
राम हर भारतवासी के दिल में बसते हैं. जीवन से लेकर मुक्ति तक की यात्रा में राम नाम की भक्ति, महिमा और विशालता को हम सभी ने देखा, सुना, जाना-समझा है. लेकिन जब वही राम गाथा बड़े पैमाने पर पर्दे पर अपनी पूरी विशालता के साथ दिखाई जाती है तो बनती है निर्देशक नितेश तिवारी की रामायणम्- राइज ऑफ ए लीजेंड पार्ट वन. रही बात इसके पार्ट टू की तो वो साल 2027 में दिवाली पर आएगी. एक लंबा इंतज़ार, पर कहते हैं ना सब्र का फल मीठा होता है. पार्ट वन देखने के बाद आप भी कुछ ऐसा ही महसूस करेंगे.

रामायण की अमर कहानी से हम सभी परिचित हैं. लेकिन फिल्ममेकर वाल्मीकि की रामायण और निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर की धारावाहिक ‘रामायण’ से प्रेरित रहे हैं. मूवी की पटकथा पर श्रीराम राघवन और नितेश तिवारी ने लाजवाब काम किया है. क़रीब सवा तीन घंटे की फिल्म कहीं भी खटकती और अखरती नहीं, जिसका श्रेय इसकी सशक्त स्क्रीनप्ले को ही जाता है. पूरी टीम की बरसों की मेहनत बड़े स्क्रीन पर अपना रंग दिखाती है.

शुरुआत जो रावण गाथा से होती है चौंकाती और लुभाती भी है. लगभग पौने घंटे तक हम रावण की लीला के इंद्रजाल में उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं. लेकिन कहीं भी ऐसा महसूस नहीं होता कि कहानी अपने मुख्य विषय से भटक रही है. देव-असुरों के युद्ध में दशानन की साम्राज्य का रसातल में चले जाना, मां का पुत्र को झिंझोड़ा जो संगीत में रमा हुआ है, कठोर तपस्या द्वारा ब्रह्माजी से अमरत्व का वरदान पाना, रावण का देवों पर अत्याचार, लंका पर कब्ज़ा जो कुबेर के पास था, शिव तांडव के साथ घमासाना लड़ाई के दृश्य- सब कुछ बेहद अद्भुत व रोचक बन पड़े हैं.

यह तो रही रावण लीला की गाथा. फिर शुरू होता है तस्वीर का दूसरा रूख… यानी राम लीला… राजा दशरथ का यज्ञ करना, तीनों पत्नियों कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी द्वारा पवित्र अमृत ग्रहण करना, फिर चार पुत्रों का जन्म, उनकी परवरिश, सब कुछ पूरी लय में कहानी को आगे बढ़ाती रहती है.

दशरथ का राम प्रेम भी किसी से छुपा नहीं रहता, वहीं लक्ष्मण का बड़े भाइॅ राम के प्रति लगाव और समर्पण से भी हर कोई वाकिफ़ है. दशरथ की भूमिका में अरुण गोविल ने प्रभावित किया है तो वहीं कैकयी के रूप में लारा दत्ता अपना दमखम दिखाती हैं. रणबीर कपूर राम के आदर्श व वचनों को पूर्ण रूप से पालन करते हुए दिखाई देते हैं. रवि दुबे लक्ष्मण के रूप में कठोरता के साथ हास्य के पल भी जुटाते हैं. सीता के रूप में साई पल्लवी ठीक ही रहीं. फिल्ममेकर को एक बार फिर सोचना होगा, क्यों न दूसरे पार्ट में सीता ही बदल दी जाए. अनुपम खेर सूत्रधार के रूप में रामायण की कहानी का आगाज़ करते हैं. साथ ही जटायु के रूप में उन्होंने बेहतरीन अदाकारी दिखाई है. रावण के साथ युद्ध का प्रसंग हर किसी भावुक कर देता है. सीता के हरण से रावण को रोक न पाने का दर्द जटायु के नेत्रों में छलक छलक पड़ता है और उनके प्राण त्यागने के साथ ही रामायण के पहले अध्याय की समाप्ति होती है.

हां, अंत में हनुमान के रूप में सन्नी देओल की आधी-अधूरी झलक उत्सुकता पैदा करती है, पर उनके पराक्रम को देखने का अवसर अगले साल ही मिल पाएगा. हां फिल्म के अंत में हनुमान चालीसा के साथ मूवी की पूरी टीम का क्रेडिट लाइन देना सुखद लगता है. साथ ही इस तरफ़ भी संकेत करता है ‘हनुमान अंश’ फिल्म की अपार सफलता से प्रेरित ही यह कदम रहा होगा.
यानी रामायणम् में राम जन्म, स्वयंवर, वनवास, सीता हरण, रावण का रौद्र रूप और संहार को लार्ज स्केल पर प्रस्तुत किया गया. शूपर्णखा के रूप में रकुल प्रीत सिंह, उनके पति बने विवेक ओबेरॉय, मंथरा बनी शीबा चड्डा, विश्वामित्र बने अंजिक्य देव, इंंद्र-कुणाल कपूर, मोहित रैना भी अपनी छाप छोड़ते हैं.
डॉ. कुमार विश्वास के गीत-संवाद बेमिसाल हैं. संगीतकार ए. आर. रहमान और बैकग्राउंड स्कोरर के रूप में जर्मनी के म्यूजिशियन हैंसी और भी कमाल कर सकते थे, जो इस तरह की भव्य सिनेमा के लिए आवश्यक था, पर वो हो न पाया. अच्छा होता कि भारतीय क्लासिक संगीत में महारत हासिल म्यूजिक डायरेक्टर को अवसर दिया जाता. ऐसे कई छोटी-छोटी त्रुटियां तो नहीं कह सकते पर बात नहीं बन पाई या प्रभावित न कर सकीं.
कह सकते हैं कि फिल्म के कलाकार, निर्देशक, निर्माता, तकनीशियन, वीएफएस, संगीत, छायाकांन सब कुछ बेहद प्रभावित करता है. फिल्म हमें एक ऐसी पौराणिक गाथा की दुनिया में ले जाती है, जहां सब कुछ अद्धभुत और उत्कृष्ट है. इसे दुनियाभर में पांच भाषाओं – हिंदी, कन्नड़, तमिल, तेलुगू और मलयालम में दिखाया जा रहा है.
‘रामायणम्’ की पूरी टीम बधाई की पात्र है इस कदर बेहतरीन सिनेमा दिखाने के लिए. नमित मल्होत्रा, धर्मा प्रोडक्शन का सहयोग भी सराहनीय है. दर्शकों के लिए बस एक निवेदन है कि फिल्म को राम के प्रति आस्था, विश्वास और प्रेम के साथ-साथ हमारे ग्रंथों को पहली बार इतने ऊंच स्तर व उत्कृष्टता से दिखाने के लिए नितेश की टीम की हौसलाअफ़जाई के लिए एक बार इसे देखना बनता ही हैं.. बाकी
होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
शेष फिर…
– ऊषा गुप्ता
Photo Courtesy: Social Media
