फिल्मी पर्दे पर चमकते सितारों के पीछे की कहानी के कुछ उजाले तो कुछ गहरे अंधेरे को बड़ी शिद्दत से महसूस करते हैं, जब हम सीनियर फिल्म जर्नलिस्ट हनीफ ज़वेरी से फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी तमाम बातें देखते-सुनते हैं.
जी हां मेरी सहेली के 115 वें पॉडकास्ट में आप ऐसी बहुत सारी बातों के बारे में जानेंगे, जो फिल्मी दुनिया के कड़वे सच को उजागर करती है. पूरा पॉडकास्ट देखने व दिलचस्प घटनाओं के बारे में जानने और उसका लुत्फ़ उठाने के लिए लिंक पर क्लिक करें-
भले ही इसे डार्क साइड्स ऑफ बॉलीवुड कहा जाए... लेकिन यह भी उतना ही सच है कि कुछ ऐसी सच्चाइयां थीं, जो लोगों तक पहुंच ही नहीं पाईं. फिर वो अस्सी-नब्बे का दशक रहा हो या आज का... राज कपूर से लेकर राजेश खन्ना तक, खान ब्रदर्स- आमिर, सलमान, शाहरुख खान से लेकर सुशांत सिंह राजपूत, करण जौहर तक की कही-अनकही बातें...

एक वक़्त था जब अभिनेता के सशक्त अभिनय के बलबूते फिल्में चला करती थीं. लोग अपने पसंदीदा कलाकार को देखने के लिए दीवानगी की हद तक सिनेमाघरों में टूट पड़ते थे. पहले आज वाली स्थिति नहीं थी कि जनता को बेवकूफ़ बनाकर पिक्चर हिट करा दी जाए. आज फिल्म में भले ही कोई दम न हो, पर मीडिया हाउस और स्टार्स के शोशेबाज़ी कुछ ऐसा रंग दिखाती है कि फिल्म सुपर-डुपर हिट कहलाई जाने लगती है. काग़ज़ों पर जो मूवी कामयाबी के झंड़े गाड़ रही है, हक़ीक़त की धरातल पर सिनेमा हॉल में पब्लिक नदारद मिलती है.

आमिर खान की फिल्म ‘सितारे ज़मीं पर’ पर जिसका न जाने कितना प्रमोशन किया गया. इसमें कोई दो राय नहीं कि फिल्म का विषय अच्छा था, पर लोगों ने उतना रिस्पॉन्स नहीं दिया, जितनी की उम्मीद थी. लेकिन इसके आंकड़े इस तरह रखे गए कि फिल्म बेहद सफल रही. इस पर भी चुटकी ली पत्रकार बंधु ने अपने अंदाज़ में. यह है आज के दौर में फिल्मों को करोड़ों का बिज़नेस कर रही कह कर झूठे प्रचार-प्रसार द्वारा सफल दिखाना.

हम सभी जानते हैं कि सलमान ख़ान इंसान भले ही अच्छे हों, पर प्रभावशाली अभिनय उनके बस की बात नहीं. लेकिन क्या कहें स्टारडम और चापलूसी का ऐसा हैंगओवर रहा है फिल्म इंडस्ट्री में कि लोग उस भेड़चाल में झूठी वाहवाही करने से बाज़ नहीं आते. उस पर तुर्रा यह कि उन्होंने कई कलाकारों का करियर ख़त्म कर दिया.
अरे भाई, जो अपना ही करियर नहीं बना पाया, वो भला किसी का क्या नुक़सान कर पाएगा. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि स्टार्स की कामयाबी में क़िस्मत बहुत बड़ी भूमिका निभाती है.

सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या या हत्या का मुद्दा हो, करण जौहर को लेकर ब्लेम गेम, नेपोटिज़्म, राजेश खन्ना की संजीव कुमार को लेकर असुरक्षा की भावना, राज बब्बर की रेखा के साथ अफेयर की अफ़वाह, राज कपूर का किन्नर से दोस्ती... ऐसी न जाने कितनी रोचक बातों को लेकर खुलासा किया गया है मेरी सहेली के इस 115 वें पॉडकास्ट में.

सेल्यूलाइड की चमक-दमक हर किसी को आकर्षित करती है, पर इसके पीछे का अंधेरा बहुत कम लोग जान-समझ पाते हैं. आज फेक लाइक्स, रील्स, फॉलोवर्स की अंधी दौड़ से लेकर भ्रमित करोड़ों कमाने, हिट-सुपरहिट दिखाने का ट्रेंड बेतहाशा बेकाबू हो चला है. लेकिन फिल्ममेकर्स भी अब समझने लगे है कि पब्लिक उतनी भी भोली नहीं जितना कि वे समझते हैं.
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आख़िरकार ऐसा क्या हुआ कि गुलज़ार साहब से लेकर ऋषिकेश मुखर्जी तक ने फिल्में ना के बराबर बनाने लगे. कहां-क्या चूक हो गई या कमी रह गई? किस तरह फिल्म इंडस्ट्री का पहले वाला सुनहरा दौर लाया जा सकता है वरिष्ठ पत्रकार ज़वेरी इस पर भी अपनी बेबाक़ राय रखते हैं. उनकी कई बातें चौंकाती भी हैं, जैसे- आनंद फिल्म में अमिताभ बच्चन की जगह पहले संजीव कुमार को लिया जाना था... विवेक ओबेरॉय का करियर बर्बाद करने में सलमान खान का हाथ... राज बब्बर का रेखा के साथ अफेयर को लेकर झूठा प्रचार... आख़िर इन सब गॉसिप व बातों में कितनी सच्चाई है, वो भी जानेंगे इस पॉडकास्ट में. तो चलिए एक बार देख-सुन लेते हैं फिल्म इंडस्ट्री के डार्क साइड्स को.

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