प्रेम जीवन का वह ख़ूबसूरत एहसास है, जो इंसान को भीतर से समृद्ध करता है. सच्चे प्रेम में व्यक्ति को सुरक्षा, सम्मान, अपनापन और भावनात्मक सहारा मिलता है. लेकिन हर रिश्ता प्रेम नहीं होता. कई बार हम जिस रिश्ते को प्यार समझकर बचाए रखने की कोशिश करते रहते हैं, वह धीरे-धीरे हमारी मानसिक शांति, आत्मसम्मान और पहचान को ख़त्म करने लगता है.
रिश्तों को लेकर कपल के बीच क्यों प्यार कम होता जा रहा है? पति-पत्नी से जुड़े कई चौंकाने वाले पहलुओं को जानें मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में. पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें-
अगर कोई रिश्ता आपको ख़ुश करने से ज़्यादा रुलाता है, आपकी भावनाओं को बार बार चोट पहुंचाता है और थोड़ी-सी परवाह पाने के लिए आपको अपना आत्मसम्मान तक छोड़ना पड़ता है, तो ठहरकर सोचना ज़रूरी है. संभव है कि आप प्रेम में नहीं, बल्कि ट्रामा बांडिंग के भावनात्मक चक्र में फंस चुकी हों.
जब प्यार और दर्द साथ-साथ चलने लगें
ट्रामा बांडिंग ऐसी भावनात्मक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति किसी ऐसे इंसान से गहराई से जुड़ जाता है, जो उसे बार बार मानसिक या भावनात्मक पीड़ा देता है. दिल जानता है कि रिश्ता तकलीफ़ दे रहा है, लेकिन मन उससे अलग होने को तैयार नहीं होता. कभी साथी बहुत प्यार करता है, आपको ख़ास महसूस कराता है और अगले ही दिन छोटी सी बात पर अपमानित कर देता है. आप रोती हैं, दुखी होती हैं और रिश्ता ख़त्म करने का फ़ैसला करती हैं. लेकिन जैसे ही वह माफ़ी मांगता है, प्यार जताता है या कोई उपहार देता है, आपके भीतर फिर उम्मीद जाग जाती है. आप सोचती हैं कि वह बुरा नहीं है, बस उससे ग़लती हो गई थी. यहीं से एक ख़तरनाक चक्र शुरू हो सकता है.
निशा की कहानी समझिए
निशा और समीर दो साल से रिश्ते में थे. शुरुआत में समीर बेहद प्यार करने वाला था. वह निशा की छोटी-छोटी ज़रूरतों का ध्यान रखता, उसकी पसंद याद रखता और हर समय उसे ख़ास महसूस कराता था. धीरे-धीरे उसका व्यवहार बदलने लगा. वह छोटी बातों पर ग़ुस्सा करने लगा और कई बार दोस्तों के सामने निशा को अपमानित भी कर देता. एक दिन झगड़े के बाद निशा ने तय कर लिया कि अब वह यह रिश्ता ख़त्म कर देगी. अगले दिन समीर रोता हुआ उसके पास आया. उसने माफ़ी मांगी और कहा कि वह तनाव में था और उसका ग़ुस्सा निशा पर निकल गया.
साथ में वह निशा का पसंदीदा परफ्यूम भी लाया था. निशा का दिल पिघल गया. उसने सोचा कि हर इंसान से ग़लती होती है. वह मुझसे प्यार तो करता ही है.
कुछ दिन सब ठीक रहा. फिर वही ग़ुस्सा, अपमान, माफ़ी और प्यार का सिलसिला दोबारा शुरू हो गया. निशा धीरे-धीरे इस चक्र में फंसती चली गई.
लव बॉम्बिंग से शुरू हो सकता है सफ़र
ट्रामा बांडिंग अक्सर शुरुआत में पहचान में नहीं आती। रिश्ते के शुरुआती दौर में सामने वाला व्यक्ति ज़रूरत से ज़्यादा प्यार, ध्यान और उपहार देकर आपको भावनात्मक रूप से अपने क़रीब ला सकता है. इसे लव बॉम्बिंग कहा जाता है. आपको लगता है कि आपको बिल्कुल वैसा ही साथी मिल गया है, जिसकी आपने कल्पना की थी.
लेकिन समय के साथ उसका व्यवहार बदलने लगता है. वह आपकी पसंद, कपड़ों, दोस्तों और फ़ैसलों में कमी निकालना शुरू कर सकता है. तुम ऐसे कपड़े क्यों पहनती हो? तुम्हें कुछ समझ ही नहीं है. ऐसी बातें धीरे-धीरे आपके आत्मविश्वास को कमज़ोर करने लगती हैं.
जब आपको ख़ुद पर ही शक होने लगे
ट्रामा बांडिंग में गैसलाइटिंग भी दिखाई दे सकती है. इसमें सामने वाला व्यक्ति आपके अनुभवों और यादों को ही ग़लत साबित करने की कोशिश करता है. आप कहती हैं कि तुमने कल मेरे साथ बहुत बुरा व्यवहार किया था. वह जवाब देता है कि मैंने ऐसा कुछ कहा ही नहीं. बार बार ऐसा होने पर आप अपनी समझ और याददाश्त पर संदेह करने लगती हैं. आपको लगने लगता है कि शायद ग़लती वास्तव में आपकी ही थी. यही वह समय है, जब रिश्ता आपके आत्मविश्वास को भीतर से कमज़ोर करना शुरू कर देता है.
