फिल्म रिव्यूः नोटबुक और जंगली (Movie Review Of Notebook And Junglee)

Notebook And Junglee

फिल्मः नोटबुक 
कलाकारः जहीर इकबाल, प्रनूतन बहल
निर्देशकः नितिन कक्कड
स्टारः 3.5 

Notebook

नोटबुक साल 2014 में आई थाई फिल्म टीचर्स डायरी का हिंदी एडाप्टेशन है. सलमान ख़ान ने नोटबुक के जरिए अपने दोस्त के बेटे जहीर इकबाल और जानी मानी अभिनेत्री नूतन की ग्रैंडडॉटर प्रनूतन बहल को बॉलीवुड से इंट्रोड्यूस किया है.

कहानीः फिल्म में जहीर इकबाल कबीर नाम के एक एक्स आर्मी अफसर के रोल में हैं जो टीचर के तौर पर कश्मीर के एक स्कूल में जॉइन करते हैं, जहां उन्हें पुरानी टीचर फिरदौस (प्रनूतन बहल) की डायरी मिलती है.  इस नोटबुक में फिरदौस ने अपने  निजी विचार लिखे हैं.  जैसे- जैसे कबीर उस डायरी को पढ़ते हैं वैसे वैसे वो फिरदौस से प्यार करने लगते हैं. फिल्म के दोनों लीड कैरेक्टर ने एक दूसरे को देखा नहीं है.

क्या देंखेंः फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसकी सिनेमाटोग्राफी है, फिल्म की शूटिंग कश्मीर में हुई है और झील के बीच में बना स्कूल बहुत खूबसूरत लगता है. लीड कैरेक्टर्स का काम भी अच्छा है है. प्रनूतन और इकबाल दोनों ने ही अपने रोल के साथ न्याय किया है.

कमियांः  फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले कमजोर है. जहां फिल्म का पहला हिस्सा ठीक है, वहीं इसके दूसरे हिस्से को जबर्दस्ती खींचा गया है, ख़ासतौर पर क्लाइमेक्स. फिल्म में कश्मीरी पंडितों के पलायन के बारे में भी बताया गया है, जिसकी ज़रूरत नहीं थी.

निर्देशनः  फिल्म के डायरेक्टर नितिन कक्कड़ ‘फिल्मिस्ता’ और ‘मित्रों’ जैसी अच्छी फिल्में बना चुके हैं लेकिन इस बार वे अपना जादू चलाने में नाकाम रहे.

फिल्मः जंगली 
कलाकारः विद्युत जामवाल, अतुल कुलकर्णी, अक्षय ओबेरॉय, आशा भट, पूजा सावंत
निर्देशकः चक रसेल
स्टारः 4 

Junglee

बॉलीवुड में जानवरों पर गिनी-चुनी फिल्में बनी हैं, मगर ‘जंगली’ न केवल आपको राजेश खन्ना की ‘हाथी मेरे साथी’ की याद दिलाएगी, बल्कि कुदरत के मनोरम दृश्यों के साथ रोंगटे खड़े कर देनेवाले ऐक्शन और हाथियों के झुंड की मासूमियत और उनके क्रिया-कलाप आपका मन मोह लेंगे.

कहानीः फिल्म की कहानी राज नायर(विद्युत जामवाल) की है जो जानवरों का डॉक्टर है. राज 10 साल बाद अपनी मां की बरसी के लिए अपने घर उड़ीसा जाता है.  राज के पिता चंद्रलिका में ही हाथियों की सेंचुरी संभालते होते हैं. जहां जाकर उसे पता चलता है कि जंगल में हाथी के दांत की तस्करी की वजह से हाथियों को मारा जा रहा है. घर लौटने के बाद राज अपने बचपन के साथी हाथियों में भोला और दीदी से मिलकर बहुत खुश होता है और पुराने दिनों को याद करता है. लेकिन इसी बीच भोला को मार दिया जाता है. जिसके बाद राज हाथी के दांत की तस्करी रोकने और हाथियों को बचाने में लग जाता है.

निर्देशनः निर्देशक चक रसेल ‘जंगली’ से अपनी बॉलीवुड पारी की शुरुआत कर रहे हैं. हॉलीवुड में ‘मास्क’, ‘स्कॉर्पियन किंग’, ‘इरेजर’ जैसी बम्पर हिट फिल्में दे चुके चक रसेल ने बॉलीवुड की नब्ज को सही ढंग से पकड़ा है. फिल्म में चक रसेल ने एनिमेशन की जगह असली जानवरों को लिया है जो फिल्म का पॉजिटिव पॉइन्ट है.

क्या देखेंः फिल्म में उड़ीसा के मनोहारी जंगलों, नदियों और हाथियों को देखकर दिल खुश हो जाता है. इसके साथ ही एक्शन सीन्स काफी जबर्दस्त हैं. फिल्म में जानवर और इंसान की दोस्ती के साथ ही हाथी के दांत की तस्करी के मुद्दे पर लोगों का ध्यान खींचा गया है.  अगर आपको जानवरों से प्यार है और एक्शन फिल्में आपको पसंद है तो आप ये फिल्म देख सकते हैं.

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