मैमोग्राम से जुड़ी 11 बातें...

मैमोग्राम से जुड़ी 11 बातें जो हर महिला को जाननी चाहिए… (Mammogram: 11 Things Every Woman Should Know…)

Mammogram

कैंसर को लेकर कई लोगों को कुछ भ्रम बना रहता है, ख़ासकर ब्रेस्ट कैंसर के मामले में. इसी से जुड़े मैमोग्राम के बारे में भी महिलाओं को बहुत कम जानकारी होती है. उन्हें इसके बारे में संपूर्ण जानकारी हो, इसलिए यहां इसके बारे में प्रश्नोत्तर के रूप बता रहे हैं. पुणे के जुपिटर हॉस्पिटल की डॉ. प्रांजली गाडगिल, जो ब्रेस्ट कैंसर सर्जन हैं, ने इसके बारे में विस्तारपूर्वक बताया.

मैमोग्राम होता क्या है?
मैमोग्राम यह ब्रेस्ट (स्तन) के मुलायम ऊतक का निकाला गया विशेष प्रकार का एक्स-रे होता है. यह जांच मैमोग्राफी सेंटर में ख़ास उपकरण द्वारा की जाती है. अति सूक्ष्म, कम ऊर्जावाले रेडिएशन द्वारा हर एक ब्रेस्ट के दो एक्स-रे निकाले जाते है. रेडिओलॉजिस्ट इन चित्रों का परिक्षण करके रिजल्ट तैयार करते है.

स्तन की कोई शिकायत न होने पर मैमोग्राम क्यों करवाना?
स्तन का कर्करोग यानी ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे अधिक होनेवाला कैंसर है, इसीलिए विशेषज्ञों द्वारा सलाह दी जाती है कि महिलाओं को ४० साल की उम्र के बाद इसकी वार्षिक जांच ज़रूर करवानी चाहिए. नियमित जांच करनेवाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का निदान, हाथ को गांठ का स्पर्श होने से पहले ही हो सकता है. प्रारंभिक अवस्था में इलाज करने से इसका इलाज आसानी से होता है. साथ ही कोई गम्भीर समस्या या जान का ख़तरा भी नहीं रहता. स्वस्थ महिलाओं में इस उद्देश्य से की गई जांच को स्क्रिनिंग मैमोग्राफी कहा जाता है.

स्तन में गांठ होनेपर मैमोग्राफी करवानी चाहिए या सोनोग्राफी?
४० साल से कम उम्र की महिलाओ के लिए प्रथम स्तन की सोनोग्राफी अर्थात अल्ट्रासाउंड जांच की जाती है. सोनोग्राफी के अंतर्गत एक्स-रे का उपयोग ना करके, ध्वनि तरंग का उपयोग किया जाता है. ४० साल से अधिक उम्र की महिलाओं का, प्रथम मैमोग्राफी उसके बाद आवश्यकतानुसार सोनोग्राफी की जाती है. दोनों ही जांच एक-दूसरे के पूरक होने से, कई बार पूर्ण निदान के लिए दोनों उपकरणों का उपयोग किया जाता है. इन जांच के लिए विशेषज्ञों की सलाह भी अनिवार्य है.

मैमोग्राम में दिखनेवाली हर गांठ, ज़रुरी है कि कैंसर ही हो?
८० प्रतिशत गांठें कैंसर की (मतलब मलिग्नंट) न होकर अन्य कई वजहों से भी हो सकती है. इन दोषों को बिनाइन ब्रेस्ट डिसीज़ कहा जाता है. इसके अंतर्गत ब्रेस्ट सिस्ट फाइब्रोएड़ेनोमा इन्फेक्शन्स तथा अन्य कई क़िस्म के स्तन की बीमारी आती है.


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मैमोग्राफी के लिए जाते समय क्या-क्या तैयारी करनी चाहिए?
सुबह स्नान के बाद पाउडर, क्रीम, डिओड्रेंट आदि का इस्तेमाल किए बिना चेकअप के लिए जाना चाहिए. इस जांच के लिए खाली पेट रहने की ज़रुरत नहीं है. पूर्व में किए गए सभी मैमोग्राफी तथा सोनोग्राफी के रिपोर्ट अपने साथ रखें. नई जांच की तुलना पुरानी फिल्म की रिपोर्ट को देख उसके साथ करना आवश्यक होता है. पहले के बायोप्सी तथा महत्वपूर्ण सर्जरी के रिपोर्ट भी साथ में रखना आवश्यक है.