तनाव और राहत का ख़तरनाक चक्र
ऐसे रिश्ते में अक्सर एक पैटर्न बन जाता है कि पहले तनाव, फिर झगड़ा या अपमान और उसके बाद अचानक प्यार, माफ़ी और देखभाल. दुख के बाद मिलने वाली राहत इतनी तीव्र लगती है कि व्यक्ति उसी राहत का इंतज़ार करने लगता है. कुछ समय बाद वह यह भूल जाता है कि उसे सामान्य और सम्मानजनक व्यवहार पाने के लिए इतना दर्द क्यों सहना पड़ रहा है. यही कारण है कि कई महिलाएं जानते हुई भी ऐसे रिश्ते से बाहर नहीं निकल पातीं.
पहचानिए कि कहीं आप तो नहीं फंसी हैं
कुछ संकेतों पर ध्यान देना ज़रूरी है, परिवार और दोस्त आपको रिश्ते के बारे में समझाते हैं, लेकिन आप हर बार साथी का बचाव करती हैं. आप कई बार रिश्ता ख़त्म करने का फ़ैसला करती हैं, फिर उसकी थोड़ी सी परवाह देखकर वापस लौट जाती हैं.
आपकी ख़ुशी पूरी तरह उसके व्यवहार पर निर्भर हो गई है.
वह आपको कितना भी दुख पहुंचाए, आप अंत में ख़ुद को ही दोष देती हैं. आपको लगता है कि उसके बिना आप ख़ुश नहीं रह सकतीं.
आपने अपने दोस्तों, परिवार और अपनी पसंद-नापसंद से दूरी बनानी शुरू कर दी है. आपको लगता है कि रिश्ते को बचाने के लिए आपको लगातार ख़ुद को बदलना होगा. अगर इनमें से कई बातें आपकी ज़िंदगी से मेल खाती हैं तो इसे नज़रअंदाज़ न करें.
रिश्ते से बाहर निकलना मुश्किल है, असंभव नहीं
ट्रामा बांडिंग से बाहर निकलना आसान नहीं होता, क्योंकि यह केवल रिश्ता ख़त्म करने का सवाल नहीं है. यह उस भावनात्मक निर्भरता से बाहर आने की प्रक्रिया है, जो धीरे-धीरे बन चुकी होती है. सबसे पहले ख़ुद से ईमानदारी से पूछिए कि क्या यह रिश्ता मुझे मज़बूत बना रहा है या भीतर से तोड़ रहा है?
अगर जवाब दर्द की तरफ़ है तो अपने अनुभव को छोटा मत समझिए.
रिश्ता ख़त्म करने का फ़ैसला करने के बाद सामने वाला व्यक्ति भावनात्मक दबाव, माफ़ी, वादों या अचानक प्यार के ज़रिए आपको वापस खींचने की कोशिश कर सकता है. ऐसे समय में अपनी सीमाएं स्पष्ट रखना ज़रूरी है. ज़रूरत हो तो संपर्क बंद करें और डिजिटल माध्यमों पर भी दूरी बनाएं. अगर रिश्ते में धमकी, हिंसा या सुरक्षा का ख़तरा हो तो अकेले सामना करने की बजाय परिवार, भरोसेमंद लोगों और स्थानीय सहायता सेवाओं की मदद लें.
अकेली मत लड़िए
इस दौर में ख़ुद को अकेला कर लेना समस्या को और कठिन बना सकता है. भरोसेमंद परिवारजनों और दोस्तों से बात करें. उन्हें बताएं कि आप किस स्थिति से गुज़र रही हैं. यदि भावनात्मक निर्भरता बहुत गहरी हो चुकी है और बार बार कोशिश के बावजूद आप बाहर नहीं निकल पा रही हैं तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना कमज़ोरी नहीं, बल्कि समझदारी है.
अब ख़ुद को चुनने का समय है
सबसे ज़रूरी बात अपने आत्मसम्मान को किसी रिश्ते की कीमत मत बनने दीजिए. प्रेम में समझौते हो सकते हैं, लेकिन लगातार अपमान नहीं. प्रेम में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भय नहीं. प्रेम में ग़लतियां हो सकती हैं, लेकिन बार बार होने वाला शोषण प्रेम का प्रमाण नहीं है. याद रखिए, जिस रिश्ते में आपको ख़ुद को खोना पड़े, वह रिश्ता आपकी पूरी ज़िंदगी नहीं हो सकता.
आप किसी की थोड़ी सी परवाह पाने के लिए लगातार दुख सहने के लिए पैदा नहीं हुई हैं. प्रेम आपको भीतर से खाली नहीं करता, बल्कि मज़बूत बनाता है.
अगर कोई रिश्ता आपको हंसाने से ज़्यादा रुलाता है और प्यार पाने के लिए आपको अपना आत्मसम्मान खोना पड़ता है तो उसे प्रेम का नाम देने से पहले एक बार ठहरकर ज़रूर सोचिए.
ख़ुद को बचाना स्वार्थ नहीं है. ख़ुद को चुनना आपका अधिकार है और इस मुक्ति की शुरुआत किसी और के बदलने से नहीं, आपके अपने एक मज़बूत फ़ैसले से होती है.
– स्नेहा सिंह

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