अपने रिश्ते को बनाएं स्ट्रेस फ्री…

व़क्त की रफ़्तार में कई लम्हे टूटे, बहुत कुछ पाने की हसरत में कई मीठे पल छूटे… कभी थामा था जिस दामन को, उसका सिरा फिसलता गया, कभी चाहा था जिसके आंचल में सिमटना, उसका निशां मिटता गया… मुहब्बत के जागे ख़्वाबों ने न जाने कब पलकें मूंद लीं… बढ़ी धड़कनों ने धीमे-धीमे अपनी सांसें रोक लीं… पास आ जाओ कि रूह का रिश्ता फिर से कायम हो… जो अधूरा रह गया है हम में-तुम में, वो कुछ हद तक तो मुकम्मल हो…

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क़रीबी रिश्ते जितने ख़ास होते हैं, उतने ही नाज़ुक भी… यही वजह है कि इन्हें संभालना पड़ता है, ताकि रिश्ते की मासूमियत और आपका रिश्ता हमेशा स्ट्रेस फ्री रहे. तो अपने रिश्ते को तनावमुक्त बनाने के लिए अपनाएं ये तमाम उपाय.

नकारात्मकता से बचें: ज़िंदगी में बहुत कुछ ऐसा भी होता है, जिन पर हमारा कंट्रोल नहीं होता, ऐसे में नकारात्मक दिशा में सोचने से बचें. अगर आपके पार्टनर का समय ज़्यादा अच्छा नहीं चल रहा, तो उसे सपोर्ट करें. नकारात्मक बातों से आप न स़िर्फ अपने पार्टनर, बल्कि अपने रिश्ते के स्ट्रेस को भी बढ़ाएंगे.

आरोप-प्रत्यारोप से बचें: रिश्ते में ब्लेम गेम बहुत ही ख़तरनाक होता है. इससे अच्छे से अच्छा रिश्ता कमज़ोर हो जाता है. अगर कोई समस्या है भी, तो उसकी ज़िम्मेदारी लेने से हिचकें नहीं. एक-दूसरे पर दोषारोपण से रिश्ते स़िर्फ कमज़ोर होते हैं और रिश्ते में तनाव बढ़ता है.

रिएक्ट करने की बजाय रेस्पॉन्ड करें: रिएक्शन और रेस्पॉन्स में काफ़ी फ़र्क़ होता है. अगर कोई गंभीर या चिंताजनक बात भी है, तब भी तुरंत रिएक्ट करने की बजाय स्थिति को समझें और फिर उस पर रिस्पॉन्स दें. रिएक्शन दरअसल एक नकारात्मक क्रिया है, जिससे तनाव बढ़ता है, जबकि रेस्पॉन्स सकारात्मक क्रिया है, जिससे आप परिपक्वता से वस्तुस्थिति का जायज़ा लेकर बातें समझ सकते हैं.

अपने पार्टनर की चिंता व परेशानी को समझें: अगर आपका पार्टनर आपकी फ़िक्र करता है, तो उसका सम्मान करें, उसे अपनी लाइफ में दख़लअंदाज़ी या रोकटोक न समझें. आपसे अगर वो कुछ पूछे, तो उसकी आपके प्रति चिंता को समझें और अपनी तकलीफ़ उसके साथ शेयर करें. इसी तरह यदि पार्टनर का मूड ठीक नहीं, तो उसे थोड़ा स्पेस दें, ताकि सामान्य होने पर वो अपनी परेशानी आपके साथ शेयर कर सके. अपने मनमुताबिक पार्टनर का रिएक्शन न मिलने पर बेवजह स्ट्रेस बढ़ता है, बेहतर होगा समझदारी से काम लें और स्ट्रेस से दूर रहें.

एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र करें: स्त्री और पुरुष एक ही स्थिति पर अलग-अलग तरह से रिएक्ट करते हैं और स्ट्रेस को हैंडल करने के उनके तरी़के भी अलग होते हैं. इस अंतर को समझें और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें.