मैमोग्राफी करते समय दर्द होता है क्या?
एक्स-रे लेते समय स्तन को ५ से १० सेकंड प्लेट्स के बीच में रखा जाता है, जिससे स्तन के ऊपर दबाव महसूस होता है. अनुभवी टेक्निशियन और आधुनिक उपकरण होने से जांच बिल्कुल आसानी से होता है. इसके लिए आई.वी. इंजेक्शन तथा कॉन्ट्रास्ट डाय की आवश्यकता नहीं होती.

मैमोग्राम एब्नार्मल आने पर क्या करना चाहिए?
मैमोग्राम में कुछ अनुचित दिखाए देने पर उसका उचित निदान करने के लिए कुछ और जांच की जाती है. अधिकतर सोनोग्राफी द्वारा ही संदेह को दूर किया जाता है. कभी टोमोसिंथेसिस या ब्रेस्ट एमआरआई तथा विशेष इमेजिंग उपकरणों का उपयोग भी किया जाता है. कैंसर की या उसके प्राथमिक अवस्था की अगर ज़रा भी संभावना है, तो सुई की जांच मतलब बायोप्सी की जाती है. हाथ को स्पर्श न होनेवाली गांठ की बायोप्सी के लिए सोनोग्राफी का उपयोग किया जाता है.

मैमोग्राफी करने से क्या कैंसर से बच सकते है?
नियमित रूप से वार्षिक मैमोग्राम करनेवाली महिलाओं में कैंसर का निदान प्रथम चरण में ही होता है. इस वजह से इलाज आसान होकर किसी गम्भीर ख़तरे को टाला जा सकता है. मैमोग्राफी से कैंसर का प्रजनन रुकता नहीं है, किंतु समयानुसार निदान और उपचार संपन्न करने से नुक़सान कम होता है.

फैमिली हिस्ट्री में मां, बहन, मौसी, बुआ आदि इनमें से किसी को कैंसर हो, तो क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
ब्रेस्ट कैंसर यह ५ से १० प्रतिशत मरीज़ों में आनुवांशिक होता है. ऐसी संभावना होने पर उचित स्तन रोग चिकित्सक/ब्रेस्ट सर्जन से सलाह लेकर जेनेटिक टेस्टिंग करवाना चाहिए. आप की आयु, अब तक के स्तन की जांच के रिपोर्ट, फैमिली हिस्ट्री, जेनेटिक रिपोर्ट इन सभी का अध्ययन करके योग्य चेकअप और उपचार की सलाह दी जाती है.


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हाथों को गांठ का स्पर्श महसूस हो, किंतु मैमोग्राफी में दिखाई न दे तो क्या करना चाहिए?
स्तन की कोई भी शिकायत होने पर मैमोग्राफी करने से पहले डॉक्टर द्वारा चेकअप करवाना चाहिए. मैमोग्राफी में गांठ न दिखाई देने के और भी कई कारण हो सकते है. जांच के समय ठीक से पोजीशन न दी गई हो, तो स्तन का पूर्ण भाग चित्र में नहीं आता है. कुछ महिलाओं में स्तन का गहन घनिष्ठ (डेन्स ब्रेस्ट) होने पर सिर्फ़ एक्स-रे की जांच पर्याप्त नहीं होती, इसीलिए सोनोग्राफी या अन्य उपकरण की सहायता ली जाती है. जांच द्वारा संतुष्टि न होने पर स्तन रोग चिकित्सक या ब्रेस्ट सर्जन की सलाह अवश्य ले.

जिस महिला का ब्रेस्ट कैंसर का निदान होने के बाद उपचार हुआ हो, तो क्या उसे भी मैमोग्राफी करवानी चाहिए?
मास्टेक्टॉमी की ऑपरेशन द्वारा स्तन का पूर्ण हिस्सा अगर निकाला गया हो, फिर भी दूसरे स्तन की वार्षिक जांच आवश्यक है. स्तन का कुछ ही हिस्सा रखकर लम्पेक्टॉमी की गई हो, तो शुरुआती एक-दो साल हर छह महीने में मैमोग्राफी की जाती है और उसके बाद वार्षिक जांच की जाती है. कैंसर के मरीज़ों को ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाहनुसार नियमित जांच करवाते रहना ज़रूरी है.

– ऊषा गुप्ता


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