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अमिताभ को अपना बेटा मानते थे महमूद, लेकिन अमिताभ की इस हरकत से दिल टूटा तो मरते दम तक नहीं की बात  (Mehmood always called himself Amitabh Bachchan’s ‘second father’, but was so heartbroken by his action that he never spoke to him again for the rest of his life)

एक्टर-कमेडियन महमूद (Mehmood) न सिर्फ अच्छे एक्टर थे, बल्कि बहुत अच्छे इंसान भी थे. उनके इंसानियत और नेकनीयती के कई किस्से मशहूर हैं. लेकिन ये बेहद अफसोस की बात है कि जिस इंडस्ट्री को उन्होंने इतने साल दिए, इतने लोगों की मदद की, वही लोग जब महमूद के तकलीफ के दिन आए, तो सबने उनसे किनारा कर लिया. इन लोगों में सबसे ऊपर आता है अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) का नाम, जिनको करियर में आगे बढ़ाने में महमूद ने बहुत मदद की, लेकिन जब महमूद हॉस्पिटल में एडमिट हुए, तो बिग बी उनका हालचाल लेने तक (Mehmood- Amitabh Bachchan rift story) नहीं पहुंचे. ये किस्सा हाल ही में मेरी सहेली पॉडकास्ट (Meri Saheli Podcast) में पहुंचे फ़िल्म हिस्टोरियन हनीफ  ज़वेरी ने सुनाया, जो महमूद के बेहद करीबी रहे हैं और उनके जीवन पर किताब भी लिख चुके हैं.

पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

हनीफ ज़वेरी जब महमूद की बायोग्राफी लिख रहे थे, तब महमूद ने खुद ये बात उन्हें बताई थी. अमिताभ बच्चन ने फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' से एक्टर के तौर पर डेब्यू किया था. फिल्म में उनका सपोर्टिंग रोल था. लेकिन फिल्म नहीं चली और अमिताभ बच्चन का एक्टिंग करियर भी थम गया. इसके बाद अमिताभ ने 12 फिल्मों में सपोर्टिंग रोल किया, लेकिन सब की सब फ्लॉप हो गईं. ऐसे में कोई भी मेकर उन्हें अपनी फ़िल्म में लेने को तैयार नहीं था. लेकिन महमूद को यकीन था कि अमिताभ बच्चन लंबी रेस का घोड़ा हैं. बस महमूद ने बिग बी का हाथ थाम लिया.  महमूद ने सिर्फ बिग बी को अपने घर में रहने की जगह ही नहीं दी, बल्कि उन्हें फिल्म में काम करने का मौका भी दिया. उन्होंने अपने प्रोडक्शन की फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ में अमिताभ बच्चन को लीड रोल दिलवाया. लेकिन बिग बी ने ये सब भुला दिया. फिर ऐसा क्या हुआ कि महमूद के दिल में अमिताभ के लिए कड़वाहट घुल गई और उनके रिश्ते में दूरियां आती चली गईं.

दरअसल महमूद की बाइपास सर्जरी हुई थी और वो मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट थे. उसी समय अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन गिर गए थे तो वो भी ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में ही एडमिट थे. अमिताभ अपने पिता को देखने हॉस्पिटल आए, लेकिन महमूद से मिलने भी नहीं गए, जबकि वो जानते थे कि महमूद उसी हॉस्पिटल में हैं. इसके बावजूद उन्होंने हॉस्पिटल में मिलकर उनका हालचाल तक नहीं लिया. इस बात से महमूद को बहुत तकलीफ हुई. इस बात का ज़िक्र वो अपने इंटरव्यू में भी कर चुके हैं.

इतना ही नहीं, हनीफ ज़वेरी ने मेरी सहेली पॉडकास्ट में बताया, "अमिताभ को महमूद ने बॉम्बे टू गोवा के बाद कुंवारा बाप (स्पेशल अपीयरेंस), गरम मसाला, खुद्दार इन फिल्मों में लिया. अमिताभ बच्चन ने इतनी लंबी पारी खेली, और महमूद का उस समय डाउनफॉल चल रहा था, लेकिन अमिताभ ने उन्हें एक भी फ़िल्म नहीं दिलवाई. जबकि वो ऐसा कर सकते थे. इतना ही नहीं, कहा तो ये भी जाता है कि 'अभिमान' में पहले महमूद को ही लाया जाना था, लेकिन मेकर्स पर दबाव डालकर उनको असरानी से रिप्लेस कर दिया गया. और सबसे बड़ी बात, अमिताभ ने कभी इन बातों पर अपनी सफाई भी नहीं दी, वरना महमूद की नाराजगी दूर हो जाती."

हनीफ ज़वेरी ने बताया कि अमिताभ महमूद के अंतिम दर्शन करने भी नहीं पहुंचे थे, "महमूद का शव आखिरी दर्शन के लिए महबूब स्टूडियो में रखा गया था, लेकिन अमिताभ बच्चन उनके आखिरी दर्शन करने भी नहीं पहुंच पाए. बस ट्विटर पर उनके लिए एक संदेश लिख दिया. हां जया बच्चन ज़रूर वहां पहुंची थीं."

इस पॉडकास्ट में हनीफ ज़वेरी ने महमूद की लाइफ से जुड़े और भी कई अनसुने किस्से शेयर किए हैं, जो शायद ही आपने कभी सुना होगा.

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