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तनाव की मूल वजह को पहचानें: अगर आप दोनों ही अपने रिश्ते में तनाव महसूस कर रहे हैं, तो सबसे पहले तनाव की मूल वजह को पहचानें. यह देखें कि तनाव किस वजह से है, उसका कारण और उसका स्रोत क्या है? क्या यह कारण बाहरी है या फिर घर के भीतर का? क्या आर्थिक मामले से जुड़ा है या अन्य किसी से? ऐसे में आपको यह समझना होगा कि इन तनावों को रिलेशनशिप प्रॉब्लम्स की तरह न देखें. इनका समाधान मिलकर करें. आपस में बात करें और किसी नतीजे पर पहुंचें.

पार्टनर को सम्मान दें: आपके रिश्ते में से आधे से अधिक स्ट्रेस इसी बात से दूर हो सकता है कि आप अपने पार्टनर को कितना सम्मान देते हैं. भले ही आप तनाव में हैं या आपका मूड ख़राब है, इस बात को कभी न भूलें कि आपका पार्टनर आपके सुख-दुख का साथी है. ऐसे में आप उस पर अपनी खीज निकालकर स़िर्फ अपने रिश्ते के तनाव को बढ़ाएंगे. बेहतर होगा कि इस छोटी-सी, लेकिन ज़रूरी बात को न भूलें.

रिश्ते और समस्याओं के बीच के फ़र्क़ को पहचानें: यह बेहद ज़रूरी है कि आप अपने रिश्ते की प्रॉब्लम्स व अन्य समस्याओं के बीच के फ़र्क़ को समझें. हर समस्या को रिश्ते से जोड़कर देखना ज़रूरी नहीं, वरना सभी का असर रिश्ते पर ही पड़ेगा.

अपने पार्टनर को उसकी अहमियत महसूस कराएं: आपको यह समझना होगा कि चाहे जो हो जाए, हर समस्या का सामना आपको मिलकर करना है. अपने पार्टनर को यह एहसास दिलाना होगा कि उसकी अहमियत क्या है आपके जीवन में. इससे रिश्ते का स्ट्रेस भी कम होगा और अन्य स्ट्रेस से भी आप बेहतर तरी़के से लड़ सकेंगे. ग़लती हो जाए, तो माफ़ी मांग लें और कुछ अच्छा लगे, तो सराहना करें. इससे रिश्ते बेहतर और स्ट्रेस फ्री बनते हैं. इसके अलावा दिल बड़ा रखें, माफ़ करना सीखें.

ज़रूरत पड़ने पर मदद लेने से न हिचकें: ज़रूरी नहीं कि हर समस्या का समाधान हमारे पास हो, कभी-कभी हमें मदद भी लेनी पड़ती है. चाहे यह मदद अपने पार्टनर की हो या फिर रिलेशनशिप एक्सपर्ट की. अगर आपको यह महसूस होने लगे कि आपके रिश्ते में ज़रूरत से ज़्यादा स्ट्रेस आ गया है, तो एक्सपर्ट के पास जाएं. यह न सोचें कि आप दोनों या आपके दोस्त व रिश्तेदार ही इसका समाधान निकालेंगे. इससे तनाव बढ़ता जाएगा और रिश्ता बिखरता जाएगा. समय रहते एक्सपर्ट ओपिनियन ज़रूर लें और अपने रिश्ते को स्ट्रेस फ्री बनाकर बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ें. ज़िद और अहं के चलते यह सोचना कि पार्टनर ग़लत है, तो आप क्यों किसी तीसरे की सलाह लें, यह रवैया आपके रिश्ते पर ही भारी पड़ेगा. रिश्ते को स्ट्रेस फ्री रखने के लिए अपने अहं व ज़िद को छोड़ना ही बेहतर है.

– गीता शर्मा