फिल्म समीक्षा: चुप- रिवेंज ऑफ द ...

फिल्म समीक्षा: चुप- रिवेंज ऑफ द आर्टिस्ट… (Movie Review: Chup- Revenge Of The Artist)

‘चुप’ फिल्म एक कलाकार की प्रतिशोध की अद्भुत कहानी है. उस पर आर. बाल्की जैसे मंजे निर्देशक के निर्देशन ने फिल्म को और भी उम्दा बना दिया है. पहली बार हिंदी सिनेमा में इस विषय पर यानी मूवी क्रिटिक्स की सीरियल किलिंग पर फिल्म बनी है. फिल्म का विषय कुछ ऐसा है कि शुरुआत ही एक फिल्म समीक्षक की हत्या से होती है. जब पुलिस छानबीन करने की शुरुआत करती है, तो एक के बाद एक कई हत्याएं होने लगती है. तहकीकात से पता चलता है कि वे सभी मृतक फिल्म क्रिटिक्स थे.


फिल्म इंस्पेक्टर की भूमिका में सनी देओल एक अलग अंदाज़ में इस फिल्म में नज़र आए हैं. वे अपनी तरफ़ से अलग ढंग से इन हत्याओं की छानबीन करते हैं. सिलसिलेवार हो रही हत्याओं के तह तक जाने की कोशिश करते हैं. इनमें उनकी मदद करती हैं उनकी दोस्त क्रिमिनल साइकोलॉजिस्ट पूजा भट्ट.


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इस फिल्म के मुख्य विषय के साथ ही एक अलग प्रेम कहानी भी चलती रहती है, जो सलमान और श्रेया के बीच चल रही होती है. दुलकर सलमान, जो एक फूलवाले की भूमिका में है और श्रेया एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट है, जो एक बेहतरीन पत्रकार बनने की ख़्वाहिश रखती है. कैमियो के रोल में आर. बाल्की के फेवरेट अमिताभ बच्चन भी अपने ख़ास अंदाज़ में उपस्थिति दर्ज कराते हैं.


यह फिल्म गुरुदत्त की ‘काग़ज़ के फूल’ फिल्म की कड़ी को भी अप्रत्यक्ष रूप से जोड़ती है. संक्षेप में, जब गुरुदत्त ने ‘काग़ज़ के फूल’ फिल्म बनाई थी, तब इसे क्रिटिक्स ने काफ़ी निगेटिव रिमार्क्स दिए थे. इसकी ख़ूब आलोचना की थी. तब गुरुदत्त बेहद आहत हुए थे और ऐसा अंदाज़ा लगाया जाता है कि इस फिल्म की असफलता ने उन्हें इतना हताश-निराशा और अवसाद में घेर लिया था कि उन्होंने कुछ सालों बाद आत्महत्या कर ली. लेकिन फिल्म में बीच-बीच में कई बार इस फिल्म के गाने और इसके धुन को जोड़ा गया है, जो एक अलग ही समां बांधते हैं. एस.डी. बर्मन के धुन कानों को सुकून देते हैं.


डायरेक्टर आर. बाल्की ने पुरज़ोर कोशिश की है कि एक अलग तरह की सस्पेंस और रोमांच पैदा करनेवाली फिल्म बनाई जाए और इसमें वे काफ़ी हद तक कामयाब भी रहे. फिल्म में विशाल सिन्हा की सिनेमैटोग्राफी और अमित त्रिवेदी का संगीत सराहनीय है. बैकग्राउंड स्कोर दमदार है. स्नेहा खनवलकर और अमन पंत ने भी अच्छी धुनें दी है. स्नेहा शंकर की आवाज़ में यह दुनिया अगर मिल भी जाए… सुनने में सुमधुर लगते हैं. गया गया गया… गाना रूपाली मोघे ने बढ़िया गाया है, वहीं अमित त्रिवेदी की आवाज़ में मेरा लव मैं… आकर्षक लगे हैं. मुंबई की गलियों से लेकर उस दौर से लेकर इस दौर के सिनेमा के रंग को भी ख़ूबसूरती से उकेरा गया है.


सनी देओल, दुलकर सलमान, श्रेया धनवंतरी, सरन्या पोंवन्नन, पूजा भट्ट हर किसी ने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया और दर्शकों की उम्मीदों पर खरे उतरे. यह साइको थ्रिलर ड्रामा मूवी यक़ीनन लोगों को पसंद आएगी इसमें कोई दो राय नहीं. कह सकते हैं कि निर्देशक आर. बाल्की ने फिल्मेकर गुरुदत्त को अपने अंदाज़ में ख़ास ट्रिब्यूट दिया है.

कलाकार- सनी देओल, दुलकर सलमान, श्रेया धनवंतरी, पूजा भट्ट, सरन्या पोंवन्नन, राजीव रविंद्रनाथन, अभिजीत सिन्हा, राकेश भावसार, हैरी मीना
कहानी, पटकथा, संवाद, निर्देशन- आर. बाल्की
निर्माता- राकेश झुनझुनवाला, अनिल नायडू, डॉ. जयंतीलाल गड़ा, गौरी शिंदे
रेटिंग- *** 3

Photo Courtesy: Instagram


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