.
दूसरा मौक़ा सभी को मिलना चाहिए, लेकिन असली ख़ुशी तभी मिल सकती है जब आप अपने पहले ट्रॉमा से पूरी तरह बाहर निकल चुके हों. इसलिए अच्छा रहेगा कि अपने पार्टनर के साथ कोई काउंसलिंग सेशन ले लें. किसी रिलेशनशिप एक्सपर्ट की राय भी सही रहेगी.
- शिखा जैन

